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Taj Mahotsav 2026 : कल्लू भाई की कालीनें बुन रहीं कला प्रेमियों के दिलों में जगह...मिर्जापुर की कालीनों का जलवा, मंत्रमुग्ध कर देने वाले ये कालीन, बारीक नक्काशी और रंगों से सजे...

Mon, 23 Feb 2026 08:53 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 08:53 AM IST
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Taj Mahotsav 2026: Kallu Bhai's carpets are making a place in the hearts of art lovers... The charm of Mirzapur's carpets, these mesmerizing carpets, decorated with intricate carvings and colors...
आगरा : ताज महोत्सव में कल्लू भाई की कालीन
आगरा। ताजनगरी में आयोजित हो रहे ताज महोत्सव में देशभर की कला और संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है। इस वर्ष महोत्सव का मुख्य आकर्षण मिर्जापुर से आए अनुभवी बुनकर कल्लू भाई की रंग-बिरंगी और आकर्षक कालीनें बनी हुई हैं। उनकी दुकान पर पर्यटकों और कला प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। हस्तशिल्प का बेजोड़ नमूना मिर्जापुर अपनी सदियों पुरानी कालीन बुनाई की कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। कल्लू भाई उर्फ नियाज अली द्वारा प्रदर्शित की गई इन कालीनों में सूती और रेशमी धागों का ऐसा संगम है कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। इन कालीनों पर की गई बारीक नक्काशी और रंगों का चयन मुगलकालीन कला की याद दिलाता है।
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कल्लू भाई बताते हैं एक मध्यम आकार की कालीन को तैयार करने में 5 से 10 दिन लगते हैं। दो कारीगरों की कड़ी मेहनत से पुरानी लेडीज साड़ी, जींस को कातकर उसमें सुतरी मिक्स की जाती है। ताना बनाने में एक दिन का समय लगता है। फिर धागे बनाने के साथ हाथ से कालीन की बुनाई शुरू होती है। इसमें धैर्य की आवश्यकता होती है। पारंपरिक ईरानी और पारसी डिजाइनदार ज्यादातर कालीनों में प्राकृतिक और पक्के रंगों का उपयोग किया जाता है, जो लंबे समय तक अपनी चमक बनाए रखते हैं। हाथ से बनी कालीनें अधिक मजबूत और टिकाऊ होती हैं।
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हाथ से बनी कालीन की मांग बनाए रखना चुनौती

कल्लू भाई जैसे स्थानीय कारीगरों के लिए ताज महोत्सव जैसे मंच एक नई उम्मीद लेकर आते हैं। उन्होंने बताया कि मशीन से बनी कालीनों के बढ़ते चलन के बीच हाथ से बनी कालीनों की मांग को बनाए रखना एक चुनौती है। वो बताते हैं, जहां मशीन से 2 दिन में 200 कालीन तैयार होते हैं। वहीं, हाथ से एक से दो हफ्ते में एक कालीन तैयार होती है। मशीन से बने कालीन सस्ते होते हैं, जिनकी कीमत 1000-5000 रुपये के बीच होती है। हाथ से बनी कालीन 5000 से शुरू होती है, जो साइज व आकार के साथ बढ़ती जाती है। रंगों और उस पर उकेरी गई तस्वीरों पर भी कालीन की कीमत तय होती है।
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आप भी बनवाएं तस्वीर वाली कालीन

अमरौती, विंध्याचल के रहने वाले कल्लू भाई ने बताया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भी हाथ से बुनी कालीन भेंट की गई थी, जिस पर मोदी जी की तस्वीर उकेरी गई थी, जिसे उनके ही गांव के कारीगरों ने तैयार की थी। उन्होंने बताया, कालीन पर आप स्वयं की तस्वीर भी उकेरवा सकते हैं। दिहाड़ी की बात करें तो कालीन की साइज और बिनाई पर दिहाड़ी तय होती है। 5×7 की कालीन पर दो कारीगरों को 1000-2000 रुपये मिल जाते हैं। वैसे 500 रुपये एक दिन की दिहाड़ी है। महोत्सव में आए आगंतुक न केवल इन कालीनों की खूबसूरती की सराहना कर रहे हैं, बल्कि इन्हें यादगार के रूप में अपने घरों के लिए खरीद भी रहे हैं। कल्लू भाई की ये कालीनें न केवल फर्श की शोभा बढ़ा रही हैं, बल्कि मिर्जापुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संदेश भी दूर-दूर तक पहुंचा रही हैं। रिपोर्ट : सचिन
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