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Agra News: खंडहर क्लास में जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे छात्र, अछनेरा के एक दर्जन से अधिक जर्जर स्कूलों में दांव पर नाैनिहालों की जिंदगी, प्रशासन की अनदेखी पड़ न जाए भारी
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दांव पर जिंदगी, जर्जर विद्यालयों में भविष्य संवार रहे नौनिहाल
- फोटो : Samvad
अछनेरा। ब्लॉक अछनेरा के सरकारी स्कूल इन दिनों शिक्षा के मंदिर कम और मौत के जाल अधिक नजर आ रहे हैं। क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की इमारतें इस कदर जर्जर हो चुकी हैं कि यहां पढ़ने वाले नौनिहालों की जिंदगी हर पल दांव पर लगी है। सबसे बदतर स्थिति ग्राम पुरामना स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की है, जहां विभाग की अनदेखी किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है।
हैरानी की बात यह है कि इस विद्यालय का निर्माण वर्ष 2009 में हुआ था, लेकिन घटिया निर्माण की पोल महज एक साल में ही खुल गई। वर्ष 2010 से ही तत्कालीन प्रधानाध्यापकों द्वारा ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर बीएसए आगरा से करीब 30 बार लिखित शिकायत की गई। लेकिन विडंबना देखिए कि डेढ़ दशक बीतने को है और दर्जनों शिकायतों के बावजूद आज तक न तो ठेकेदार पर कार्रवाई हुई और न ही भवन की सुध ली गई।
इंसेट
चेतावनी बोर्ड के बीच बैठने को मजबूर बच्चे
वर्तमान में पुरामना विद्यालय के भवन की छत का एक हिस्सा गिर चुका है, फर्श उखड़ गया है और दीवारों में गहरे गड्ढे हो गए हैं। बारिश के दिनों में तो छत से पानी का रिसाव होने के कारण कमरे तालाब बन जाते हैं। प्रशासन ने औपचारिकता पूरी करने के लिए विद्यालय में चेतावनी बोर्ड तो लगा दिए हैं, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण 95 पंजीकृत छात्र आज भी उन्हीं जानलेवा कमरों में बैठने को मजबूर हैं।
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इंसेट
अभिभावकों का अल्टीमेटम
ग्रामीण पप्पू सिंह, शिवकुमार और वीरेंद्र ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को खौफ के साये में स्कूल भेज रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भवन का कायाकल्प नहीं हुआ, तो वे बच्चों को विद्यालय भेजना पूरी तरह बंद कर देंगे।
वर्जन
हमने बीएसए और एबीएसए को कई बार लिखित में अवगत कराया है, लेकिन अब तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
— श्याम सिंह, प्रभारी प्रधानाध्यापक
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हैरानी की बात यह है कि इस विद्यालय का निर्माण वर्ष 2009 में हुआ था, लेकिन घटिया निर्माण की पोल महज एक साल में ही खुल गई। वर्ष 2010 से ही तत्कालीन प्रधानाध्यापकों द्वारा ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर बीएसए आगरा से करीब 30 बार लिखित शिकायत की गई। लेकिन विडंबना देखिए कि डेढ़ दशक बीतने को है और दर्जनों शिकायतों के बावजूद आज तक न तो ठेकेदार पर कार्रवाई हुई और न ही भवन की सुध ली गई।
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चेतावनी बोर्ड के बीच बैठने को मजबूर बच्चे
वर्तमान में पुरामना विद्यालय के भवन की छत का एक हिस्सा गिर चुका है, फर्श उखड़ गया है और दीवारों में गहरे गड्ढे हो गए हैं। बारिश के दिनों में तो छत से पानी का रिसाव होने के कारण कमरे तालाब बन जाते हैं। प्रशासन ने औपचारिकता पूरी करने के लिए विद्यालय में चेतावनी बोर्ड तो लगा दिए हैं, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण 95 पंजीकृत छात्र आज भी उन्हीं जानलेवा कमरों में बैठने को मजबूर हैं।
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अभिभावकों का अल्टीमेटम
ग्रामीण पप्पू सिंह, शिवकुमार और वीरेंद्र ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को खौफ के साये में स्कूल भेज रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भवन का कायाकल्प नहीं हुआ, तो वे बच्चों को विद्यालय भेजना पूरी तरह बंद कर देंगे।
वर्जन
हमने बीएसए और एबीएसए को कई बार लिखित में अवगत कराया है, लेकिन अब तक आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
— श्याम सिंह, प्रभारी प्रधानाध्यापक