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Agra News: कुश्ती के दाव पेच की 13 साल बाद भी नहीं पूरी हो सकी तमन्ना
Sat, 08 Apr 2023 11:27 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sat, 08 Apr 2023 11:27 PM IST
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मैनपुरी। पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में एक करोड़ की लागत से स्थापित किए गए कुश्ती हॉल को 13 साल बाद भी प्रशिक्षक नहीं मिल सका है। खेल को बढ़ावा देने के लिए शासन और खेल निदेशालय काम कर रहा है। भवन निर्माण के बाद प्रशिक्षकों की तैनाती पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रशिक्षकों के अभाव में करोड़ों की लागत से बना भवन धूल फांकता नजर आ रहा है।
वर्ष 2010 में नगर के पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में एक करोड़ की लागत से कुश्ती हॉल का निर्माण कार्य कराया गया था। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस कुश्ती हॉल के बनने पर जनपद के पहलवानों ने खुशी जाहिर की थी। लेकिन बीते 13 सालों में इस कुश्ती हॉल के लिए शासन और खेल विभाग का कोई प्रशिक्षक नहीं मिला। जिससे यह कुश्ती हॉल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां न तो शासन और न ही खेल निदेशालय कोच की व्यवस्था कर सका। नतीजा यह है कि अब कुश्ती हॉल को बंद कर दिया गया है। यहां ताला लटका हुआ है। कुश्ती के शौकीन यहां आते हैं लेकिन कोच न होने के कारण निराश ही लौट जाते हैं।
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कोच के बिना सफलता पाना असंभव
नेशनल स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले कुसमरा क्षेत्र के गांव परशुरामपुर निवासी पहलवान धर्मराज का कहना है कि जिले में पहलवानों की कमी नहीं है। लेकिन बिना कोच के उनकी प्रतिभा का निखार कैसे हो सके। धर्मराज का कहना है कि उन्हें नेशनल तक खेलने का मौका मिला लेकिन कोच की कमी खली। यदि कोच से बेहतर प्रशिक्षण मिला होता तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुंचना कठिन नहीं था।
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कुश्ती के कोच के लिए कई बार निदेशालय का पत्र भेजा गया। लेकिन तैनाती को लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया। एकबार फिर से पत्र लिखा जा रहा है। वैसे जनपद में कुश्ती के शौकीन लोग बहुत हैं यदि कोच मिले तो निश्चित ही प्रदेश और राष्ट्र स्तर की प्रतिभाएं निकलकर आएंगीं।
सुनील कुमार, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी
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वर्ष 2010 में नगर के पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में एक करोड़ की लागत से कुश्ती हॉल का निर्माण कार्य कराया गया था। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस कुश्ती हॉल के बनने पर जनपद के पहलवानों ने खुशी जाहिर की थी। लेकिन बीते 13 सालों में इस कुश्ती हॉल के लिए शासन और खेल विभाग का कोई प्रशिक्षक नहीं मिला। जिससे यह कुश्ती हॉल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां न तो शासन और न ही खेल निदेशालय कोच की व्यवस्था कर सका। नतीजा यह है कि अब कुश्ती हॉल को बंद कर दिया गया है। यहां ताला लटका हुआ है। कुश्ती के शौकीन यहां आते हैं लेकिन कोच न होने के कारण निराश ही लौट जाते हैं।
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कोच के बिना सफलता पाना असंभव
नेशनल स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले कुसमरा क्षेत्र के गांव परशुरामपुर निवासी पहलवान धर्मराज का कहना है कि जिले में पहलवानों की कमी नहीं है। लेकिन बिना कोच के उनकी प्रतिभा का निखार कैसे हो सके। धर्मराज का कहना है कि उन्हें नेशनल तक खेलने का मौका मिला लेकिन कोच की कमी खली। यदि कोच से बेहतर प्रशिक्षण मिला होता तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुंचना कठिन नहीं था।
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कुश्ती के कोच के लिए कई बार निदेशालय का पत्र भेजा गया। लेकिन तैनाती को लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया। एकबार फिर से पत्र लिखा जा रहा है। वैसे जनपद में कुश्ती के शौकीन लोग बहुत हैं यदि कोच मिले तो निश्चित ही प्रदेश और राष्ट्र स्तर की प्रतिभाएं निकलकर आएंगीं।
सुनील कुमार, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी