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हिन्दी हैं हमः मुझे गर्व है कि मैंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की, सरल और सहज ही नहीं हिन्दी में है आत्मीयता
Sun, 16 Aug 2020 02:21 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 16 Aug 2020 02:21 PM IST
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अपराजिता- हिंदी माध्यम से पढ़ी महिलाएं जिन्होंने पाई अपार सफलता
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षा क्षेत्र में मुकाम हासिल करने वाली महिलाओं का कहना है कि उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्होंने हिंदी माध्यम में पढ़ाई की। यह सरल और सहज ही नहीं बल्कि इसमें आत्मीयता है। हिंदी में कही बात ज्यादा असरदार होती है।
मैंने प्राथमिक से विश्वविद्यालयी शिक्षा हिंदी माध्यम से प्राप्त की है। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने में कोई दिक्कत नहीं आई। ऐसा कभी नहीं हुआ कि मुझे लगा हो कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़ती तो सफलता मिलने में आसानी रहती। विश्व हिंदी सम्मेलनों में हिस्सा ले चुकी हूं। कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। मुझे गर्व है कि मैंने हिंदी से पढ़ाई की। - प्रो. बीना शर्मा, विभागाध्यक्ष, अध्यापक शिक्षा विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान
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मैंने प्राथमिक से विश्वविद्यालयी शिक्षा हिंदी माध्यम से प्राप्त की है। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने में कोई दिक्कत नहीं आई। ऐसा कभी नहीं हुआ कि मुझे लगा हो कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़ती तो सफलता मिलने में आसानी रहती। विश्व हिंदी सम्मेलनों में हिस्सा ले चुकी हूं। कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। मुझे गर्व है कि मैंने हिंदी से पढ़ाई की। - प्रो. बीना शर्मा, विभागाध्यक्ष, अध्यापक शिक्षा विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान
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हिंदी से बचपन से लगाव था, तीन किताबें लिखीं
मैंने कक्षा तीन से स्नातक तक की पढ़ाई बीडी जैन संस्था (हिंदी माध्यम) से ही की है। घर में हिंदी और संस्कृत भाषा का माहौल था। इससे बचपन से ही मुझे हिंदी से लगाव हो गया। खुद को भाग्यशाली भी मानती हूं कि हिंदी माध्यम से पढ़ाई की। अब तक तीन किताबें लिख चुकी हूं। सात-आठ किताबों का संपादन की चुकी हूं। 16 वर्षों से बीडी जैन कॉलेज में हिंदी पढ़ा रही हूं। उत्तर प्रदेश लेखिका मंच की सचिव भी हूं। - डॉ. शिखा श्रीधर। हिंदी विभागाध्यक्षा, श्रीमती बीडी जैन कॉलेज
रचनाकार के रूप में खुद को जिंदा रखा
पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से रंगमंच से दूरी बन गई। अध्यापन और शिक्षण के कार्य को पूरा करते हुए रचनाकार के रूप में अपने आप को जिंदा रखने का प्रयास किया है। रचनात्मकता से जुड़कर व्यक्ति अपने आप को पूर्ण मानता है, मैं पूर्ण नहीं पर काफी हद तक संतुष्ट हूं। एक अध्यापक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई, हिंदी विभाग की अध्यक्ष बनी। हिंदी के लिए पर्दे के पीछे व सामने दोनों स्थानों पर काम किया है। - डॉ. रेखा पतसारिया, प्राचार्य, आगरा कॉलेज
मैंने कक्षा तीन से स्नातक तक की पढ़ाई बीडी जैन संस्था (हिंदी माध्यम) से ही की है। घर में हिंदी और संस्कृत भाषा का माहौल था। इससे बचपन से ही मुझे हिंदी से लगाव हो गया। खुद को भाग्यशाली भी मानती हूं कि हिंदी माध्यम से पढ़ाई की। अब तक तीन किताबें लिख चुकी हूं। सात-आठ किताबों का संपादन की चुकी हूं। 16 वर्षों से बीडी जैन कॉलेज में हिंदी पढ़ा रही हूं। उत्तर प्रदेश लेखिका मंच की सचिव भी हूं। - डॉ. शिखा श्रीधर। हिंदी विभागाध्यक्षा, श्रीमती बीडी जैन कॉलेज
रचनाकार के रूप में खुद को जिंदा रखा
पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से रंगमंच से दूरी बन गई। अध्यापन और शिक्षण के कार्य को पूरा करते हुए रचनाकार के रूप में अपने आप को जिंदा रखने का प्रयास किया है। रचनात्मकता से जुड़कर व्यक्ति अपने आप को पूर्ण मानता है, मैं पूर्ण नहीं पर काफी हद तक संतुष्ट हूं। एक अध्यापक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई, हिंदी विभाग की अध्यक्ष बनी। हिंदी के लिए पर्दे के पीछे व सामने दोनों स्थानों पर काम किया है। - डॉ. रेखा पतसारिया, प्राचार्य, आगरा कॉलेज
साहित्यिक संस्थाओं की आजीवन सदस्य हूं
मैंने पूरी शिक्षा हिंदी माध्यम से प्राप्त की। हाईस्कूल से एमए तक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। हिंदी से विशेष लगाव था। एमए हिंदी से किया। केएमआई से शोध कार्य किया। आकाशवाणी व दूरदर्शन के कार्यक्रमों में सहभागिता की। वर्ष 1983 से सेंट जोंस में शिक्षण कार्य किया। हिंदी की विभागाध्यक्ष, कला संकाय की डीन के साथ लंबे समय तक चीफ प्रॉक्टर रही। केंद्र सरकार की हिंदी सलाहकार समिति की सदस्य रही। कई साहित्यिक संस्थाओं - नागरी प्रचारिणी, सूर स्मारक मंडल आदि की आजीवन सदस्य हूं। - डॉ. मधुरिमा शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, सेंट जोंस कॉलेज
अंग्रेजी माध्यम छोड़कर आ रहीं हैं छात्राएं
मैंने प्रारंभिक से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा हिंदी माध्यम से की। यूपी बोर्ड के विद्यालय क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कॉलेज से
इंटरमीडिएट किया। डीईआई से बीएससी और एमएससी, आरबीएस कॉलेज से बीएड किया। अब यूपी बोर्ड के विद्यालय में बतौर
प्रधानाचार्य के रूप में सेवा देकर अच्छा लग रहा है। प्रति वर्ष विद्यालय की छात्राएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इससे विद्यालय की
गरिमा बढ़ रही हैं। अंग्रेजी माध्यम स्कूल छोड़कर यहां छात्राएं पढ़ने आ रहीं हैं। - कुमुद ग्रोवर, प्रधानाचार्य, रामस्वरूप सिंघल गर्ल्स इंटर कॉलेज
मैंने पूरी शिक्षा हिंदी माध्यम से प्राप्त की। हाईस्कूल से एमए तक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। हिंदी से विशेष लगाव था। एमए हिंदी से किया। केएमआई से शोध कार्य किया। आकाशवाणी व दूरदर्शन के कार्यक्रमों में सहभागिता की। वर्ष 1983 से सेंट जोंस में शिक्षण कार्य किया। हिंदी की विभागाध्यक्ष, कला संकाय की डीन के साथ लंबे समय तक चीफ प्रॉक्टर रही। केंद्र सरकार की हिंदी सलाहकार समिति की सदस्य रही। कई साहित्यिक संस्थाओं - नागरी प्रचारिणी, सूर स्मारक मंडल आदि की आजीवन सदस्य हूं। - डॉ. मधुरिमा शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, सेंट जोंस कॉलेज
अंग्रेजी माध्यम छोड़कर आ रहीं हैं छात्राएं
मैंने प्रारंभिक से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा हिंदी माध्यम से की। यूपी बोर्ड के विद्यालय क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कॉलेज से
इंटरमीडिएट किया। डीईआई से बीएससी और एमएससी, आरबीएस कॉलेज से बीएड किया। अब यूपी बोर्ड के विद्यालय में बतौर
प्रधानाचार्य के रूप में सेवा देकर अच्छा लग रहा है। प्रति वर्ष विद्यालय की छात्राएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इससे विद्यालय की
गरिमा बढ़ रही हैं। अंग्रेजी माध्यम स्कूल छोड़कर यहां छात्राएं पढ़ने आ रहीं हैं। - कुमुद ग्रोवर, प्रधानाचार्य, रामस्वरूप सिंघल गर्ल्स इंटर कॉलेज