Agra: धनौली में बन रहा ऐसा नाला, नौ साल से चल रहा काम; अभी तक नहीं हो सका पूरा
धनौली में इस नाले का निर्माण जलनिगम की सी एंड डीएस इकाई करा रही है। विधायक, सांसद, मंत्री कई बार देख चुके हैं, पर ये नाला अभी तक अधूरा है।
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आगरा के धनौली रोड की कॉलोनियों और बस्तियाें के लोग 9 साल से नाला निर्माण पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। इसमें कई स्थान तो टापू की तरह हो गए हैं। साल 2014 से अब तक नाला नहीं बन पाया। दरअसल, जल निगम की सी एंड डीएस (कंस्ट्रक्शनंस एंड डिजाइन सर्विसेज) इकाई ने नाले का अधूरा एस्टीमेट बनाया। इससे नाले के लिए और बजट मांगना पड़ रहा है। 3 साल से बजट न मिलने की वजह से काम अधूरा है। करीब डेढ़ लाख लोग नाला न बनने से प्रभावित हैं।
धनौली रोड की गलियों में जलभराव है। 9 साल में पांच बार प्लान बदला। दो बार कार्यदायी संस्थाएं बदल गईं। 18 करोड़ रुपये लागत बढ़ गई। फिर भी समस्या वैसी ही है। नाला नहीं बनने से धनौली, अजीजपुर, सिरौली, नरीपुरा, कमाल खां, राधे गली, शिव नगर, नगला बुद्धा, लेखराज, नगला प्यारे में लोग गंदगी व जलभराव से त्रस्त हैं।
पहले पंपिंग फिर ग्रेविटी से बनना था नाला
सबसे पहले 2014 में जल निगम की यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने नाला निर्माण के लिए 31.48 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया। जिसमें जलभराव से जूझ रहीं धनौली क्षेत्र की बस्तियों के पानी की निकासी रोहता नहर में करनी थी। इसके लिए नाले के रास्ते पानी को पहले रोहता नहर किनारे इकट्ठा किया जाता फिर पंपिंग स्टेशन से पानी को नहर में डाला जाता। पंपिंग स्टेशन संचालन के कारण संस्था बदली और काम सी एंड डीएस को आवंटित हो गया। सी एंड डीएस ने दोबारा सर्वे किया और पंपिंग स्टेशन के बजाय ग्रेविटी फ्लो से नाला निकासी की योजना बना दी।
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लागत 49.84 करोड़ रुपये हो गई
साल 2017 में सी एंड डीएस ने 43.06 करोड़ का नया प्रस्ताव बनाया। 2018 में फिर प्रस्ताव बदला और जीएसटी व अन्य देय लगाकर तीसरी बार में लागत 49.58 करोड़ रुपये हो गई। अप्रैल 2018 में शासन से 20 करोड़ रुपये जारी हो गए। योजना में 6349 मीटर ट्रंक आरसीसी एवं 6563 मीटर ब्रांच आरसीसी प्रस्तावित थी। जिसमें से 5200 मीटर ट्रंक आरसीसी निर्माण का दावा किया जा रहा है। बाकी नाला अभी तक नहीं बना। 2019 में और फिर 2020 में पांचवीं बार लागत बढ़कर 49.84 करोड़ रुपये हो चुकी है। बीते सात साल में 18 करोड़ रुपये लागत बढ़ने के बाद भी नाला अधूरा पड़ा है।
कमिश्नर ने प्रमुख सचिव से मांगा बजट
धनौली नाले की समस्या का निदान करने के लिए कमिश्नर अमित गुप्ता ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर नए एस्टिमेट की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के लिए पत्र भेजा। इस बार की मंडलीय समीक्षा बैठक में फिर से पत्र भेजने को कहा गया है।
विरोध प्रदर्शन से भी नहीं पड़ा असर
धनौली रोड निवासी मनोज शर्मा ने बताया कि बीते साल धनौली क्षेत्र में नाला नहीं बनने पर गड्ढा खोदकर उसमें दो बुजुर्ग ने बैठकर प्रदर्शन किया था। उसके बाद भी नाले का काम शुरू नहीं हो पाया। पार्षद, प्रधान, विधायक, सांसद और मंत्री तक यहां का कई बार निरीक्षण कर गए लेकिन समस्या का निदान नहीं हो पाया। 15 से ज्यादा गलियों में पानी भरा हुआ है।
कमीशन के चक्कर में योजना बना रहे
धनौली रोड निवासी सचिन शर्मा ने बताया कि अधिकारी सिर्फ अपने कमीशन के चक्कर में योजना बना रहे हैं। लोगों की समस्या दूर करने का उनका कोई इरादा नहीं है। इसलिए 9 साल में हमारा नाला पूरा नहीं बन पाया।