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सिर्फ बजट से नहीं होगा शिक्षा में सुधार: भागवत

Sun, 21 Aug 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sun, 21 Aug 2016 01:10 AM IST
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The budget will not only Education reform: Bhagwat
माोहन भ्‍ाागवत - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
छात्रों का विश्वास किसी व्यवस्था पर नहीं बल्कि शिक्षक पर होता है। उन्हें लक्ष्य और दिशा देकर न सिर्फ तरक्की की राह दिखाई जा सकती है बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण से भी जोड़ा जा सकता है। प्राइवेट शिक्षा सस्ती और सरकारी शिक्षा उत्तम होनी चाहिए। ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहीं। आगरा कालेज खेल मैदान पर आयोजित विश्वविद्यालयीय एवं महाविद्यालयीय शिक्षक सम्मेलन में शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का सुधार सिर्फ बजट से नहीं हो सकता।
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संघ प्रमुख के उद्बोधन से पहले शनिवार को शिक्षकों ने उनके समक्ष अपनी जिज्ञासा रखीं। इन्हीं के उत्तर के बीच सरसंघचालक ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालयों में पहले शिक्षकों ने आना कम किया, इसके बाद छात्रों ने। ऐसे में बजट बढ़ाने या व्यवस्था परिवर्तन से शिक्षा में सुधार नहीं होने वाला। शिक्षकों को खुद बदलने की जरूरत है। विषय ज्ञान के साथ छात्रों को संस्कारिक ज्ञान देना होगा। व्यक्ति तैयार करने से व्यवस्था खुद ही बदल जाएगी। शिक्षा पद्धति से जुड़े एक सवाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन ने ‘काले अंग्रेज’ तैयार करने के लिए मैकाले शिक्षा लागू की थी। मगर, तत्कालीन शिक्षकों ने अपनी लगन और निष्ठा से इसी शिक्षा प्रणाली के जरिये कई महान लोग तैयार किए। कुछ पुराने वृत्तों पर प्रकाश डालते हुए संघ प्रमुख ने शिक्षकों से छात्रों के साथ पुत्रवत व्यवहार करने की नसीहत दी। साथ ही कहा कि शिक्षकों का चिंतन सिर्फ छात्रों को बेहतर शिक्षा कैसे मिले, इस पर होना चाहिए। उन्हें अन्य किसी प्रकार की चिंता नहीं करनी चाहिए। उनका मान-सम्मान तभी बढ़ेगा। यह गुरुमंत्र उन्होंने कई शिक्षकों द्वारा स्ववित्तपोषित विद्यालयों में वेतन विसंगतियों के सवाल पर दिया।
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सरसंघचालक ने शिक्षकों से कहा कि शिक्षा में परिवर्तन चाहिए तो अंग्रेजी की जितनी जरूरत है, छात्रों को उतनी सिखाओ। मगर, वर्तमान में छात्र ही नहीं उनके माता-पिता भी डिग्री और परसेंट चाहते हैं। वर्तमान शिक्षा पद्धति के साथ-साथ अभिभावक भी इसी पर जोर दे रहे हैं। भागवत ने शिक्षकों को शिक्षा के टिप्स देते हुए कहा कि वह छात्रों को परसेंट बढ़ाने के गुर सिखाएं लेकिन इनके अलावा नैतिक मूल्यपरक शिक्षा भी दें। उन्होंने कहा कि सभी को शिक्षा मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए प्राइवेट शिक्षा सस्ती और सरकारी शिक्षा उत्तम होनी चाहिए।
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