आगरा: 31 अक्तूबर तक हाउस टैक्स जमा करने पर मिलेगी 10 फीसदी की छूट, एक माह का समय बढ़ा
नगर निगम सदन के विशेष अधिवेशन में पार्षदों के प्रस्ताव पर हाउस टैक्स में 10 फीसदी छूट को एक माह तक और बढ़ा दिया गया है। मेयर ने उम्मीद जताई है कि लखनऊ की तरह हमें भी इस छूट का फायदा मिलेगा।
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आगरा में 31 अक्तूबर तक हाउस टैक्स (गृह कर) जमा करेंगे तो 10 फीसदी की छूट मिलेगी। पूर्व में 30 सितंबर तक जारी इस छूट को नगर निगम सदन के विशेष अधिवेशन में एक माह के लिए आगे बढ़ा दिया गया। आवासीय संपत्तियों पर बकाया पुराने टैक्स को जमा कराने पर ब्याज में छूट और एकमुश्त समाधान योजना लाने के पार्षदों के प्रस्ताव को मंजूर कर शासन भेज दिया गया है। इससे लखनऊ की तर्ज पर एकमुश्त समाधान योजना और ब्याज में छूट मिल पाएगी।
नगर निगम सदन के गुरुवार को हुए 16वें अधिवेशन में गृहकर में 10 फीसदी छूट को 31 अक्तूबर तक बढ़ाने का प्रस्ताव पार्षद जगदीश पचौरी ने पेश किया। इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। नगर निगम ने लखनऊ नगर निगम की तर्ज पर एकमुश्त समाधान योजना को केवल आवासीय संपत्तियों के लिए पेश किया है।
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कॉमर्शियल संपत्तियों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। इस प्रस्ताव से 2.80 लाख घरों को फायदा पहुंच सकता है। नगर निगम सीमा में 3.50 लाख से ज्यादा संपत्तियां हैं लेकिन गृहकर केवल 72 हजार ही दे रहे हैं। सदन ने इस प्रस्ताव को पारित कर शासन भेजने की संस्तुति की है।
उम्मीद है हमें भी छूट का फायदा मिलेगा
मेयर नवीन जैन ने कहा कि कोरोना और डेंगू के कारण लोगों के सामने परेशानी रही है, इसलिए हाउस टैक्स जमा करने पर 10 फीसदी की छूट को एक महीने के लिए बढ़ा रहे हैं। सदन ने आवासीय संपत्तियों पर पुराने टैक्स का बकाया जमा करने पर ब्याज में छूट का प्रस्ताव पारित कर शासन भेजा है। उम्मीद है लखनऊ की तरह हमें भी इस छूट का फायदा मिलेगा।
100 करोड़ का लक्ष्य मिला 17 करोड़
नगर निगम सदन ने 100 करोड़ रुपये गृहकर वसूलने का लक्ष्य दिया है, लेकिन अब तक पूरे 6 माह में अफसर 17 करोड़ रुपये ही वसूल सके हैं। 17 फीसदी टैक्स वसूलने पर मेयर ने अधिकारियों से कहा कि वह पार्षदों के संपर्क में रहें और कैंप लगाएं। नगर निगम के विकास कार्य इसी वजह से रुके पड़े हैं।
भाजपा-बसपा पार्षदों ने किया हंगामा
बसपा पार्षद मनोज कुमार की ओर से मेयर पर टिप्पणी करने पर भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच तकरार शुरू हो गई। इस पर काफी देर तक हंगामा होता रहा। सदन में चार बार हंगामे की स्थिति बनी, जिसमें पार्षद फौरन सिंह ने अन्य पार्षदों को भी कटघरे में खड़ा किया।