फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Suryopasna prestó festival de Chhath desde el viernes

सूर्योपासना का पर्व छठ व्रत शुक्रवार से 

Tue, 01 Nov 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 01 Nov 2016 11:39 PM IST
विज्ञापन
Suryopasna prestó festival de Chhath desde el viernes
- फोटो : अमर उजाला
संतान प्राप्ति, पति की दीर्घायु और मनोकामना पूर्ति के लिए सूर्योपासना का पर्व रविषष्ठी (छठ) व्रत कार्तिक मास शुक्ल पक्ष तिथि चतुर्थी (शुक्रवार) से प्रारंभ हो रहा है। सप्तमी (सोमवार) को अरुणोदयकाल में अर्घ्यदान दे व्रत का पारन होगा। पूर्वांचल समाज में व्रत की तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं।
विज्ञापन

पंडित वाईके शर्मा के मुताबिक, सूर्य षष्ठ व्रत सुहागिन नारियां और पुरुष करते हैं। इस व्रत में पंचमी से सप्तमी तक तीन दिन का उपवास होता है। पंचमी के दिन केवल एक बार शाम को चंद्रास्त से पहले नमक रहित खीर भोजन किया जाता है। षष्ठी को पूरे दिन जल भी नहीं पिया जाता है। शाम के समय अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर फल, पकवान और पुष्प आदि भागवान भास्कर को अर्पित किए जाते हैं। निराहार रहकर रात्रि भर जागरण किया जाता है और दूसरे दिन सूर्योदय के पूर्व ही नदी या सरोवर में स्नान करके और उदित होते हुए सूर्य की पूजा करकेे एवं अर्घ्य देने के बाद ही मुंह में जल डाला जाता है।
विज्ञापन

ट्रांसयमुना कालोनी में महिलाओं ने व्रत की तैयारियों के तहत प्रसाद बनाने के लिए गेंहू और जौ का आटा पीसा। इस अवसर पर जानकी देवी, रीना सिंह, इंदू सिंह, कृष्णा दुबे, नीलम शर्मा, अंजनी, प्रियंका, निधि, माया, विंध्या, अनीता आदि मौजूद रहीं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


सूर्य षष्ठी व्रत का प्रसाद
पूर्वांचल सांस्कृतिक सेवा समिति के अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह के मुताबिक, इस व्रत का मुख्य प्रसाद ठेकुआ (जो, गेहूं का आटा, गुड़ और देशी घी से बनता है) होता है जो मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर पकाया जाता है। ऋतु फल में नारियल, केला, पपीता, सेब, अनार, कंद, सुथनी, गागल, ईख, सिंघाड़ा, शरीफा, कंदा, संतरा, अन्नास, नींबू, पत्तेदार हल्दी, पत्तेदार अदरक, कोहड़ा, बोरो, मूली, अल्ता के पत्ते, पान, सुपारी, मेवा आदि का सामर्थ के अनुसार गाय के दूध के साथ अर्घ्य दिया जाता है। यह दान बांस के दऊरा, कलसुप नहीं मिलने पर पीतल कठवत या देश काल परिस्थिति के अनुसार किसी पात्र में दिया जा सकता है। 


सूर्य षष्ठी व्रत का महात्म्य
छठ व्रत करने के लिए यूं तो कई परंपराएं हैं लेकिन माना जाता है कि भगवान राम ने त्रेता युग में रावण पर विजय पाने को लिए सूर्य देव की उपासना की थी। वनवास के दौरान ऋषि धौम्य ने युधिष्ठिर को इस व्रत को करने का उपाय दिया था। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब ने कुष्ठ रोग से निजात पाने को इस व्रत को किया था। ऐसी कथाएं हैं जिनमें इस व्रत को करने वालों को मनोकामना पूर्ण हुई थी।

कब क्या करना होगा
- 4 नवंबर को नहायखाय
- 5 नवंबर को खीर भोजन (खरना)
- 6 नवंबर को सायंकालीन अर्घ्यदान
- 7 नवंबर को सूर्योदय पर अर्घ्यदान
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed