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40 साल बाद सूखे कुएं में अचानक आया पानी, ग्रामीण मान रहे चमत्कार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 25 Jun 2018 11:35 AM IST
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कुएं से पानी निकालते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा की तहसील बाह में बटेश्वर और शौरीपुर के बीच गांव मोरहारी पास 40 साल से सूखे कुएं में शनिवार को अचानक पानी आ गया। सूखे कुएं में 18 फीट पर पानी का स्त्रोत मिलने पर ग्रामीणों में पानी को लेकर उम्मीद जाग गई है।
ग्रामीणों के लिए सूखे कुएं में पानी का स्त्रोत निकलना एक तरह से चमत्कार है। क्योंकि इलाके के सभी कुएं लगभग सूख चुके हैं। भूगर्भ जलस्तर लगातार गिरने से ग्रामीणों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है।
यही वजह रही कि इस कुएं पर पानी का स्त्रोत देखने के लिए ग्रामीणों को मेला लगा रहा। सूखे कुएं में पानी का स्रोत मिलने की खबर पर कौतूहलवश आसपास के गांवों के लोगों के आने का क्रम शुरू हो गया।
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ग्रामीणों के लिए सूखे कुएं में पानी का स्त्रोत निकलना एक तरह से चमत्कार है। क्योंकि इलाके के सभी कुएं लगभग सूख चुके हैं। भूगर्भ जलस्तर लगातार गिरने से ग्रामीणों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है।
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यही वजह रही कि इस कुएं पर पानी का स्त्रोत देखने के लिए ग्रामीणों को मेला लगा रहा। सूखे कुएं में पानी का स्रोत मिलने की खबर पर कौतूहलवश आसपास के गांवों के लोगों के आने का क्रम शुरू हो गया।
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कुएं में पानी देख अचंभित हो गए लोग
40 साल बाद कुएं में आया पानी
- फोटो : अमर उजाला
देखते ही देखते कुएं पर काफी ग्रामीणों को जमावड़ा हो गया। लोगों ने अपनी आंखों से सूखे कुएं में 18 फीट पर पानी के स्त्रोत को देखा, तो सभी अचंभा महसूस करने लगे।
ग्रामीण आनन फानन में अपने-अपने घरों से बर्तन ले आए और कुएं से निकले पानी को भर लिया। यही नहीं लोगों ने मिट्टी के स्रोत से निकले इस पानी का सेवन भी किया।
वर्तमान में दिल्ली में निवास कर रहे प्रकाश चतुर्वेदी के खेत में यमुना के बीहड़ के टीले किनारे स्थित पुराना कुआं लगभग 100 वर्ष से भी पुराना है। ककइया ईंट से बने इस कुएं में लगभग 40 साल पहले पानी का स्रोत खत्म हो गया था।
ग्रामीण आनन फानन में अपने-अपने घरों से बर्तन ले आए और कुएं से निकले पानी को भर लिया। यही नहीं लोगों ने मिट्टी के स्रोत से निकले इस पानी का सेवन भी किया।
वर्तमान में दिल्ली में निवास कर रहे प्रकाश चतुर्वेदी के खेत में यमुना के बीहड़ के टीले किनारे स्थित पुराना कुआं लगभग 100 वर्ष से भी पुराना है। ककइया ईंट से बने इस कुएं में लगभग 40 साल पहले पानी का स्रोत खत्म हो गया था।
चरवाहे ने कुएं में देखा पानी
40 साल बाद कुएं में आया पानी
- फोटो : अमर उजाला
यह कुआं सूख गया और ग्रामीणों के लिए अनुपयोगी हो चुका है। इस कारण इस कुएं से पानी की उम्मीद लोगों के दिलोदिमाग में कभी भी नहीं रही। शनिवार को बकरी चरा रहे गांव के ही महेश की निगाह कुएं में पानी के स्रोत पर पड़ी।
महेश ने इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी। उत्सुकतावश ग्रामीण महेश की बातों पर यकीन करने के लिए कुएं पर पहुंचे तो शनिवार से रविवार की सुबह तक कुएं में पानी का स्रोत काफी बढ़ चुका था।
खबर आग की तरह आसपास के इलाकों में पहुंची तो ग्रामीण वहां पहुंच गए। वहीं प्रकाश चतुर्वेदी के खेतों को बंटाई पर देख रहे 70 साल के मौजीराम ने भी सूखे कुएं में पानी का स्रोत मिलने की तस्दीक की।
महेश ने इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी। उत्सुकतावश ग्रामीण महेश की बातों पर यकीन करने के लिए कुएं पर पहुंचे तो शनिवार से रविवार की सुबह तक कुएं में पानी का स्रोत काफी बढ़ चुका था।
खबर आग की तरह आसपास के इलाकों में पहुंची तो ग्रामीण वहां पहुंच गए। वहीं प्रकाश चतुर्वेदी के खेतों को बंटाई पर देख रहे 70 साल के मौजीराम ने भी सूखे कुएं में पानी का स्रोत मिलने की तस्दीक की।
किसी ने नहाया तो किसी ने पीया पानी
कुएं से पानी निकालते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
चार दशक से सूखे पडे़ कुएं में 18 फीट की गहराई पर पानी का स्त्रोत दिखने के बाद ग्रामीणों ने आसपास के कुएं भी देखे, लेकिन किसी में भी पानी नहीं था। बस यही बात इलाके के लोगों के लिए अंधविश्वास की वजह बन गई।
दर्द के इलाज के भ्रम में पानी पीने और नहाने का सिलसिला शुरू हो गया है। बटेश्वर की प्रेमवती ने बताया कि सभी कुएं सूखे हैं। एक ही कुएं में पानी है तो खास ही होगा। पानी ठंडा है, इसलिए घर ले जा रहे हैं।
गांव के 71 वर्षीय कैलाशी ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसा नहीं देखा है। महज 18 फीट की गहराई पर दशकों से सूखे पडे़ कुएं में पानी निकला है तो निश्चित ही यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
इस संबंध में सेंट जोंस कॉलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ केके सहाय ने बताया कि वाटर रिचार्ज होने की वजह से कुएं में पानी निकला होगा। यमुना या फिर बारिश का पानी रिसकर पहुंचा होगा। यह कोई चमत्कार नहीं है।
दर्द के इलाज के भ्रम में पानी पीने और नहाने का सिलसिला शुरू हो गया है। बटेश्वर की प्रेमवती ने बताया कि सभी कुएं सूखे हैं। एक ही कुएं में पानी है तो खास ही होगा। पानी ठंडा है, इसलिए घर ले जा रहे हैं।
गांव के 71 वर्षीय कैलाशी ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसा नहीं देखा है। महज 18 फीट की गहराई पर दशकों से सूखे पडे़ कुएं में पानी निकला है तो निश्चित ही यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
इस संबंध में सेंट जोंस कॉलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ केके सहाय ने बताया कि वाटर रिचार्ज होने की वजह से कुएं में पानी निकला होगा। यमुना या फिर बारिश का पानी रिसकर पहुंचा होगा। यह कोई चमत्कार नहीं है।