{"_id":"5f647164936b8c04911ce96e","slug":"students-waits-for-digree-and-marksheet-of-dr-bhimrao-ambedkar-university","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विश्वविद्यालयः अंकपत्र-डिग्री के लिए भटक रहे छात्र, हेल्प डेस्क नहीं दे रही जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्वविद्यालयः अंकपत्र-डिग्री के लिए भटक रहे छात्र, हेल्प डेस्क नहीं दे रही जानकारी
Fri, 18 Sep 2020 02:06 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 18 Sep 2020 02:06 PM IST
सार
एक सितंबर से छात्रों को विश्वविद्यालय के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। हेल्प डेस्क पर छात्र-छात्राओं को संतोषजनक जवाब नहीं
मिल पा रहा है। प्रार्थनापत्र पर मोबाइल नंबर लिखवाए जा रहे हैं, लेकिन कोई कमी रहने पर उन पर फोन नहीं पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को डिग्री, अंकपत्र, प्रोविजनल डिग्री, माइग्रेशन आदि के लिए आवेदन करने के बाद कब तक उन्हें ये प्रमाणपत्र मिल जाएंगे यह तय नहीं है। हेल्प डेस्क पर प्रार्थनापत्र देने वालों को तो रिसीविंग भी नहीं दी जा रही है। छात्र पूछते हैं कि कब तक समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
एक सितंबर से छात्रों को विश्वविद्यालय के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। हेल्प डेस्क पर छात्र-छात्राओं को संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। प्रार्थनापत्र पर मोबाइल नंबर लिखवाए जा रहे हैं, लेकिन कोई कमी रहने पर उन पर फोन नहीं पहुंच रहे हैं। यही दशा ऑनलाइन आवेदन करने वाले छात्रों की है, उनके आवेदन की कमियां भी नहीं बताई जा रही हैं।
हेल्प डेस्क से लिए प्रार्थनापत्रों के निस्तारण का रिकॉर्ड नहीं
विवि प्रशासन हेल्प डेस्क से लिए जाने वाले प्रार्थनापत्रों की निगरानी भी नहीं करा रहा है। एक सितंबर से कितने प्रार्थनापत्र लिए गए, उनमें से कितने छात्रों को फोन करके कमियां बताई गईं या फिर कितने विद्यार्थियों की समस्या का समाधान कर दिया गया। किस पटल पर कितने प्रार्थनापत्र रुके हैं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं बनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक सितंबर से छात्रों को विश्वविद्यालय के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। हेल्प डेस्क पर छात्र-छात्राओं को संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। प्रार्थनापत्र पर मोबाइल नंबर लिखवाए जा रहे हैं, लेकिन कोई कमी रहने पर उन पर फोन नहीं पहुंच रहे हैं। यही दशा ऑनलाइन आवेदन करने वाले छात्रों की है, उनके आवेदन की कमियां भी नहीं बताई जा रही हैं।
विज्ञापन
हेल्प डेस्क से लिए प्रार्थनापत्रों के निस्तारण का रिकॉर्ड नहीं
विवि प्रशासन हेल्प डेस्क से लिए जाने वाले प्रार्थनापत्रों की निगरानी भी नहीं करा रहा है। एक सितंबर से कितने प्रार्थनापत्र लिए गए, उनमें से कितने छात्रों को फोन करके कमियां बताई गईं या फिर कितने विद्यार्थियों की समस्या का समाधान कर दिया गया। किस पटल पर कितने प्रार्थनापत्र रुके हैं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं बनाया गया है।
विज्ञापन
छात्रों को विश्वविद्यालय के गेट से लौटते सुरक्षाकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
फरवरी 2018 में डिग्री के लिए आवेदन किया, अभी तक मिला नहीं
वर्ष 2015 में बीकॉम किया था। फरवरी 2018 में डिग्री के लिए आवेदन किया। तब से कम से कम 18-20 बार डिग्री के लिए विवि के चक्कर लगा चुका हूं। प्रार्थनापत्र ले लिया जाता है, काम नहीं हो रहा। हेल्प डेस्क पर न तो रिसीविंग दी जाती है, न ही समस्या के समाधान का समय बताया जाता है। -दिग्विजय सिंह, हाथरस
छह वर्ष में नहीं मिल पाया अंकपत्र
वर्ष 2013-14 में बीएड किया है। विश्वविद्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद भी कंप्यूटराइज्ड अंकपत्र नहीं मिल पाया है। इस वर्ष जून में डुप्लीकेट के लिए आवेदन करने के लिए कहा गया। दो महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अंकपत्र फिर भी नहीं मिला। -नूतन पाठक, एटा
प्रोविजनल डिग्री छह माह में नहीं दे पाए
वर्ष 2007 में एमए किया था। पांच मार्च 2020 को प्रोविजनल डिग्री के लिए आवेदन किया था। तीन बार विश्वविद्यालय की दौड़ लगा चुका हूं। हर बार आश्वासन मिलता है, काम नहीं हो रहा। यदि समस्या के समाधान का समय निर्धारित हो जाए तो बार-बार दौड़ न लगानी पड़े। -सुखवीर, अलीगढ़
वर्ष 2015 में बीकॉम किया था। फरवरी 2018 में डिग्री के लिए आवेदन किया। तब से कम से कम 18-20 बार डिग्री के लिए विवि के चक्कर लगा चुका हूं। प्रार्थनापत्र ले लिया जाता है, काम नहीं हो रहा। हेल्प डेस्क पर न तो रिसीविंग दी जाती है, न ही समस्या के समाधान का समय बताया जाता है। -दिग्विजय सिंह, हाथरस
छह वर्ष में नहीं मिल पाया अंकपत्र
वर्ष 2013-14 में बीएड किया है। विश्वविद्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद भी कंप्यूटराइज्ड अंकपत्र नहीं मिल पाया है। इस वर्ष जून में डुप्लीकेट के लिए आवेदन करने के लिए कहा गया। दो महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अंकपत्र फिर भी नहीं मिला। -नूतन पाठक, एटा
प्रोविजनल डिग्री छह माह में नहीं दे पाए
वर्ष 2007 में एमए किया था। पांच मार्च 2020 को प्रोविजनल डिग्री के लिए आवेदन किया था। तीन बार विश्वविद्यालय की दौड़ लगा चुका हूं। हर बार आश्वासन मिलता है, काम नहीं हो रहा। यदि समस्या के समाधान का समय निर्धारित हो जाए तो बार-बार दौड़ न लगानी पड़े। -सुखवीर, अलीगढ़
विश्वविद्यालय आए छात्रों की समस्या सुनते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
जिम्मेदार बोले- एजेंसी पर भी लटक रहे प्रकरण
नाम आदि संशोधन वाले तमाम प्रकरण एजेंसी पर भी लटक रहे थे। जानकारी होने पर जांच कराई गई। एजेंसी की ओर से बताया गया कि कुछ प्रकरण एकत्रित हो जाने पर वह विश्वविद्यालय को भेजते हैं। नियमित रूप से इसे भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी निगरानी कराई जाएगी। बाकी जगहों पर किन कारणों से आवेदन रुक रहे हैं, इसका पता कराया जा रहा है। दिक्कतों को दूर कर निर्धारित समय पर छात्रों की समस्या का समाधान कराया जाएगा। -प्रो. अशोक मित्तल, कुलपति, विवि
गोले बनवाए, पालन करवाने वाला कोई नहीं
हेल्प डेस्क पर छात्रों की भीड़ लग रही है। विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को हेल्प डेस्क पर निर्धारित दूरी पर गोले बनवा दिए। किसी सुरक्षा गार्ड को नहीं लगवाया गया, जो कि छात्रों व अभिभावकों को उनमें खड़े होने के लिए कहे। दोपहर तक विश्वविद्यालय खुला। हेल्प डेस्क पर झुंड में ही लोग खड़े थे। चीफ प्रॉक्टर प्रो. मनोज श्रीवास्तव दोपहर करीब एक बजे हेल्प डेस्क पर पहुंचकर तो छात्रों से गोले में खड़े होने के लिए कहा। कुछ देर बाद फिर से झुंड बन गए।
नाम आदि संशोधन वाले तमाम प्रकरण एजेंसी पर भी लटक रहे थे। जानकारी होने पर जांच कराई गई। एजेंसी की ओर से बताया गया कि कुछ प्रकरण एकत्रित हो जाने पर वह विश्वविद्यालय को भेजते हैं। नियमित रूप से इसे भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी निगरानी कराई जाएगी। बाकी जगहों पर किन कारणों से आवेदन रुक रहे हैं, इसका पता कराया जा रहा है। दिक्कतों को दूर कर निर्धारित समय पर छात्रों की समस्या का समाधान कराया जाएगा। -प्रो. अशोक मित्तल, कुलपति, विवि
गोले बनवाए, पालन करवाने वाला कोई नहीं
हेल्प डेस्क पर छात्रों की भीड़ लग रही है। विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को हेल्प डेस्क पर निर्धारित दूरी पर गोले बनवा दिए। किसी सुरक्षा गार्ड को नहीं लगवाया गया, जो कि छात्रों व अभिभावकों को उनमें खड़े होने के लिए कहे। दोपहर तक विश्वविद्यालय खुला। हेल्प डेस्क पर झुंड में ही लोग खड़े थे। चीफ प्रॉक्टर प्रो. मनोज श्रीवास्तव दोपहर करीब एक बजे हेल्प डेस्क पर पहुंचकर तो छात्रों से गोले में खड़े होने के लिए कहा। कुछ देर बाद फिर से झुंड बन गए।