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मिलावट का जहर: सिंथेटिक दूध से युवाओं को भी हो रही लिवर-किडनी की बीमारी

Sun, 28 Feb 2021 10:58 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 28 Feb 2021 10:58 AM IST
सार

सिंथेटिक दूध बेचने वाले आगरा की सेहत को बर्बाद कर रहे हैं। अनजाने में सिंथेटिक दूध पीने से युवाओं को भी किडनी-लिवर की परेशानी हो रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना दो से तीन ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिनको मिलावटी सामग्री के इस्तेमाल से मर्ज पनपा है। 
 

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Synthetic Milk Give Disease liver-kidney To Youngsters
दूध - फोटो : pixabay

विस्तार

एसएन मेडिकल कॉलेज के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि किडनी-लिवर को सबसे ज्यादा सिंथेटिक दूध नुकसान पहुंचा रहा है। सिंथेटिक दूध में यूरिया, डाई, डिटर्जेंट समेत अन्य खतरनाक रसायन होते हैं, जिनके लंबे समय तक उपयोग से किडनी फेलियर और लिवर की कार्य करने की क्षमता कम होने लगती है।
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ओपीडी में ऐसे दो-तीन मरीज रोज मिलते हैं, इसमें 35 से 40 साल के भी मरीज रहते हैं। एसएन के फिजीशियन डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि सिंथेटिक दूध में दूषित पानी के इस्तेमाल से पीलिया और डायरिया भी मिल रहा है। पेट में अल्सर भी हो जाते हैं। घनी आबादी वाले क्षेत्रों के अधिक मरीज मिलते हैं।
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गडबड़झाले का गणित, पांच गुना तक कर रहे कमाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय पांडे ने बताया कि सिंथेटिक दूध बनाने वाले इसमें डिटर्जेंट, मिल्क पाउडर, यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। छह से आठ रुपये में एक लीटर तक सिंथेटिक दूध तैयार कर लिया जाता है। इसे असली दूध में मिलाकर 35 से 40 रुपये किलो के भाव में बेचते हैं। घनी आबादी में इसकी सप्लाई ज्यादा होती है। सस्ता दूध मिलने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर तबके लोग इसे अधिक खरीदते थे। 
 

10 लाख लीटर की जरूरत, आठ लाख की है आपूर्ति
उप दुग्ध विकास अधिकारी अखिलेंद्र मिश्रा ने बताया कि जिले में करीब 10 लाख लीटर दूध की जरूरत होती है। इसमें से करीब आठ लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति हो रही है। आशंका है कि बाकी की पूर्ति के लिए दूध में पानी या सिंथेटिक से इसकी पूर्ति हो रही है।

पहचान ऐसे करें, मीठे के बाद कसैला लगता है सिंथेटिक दूध
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवधेश पाराशर ने बताया कि सिंथेटिक दूध की खुद भी जांच कर सकते हैं। इसमें दूध का घूंट भरकर उसे कुल्ला कर दें। सिंथेटिक दूध शुरू में मीठा लेकिन कुछ देर बाद इसका स्वाद कसैला लगेगा। वैसे लैब में भी जांच करा सकते हैं।

166 में दूध के 73 नमूने फेल
बीते साल दूध के 166 नमूनों की रिपोर्ट एफएसडीए को मिली, जिसमें से 73 फेल मिले। इसमें से दो नमूनों में सिंथेटिक दूध मिला। बाकी के 71 नमूनों में दूध में पानी मिला। सभी पर मुकदमा दर्ज कराया गया है।

भैंस का दूध महंगा, सिंथेटिक की लागत कम
खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय पांडे ने बताया कि रिफाइंड, मिल्क पाउडर के अलावा अन्य केमिकल का प्रयोग कर सिंथेटिक दूध पर 8 रुपये प्रति लीटर की लागत आती है, जिसे 40 रुपये प्रति लीटर पर बेचा जा रहा है। जबकि भैंस पालने पर उसके दूध की लागत 50 रुपये प्रति लीटर तक आ रही है। बाजार में यह 65 रुपये तक बिक पाता है। भारी मुनाफे के  लालच में इसे बस्तियों और कमजोर वर्ग के लोगों के बीच ज्यादा बेचा जा रहा था।

बीमार हो रहे, कड़ी सजा मिले
दूध बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पीते हैं। जब यह सिंथेटिक है तो शरीर को कैसे फायदा पहुंचाएगा। इससे तो बीमारियां होने का और खतरा है। -गीता सारस्वत, खंदारी

नमूनों की नियमित जांच कराएं
पैसा देकर दूध खरीदते हैं, अगर कोई इसमें सिंथेटिक दूध मिलाकर बेच रहा है तो पाप कर रहा है। हर दूधिया से नियमित नमूना लेकर जांच करानी चाहिए। -ऊषा सिंह, हीराबाग

दोषियों पर कोई रहम न करें
दूध हर घर में और रोजाना उपयोग हो रहा है। दूध के नाम पर जहर बेचने वालों से कोई रहम न बरतकर इन पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।  -शशि सिंह, आवास विकास कॉलोनी

हमारा व्यवसाय प्रभावित हुआ
सिंथेटिक दूध बनाने और बेचने वालों पर विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, इससे डेयरी व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। -दिनेश गुप्ता, डेयरी संचालक

अभियान चलाकर कार्रवाई हो
सिंथेटिक दूध बनाने वालों को पकड़ने के लिए अभियान चलाना चाहिए। इससे हर दूध विक्रेता को शक की नजर से ग्राहक देखते हैं। -चेतन बाबू, डेयरी संचालक

तंत्रिका तंत्र और याददाश्त होने लगती है कमजोर: डॉ. माहेश्वरी
एसएन के वरिष्ठ न्यूरो फिजीशियन डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि यूरिया, डिटर्जेंट शरीर में पहुंचकर नसों को नुकसान पहुंचाते हैं, इससे तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने लगता है। सिर दर्द, थकान, हाथों के कांपने की शिकायत हो सकती है। याददाश्त भी कमजोर हो सकती है।
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