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मिटा दी तालाब की हस्ती, धड़ल्ले से बसाई बस्ती
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दस प्रतिशत हिस्सा ही बचा
शहर के स्टेशन रोड पर पुरुषोत्तम कलेक्शन के पीछे बड़ा तालाब था। समय के साथ ग्राम सभा के नाम दर्ज ये तालाब गायब होता चला गया। आसपास भवनों का निर्माण हो गया। अब तालाब दस प्रतिशत ही बचा है, लेकिन प्रशासन को चिंता नहीं है।
बस्ती का निर्माण हो गया
देवी रोड पर पुरंग अस्पताल के पीछे तालाब था। कभी आसपास के क्षेत्र का पूरा पानी इसी में जाता था। धीरे-धीरे ये तालाब बंद कर दिया गया और इसके साथ ही बस्ती का निर्माण भी हो गया। लेकिन जिम्मेदारों ने आज तक इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
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मिटा तालाब की ‘हस्ती’, बसाई धड़ल्ले से बस्ती
-शहर में कई तालाबों का समाप्त हो चुका है अस्तित्व
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। धरती की प्यास बुझाने वाले शहर के तालाबों की हस्ती (अस्तित्व) ही मिटा दी गई। बिना किसी डर के धड़ल्ले से बस्ती बसा दी गईं और प्रशासन आंखें मूंदे रहा। शहर में धीरे-धीरे कई तालाब मिटते गए और बस्तियां बसती गईं। जल्द ठोस कदम न उठाए तो बाकी बचे तालाबों का भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
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जल संरक्षण में तालाबों की भूमिका अहम है। बारिश के जल को एकत्रित कर यह भूगर्भ जल स्तर को सुधारते हैं। इनकी महत्ता को दरकिनार कर शहरीकरण किया गया। कॉलोनी काटने वालों ने बेखौफ होकर तालाबों को बंद कर दिया। शहर का शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला होगा जहां तालाबों को पाटकर बंद न किया गया।
राजीव गांधी नगर, खरगजीत नगर, देवपुरा, भरतवाल सभी जगह तालाबों पर बस्तियां बसा दी गईं। जहां कभी तालाबों में पानी हिलारों मारता था आज वहां कंकरीट के मकान खड़े हैं। अधिकांश तालाब सरकारी भूमि पर ही थे। कुछ निजी भूमि पर थे, वह भी बंद कर दिए गए। नतीजा शहरी क्षेत्र में भूगर्भ जल का स्तर लगातार गिर रहा है।
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लोगों की बात
तालाबों के संरक्षण के लिए प्रशासन द्वारा पहल की जानी चाहिए। जो पुराने हैं उनका चिह्नांकन कर कब्जे से मुक्त कराना चाहिए। तालाबों को पुनर्जीवत करके ही भूगर्भ जल का स्तर सुधारा जा सकता है।
-दीपक कुमार।
ग्रामीण अंचल में तालाबों की हर साल खोदाई मनरेगा से कराई जाती है। शहरी क्षेत्र में काम न होने के चलते धीरे-धीरे लोग तालाबों पर कब्जा कर लेते हैं। अभियान चलाकर तालाबों की खोदाई होनी चाहिए।
-संजीव कुमार।
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वर्जन
राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों को कब्जामुक्त कराया जाएगा। उप जिलाधिकारी (सदर) और नगर पालिका को निर्देशित किया जाएगा। अगर कोई तालाब की भूमि पर कब्जा करता है तो उसके विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी।
-रामजी मिश्र, अपर जिलाधिकारी।
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दस प्रतिशत हिस्सा ही बचा
शहर के स्टेशन रोड पर पुरुषोत्तम कलेक्शन के पीछे बड़ा तालाब था। समय के साथ ग्राम सभा के नाम दर्ज ये तालाब गायब होता चला गया। आसपास भवनों का निर्माण हो गया। अब तालाब दस प्रतिशत ही बचा है, लेकिन प्रशासन को चिंता नहीं है।
बस्ती का निर्माण हो गया
देवी रोड पर पुरंग अस्पताल के पीछे तालाब था। कभी आसपास के क्षेत्र का पूरा पानी इसी में जाता था। धीरे-धीरे ये तालाब बंद कर दिया गया और इसके साथ ही बस्ती का निर्माण भी हो गया। लेकिन जिम्मेदारों ने आज तक इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
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मिटा तालाब की ‘हस्ती’, बसाई धड़ल्ले से बस्ती
-शहर में कई तालाबों का समाप्त हो चुका है अस्तित्व
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। धरती की प्यास बुझाने वाले शहर के तालाबों की हस्ती (अस्तित्व) ही मिटा दी गई। बिना किसी डर के धड़ल्ले से बस्ती बसा दी गईं और प्रशासन आंखें मूंदे रहा। शहर में धीरे-धीरे कई तालाब मिटते गए और बस्तियां बसती गईं। जल्द ठोस कदम न उठाए तो बाकी बचे तालाबों का भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
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जल संरक्षण में तालाबों की भूमिका अहम है। बारिश के जल को एकत्रित कर यह भूगर्भ जल स्तर को सुधारते हैं। इनकी महत्ता को दरकिनार कर शहरीकरण किया गया। कॉलोनी काटने वालों ने बेखौफ होकर तालाबों को बंद कर दिया। शहर का शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला होगा जहां तालाबों को पाटकर बंद न किया गया।
राजीव गांधी नगर, खरगजीत नगर, देवपुरा, भरतवाल सभी जगह तालाबों पर बस्तियां बसा दी गईं। जहां कभी तालाबों में पानी हिलारों मारता था आज वहां कंकरीट के मकान खड़े हैं। अधिकांश तालाब सरकारी भूमि पर ही थे। कुछ निजी भूमि पर थे, वह भी बंद कर दिए गए। नतीजा शहरी क्षेत्र में भूगर्भ जल का स्तर लगातार गिर रहा है।
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लोगों की बात
तालाबों के संरक्षण के लिए प्रशासन द्वारा पहल की जानी चाहिए। जो पुराने हैं उनका चिह्नांकन कर कब्जे से मुक्त कराना चाहिए। तालाबों को पुनर्जीवत करके ही भूगर्भ जल का स्तर सुधारा जा सकता है।
-दीपक कुमार।
ग्रामीण अंचल में तालाबों की हर साल खोदाई मनरेगा से कराई जाती है। शहरी क्षेत्र में काम न होने के चलते धीरे-धीरे लोग तालाबों पर कब्जा कर लेते हैं। अभियान चलाकर तालाबों की खोदाई होनी चाहिए।
-संजीव कुमार।
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वर्जन
राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों को कब्जामुक्त कराया जाएगा। उप जिलाधिकारी (सदर) और नगर पालिका को निर्देशित किया जाएगा। अगर कोई तालाब की भूमि पर कब्जा करता है तो उसके विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी।
-रामजी मिश्र, अपर जिलाधिकारी।