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वतन पर कुर्बान हुए शहीद के परिवार को जमीन के एक टुकड़ने के लिए सिस्टम से लड़नी पड़ी 'जंग'

Thu, 17 May 2018 10:46 AM IST
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला आगरा
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला आगरा Updated Thu, 17 May 2018 10:46 AM IST
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the administration was not giving the land to the funeral of the martyr
श्ाहीद जवान देवेंद्र सिंह का श्ाव रख्ाकर प्रदर्शन करते लोग - फोटो : अमर उजाला
इससे अफसोनाक और क्या हो सकता है कि सीमा पर शहीद हुए देवेंद्र सिंह बघेल के परिवार को जमीन के एक टुकड़े के लिए सिस्टम से जंग लड़नी पड़ी। वे जमीन अपने लिए नहीं, शहीद का स्मारक बनाने के लिए मांग रहे थे। 
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क्या अधिकारी और क्या नेता, किसी ने भी इस मामले में उतनी संवेदनशीलता नहीं दिखाई जितनी जरूरी थी। देवेंद्र सिंह बघेल के शहीद होने की खबर मंगलवार दोपहर को आ गई थी। 
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पुलिस को भी पता चल गया था और प्रशासन को भी। नेताओं तक भी जानकारी पहुंच गई थी लेकिन किसी ने शहीद के परिवार से नहीं पूछा कि वे कहां अंत्येष्टि करना चाहते हैं? स्मारक कहां पर बनेगा?
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the administration was not giving the land to the funeral of the martyr
श्ाहीद की पत्नी व बच्चेे - फोटो : अमर उजाला
शहीद के पार्थिव शरीर को जब अंत्येष्टि के लिए ले जाया जाने लगा, तब प्रशासन के अधिकारियों ने शर्त रख दी, अगर ग्राम समाज की जमीन पर अंत्येष्टि की तो स्मारक प्रशासन बनवाएगा। 

सौंदर्यीकरण भी करेगा लेकिन अगर एडीए की जमीन पर की, तो कुछ भी हो पाना मुमकिन नहीं होगा। इसी से मामला बिगड़ा। शहीद के भाई देवी सिंह ने कहा, मुझे अब प्रशासन पर भरोसा नहीं रहा। 

अब जरूरत थी खुद को जनता का नुमाइंदा बताने वाले नेताओं की, जो उन लोगों का भरोसा जीत सकते थे, लेकिन उनमें से कोई नहीं था। न सांसद और न ही विधायक। भाजपा से प्रशांत पौनिया बात कर रहे थे लेकिन उन पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था।

जब प्रशासन के अधिकारी जमीन के लिए लिखित में देने के लिए तैयार नहीं थे और नेता भी भरोसा नहीं दे पा रहे थे, तब दुखी होकर शहीद के भाइयों ने बीएसएफ के अधिकारियों को बुलाया। 

उनसे कहा कि शहीद का पार्थिव शरीर ले जाइए और बीएसएफ मुख्यालय में अंत्येष्टि कर लीजिए। यहां प्रशासन जमीन देने के लिए तैयार नहीं है।

शहीद का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा सुबह आठ बजे, विधायक हेमलता दिवाकर पहुंची 11:40 बजे। फिर मंत्री एसपी सिंह बघेल को लोग बुलाते रहे, अधिकारियों ने भी फोन किए, वह शाम को साढ़े पांच बजे पहुंचे। वहीं सांसद चौधरी बाबूलाल के न आने पर लोग नाराज हुए, नारेबाजी की, इसके बावजूद वह नहीं पहुंचे।
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