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Agra News: लाइब्रेरी में दीमक का खतरा, निर्माण में समन्वय नदारद
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साइंस पार्क की निर्माण सामग्री का जार टेस्ट कराते डीएम मनीष बंसल स्त्रोत सू वि
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आगरा। करोड़ों रुपये की लागत से पालीवाल पार्क में चल रहे टाउन हॉल पुस्तकालय और गार्डन ऑफ नॉलेज के सौंदर्यीकरण में लापरवाही सामने आई है। रविवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल के निरीक्षण में प्रोजेक्ट में कई खामियां उजागर हुईं। लाइब्रेरी में दीमक से बचाव के इंतजाम नहीं थे। निर्माण में अन्य विभागों से समन्वय भी नदारद था।
जिलाधिकारी ने नगर निगम व अन्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए निर्माण की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए हैं। सबसे बड़ी चूक पुस्तकालय के जीर्णोद्धार में दिखी। शहर के इतिहास और किताबों को सहेजने के लिए बन रही इस डिजिटल लाइब्रेरी में दीमक से बचाव (ट्रीटमेंट) की ही कोई पुख्ता व्यवस्था प्लान में नहीं थी। जिलाधिकारी ने जब ले-आउट परखा, तो फर्श में लगने वाली टाइल्स की गुणवत्ता और सिटिंग अरेंजमेंट में भी कमियां सामने आ गईं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को तत्काल उच्च गुणवत्ता की सामग्री लगाने और दीमक ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने की चेतावनी दी।
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लेटलतीफी का साइंस पार्क, बिना जमीन और अतिक्रमण हटाए शुरू किया काम
आगरा। पंचकुइया के पास लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से 11,149 वर्ग मीटर में बन रहा बहुप्रतीक्षित साइंस पार्क लेटलतीफी और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ता दिख रहा है। बिना पर्याप्त जमीन और अतिक्रमण हटाए ही कार्यदायी संस्था ने निर्माण शुरू कर दिया। रविवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का औचक निरीक्षण किया, तो सुस्त चाल पर सख्त नाराजगी जताई और खुद मौके पर मसाले सीमेंट-बालू की गुणवत्ता परखी।
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मार्च 2027 की डेडलाइन वाले इस प्रोजेक्ट में अब तक एग्जीबिशन हॉल का मात्र 55 और गार्ड रूम का महज 10 प्रतिशत काम ही हो सका है। वर्तमान में ब्लॉक-ए में केवल प्लिंथ बीम तक काम पहुंचा है। जिलाधिकारी के जवाब-तलब करने पर कार्यदायी संस्था ने बताया कि शुरुआत में आवंटित जमीन अपर्याप्त थी। बाद में जो जमीन मिली, वहां अतिक्रमण और जर्जर भवन होने के कारण काम समय से सुचारू नहीं हो सका। निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह होने पर जिलाधिकारी ने मजदूरों से पूछताछ की और अपने सामने जार टेस्ट कराकर सीमेंट, बालू व सिल्ट का अनुपात जांचा।
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जिलाधिकारी ने नगर निगम व अन्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए निर्माण की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए हैं। सबसे बड़ी चूक पुस्तकालय के जीर्णोद्धार में दिखी। शहर के इतिहास और किताबों को सहेजने के लिए बन रही इस डिजिटल लाइब्रेरी में दीमक से बचाव (ट्रीटमेंट) की ही कोई पुख्ता व्यवस्था प्लान में नहीं थी। जिलाधिकारी ने जब ले-आउट परखा, तो फर्श में लगने वाली टाइल्स की गुणवत्ता और सिटिंग अरेंजमेंट में भी कमियां सामने आ गईं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को तत्काल उच्च गुणवत्ता की सामग्री लगाने और दीमक ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने की चेतावनी दी।
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लेटलतीफी का साइंस पार्क, बिना जमीन और अतिक्रमण हटाए शुरू किया काम
आगरा। पंचकुइया के पास लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से 11,149 वर्ग मीटर में बन रहा बहुप्रतीक्षित साइंस पार्क लेटलतीफी और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ता दिख रहा है। बिना पर्याप्त जमीन और अतिक्रमण हटाए ही कार्यदायी संस्था ने निर्माण शुरू कर दिया। रविवार को जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का औचक निरीक्षण किया, तो सुस्त चाल पर सख्त नाराजगी जताई और खुद मौके पर मसाले सीमेंट-बालू की गुणवत्ता परखी।
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मार्च 2027 की डेडलाइन वाले इस प्रोजेक्ट में अब तक एग्जीबिशन हॉल का मात्र 55 और गार्ड रूम का महज 10 प्रतिशत काम ही हो सका है। वर्तमान में ब्लॉक-ए में केवल प्लिंथ बीम तक काम पहुंचा है। जिलाधिकारी के जवाब-तलब करने पर कार्यदायी संस्था ने बताया कि शुरुआत में आवंटित जमीन अपर्याप्त थी। बाद में जो जमीन मिली, वहां अतिक्रमण और जर्जर भवन होने के कारण काम समय से सुचारू नहीं हो सका। निर्माण की गुणवत्ता पर संदेह होने पर जिलाधिकारी ने मजदूरों से पूछताछ की और अपने सामने जार टेस्ट कराकर सीमेंट, बालू व सिल्ट का अनुपात जांचा।