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Agra: कुत्तों ने हमला कर मूकबधिर बच्ची को किया लहूलुहान, 10 मिनट तक नोंचते-घसीटते रहे, हालत गंभीर

Mon, 25 Jul 2022 03:04 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 25 Jul 2022 03:04 PM IST
सार

आगरा के दहतोरा गांव में दस साल की एक मासूम बच्ची पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इससे बच्ची लहूलुहान हो गई। राहगीरों ने कुत्तों को भगाया, तब जाकर बच्ची की जान बच सकी, लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। 

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stray dogs attack on Ten year old Girl Seriously Injured in agra news
बच्ची का ऑपरेशन करती डॉक्टरों की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के दहतौरा के गांव गगोई गांव की 10 साल की मूकबधिर बच्ची को 10-12 कुत्तों ने हमला बोलकर लहूलुहान कर दिया। 10 मिनट तक कुत्ते बच्ची को नोंचते-काटते रहे। आसपास के लोगों ने कुत्तों को जैसे-तैसे भगाया। परिजन बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां चार घंटे तक बच्ची का ऑपरेशन चला और 36 टांके लगाने पड़े हैं। अभी बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है। 

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दहतौरा के गगोई गांव निवासी धर्म सिंह ने बताया कि 10 साल की बेटी गुंजन सुबह करीब पांच बजे घर के बाहर खेल रही थी। कुछ देर बाद वह कुत्तों के पीछे-पीछे चली गई। जहां 10-12 कुत्तों ने उसे घेरकर हमला बोल दिया। इस कारण कुत्ते उसे 20 मीटर तक घसीटकर ले गए। बच्ची बोल नहीं पाती है, जिस कारण वह चिल्ला नहीं पाई। इसी बीच वहां से गुजर रहे पड़ोसी ने बच्ची को कुत्तों से काटते देखा तो शोर मचा दिया। अन्य पड़ोसी आए और कुत्तों को डंडों से बमुश्किल भगाया। 
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बच्ची बेहोश हो गई और खून से लथपथ थी। तत्काल बच्ची को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां इसकी हालत देख चिकित्सक भी भयभीत हो गए। तत्काल प्रमुख अधीक्षक ने सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन, एनेस्थीसियन की टीम बनाई और बच्ची को ऑपरेशन थिएटर लेकर गए। यहां करीब चार घंटे तक बच्ची का ऑपरेशन चला। अभी बच्ची की हालत गंभीर है और आईसीयू में है। 

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'सिर, पेट, हाथ-पैर और छाती में 26 जख्म'

प्रमुख अधीक्षक डॉ. अशोक अग्रवाल ने बताया कि पैर से सिर तक कुत्तों ने काट खाया है। पेट, छाती, हाथ-पैर, सिर, गर्दन यहां तक कि जांघ और गुप्तांग से भी मांस नोंच लिया है। पूरे शरीर पर 26 जख्म मिले हैं। सबसे ज्यादा 19 जख्म कमर से नीचे के हिस्से पर हैं। तीन इंच तक के जख्म हैं। बच्ची के 36 टांके भी लगाने पड़े हैं। 

'रक्त चढ़ाया, एआरवी भी लगवाया' 

मुख्य अधीक्षक डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि बच्ची के एआरवी लगाने के साथ रक्त की एक यूनिट चढ़ा दी है। संक्रमण से बचाने के लिए रैबीफ्लू इंजेक्शन भी लगाए गए हैं, इस इंजेक्शन की कीमत दो हजार रुपये है। इसे शासन उपलब्ध नहीं कराता, लेकिन बच्ची की हालत देख इसे अतिरिक्त फंड से खरीदा गया है। 

'मां नहीं है, दादी के साथ रहती है गुंजन'

बच्ची की मौसी गुड़िया ने बताया कि गुंजन की मां नहीं है। करीब नौ साल पहले ही मेरी बहन नीतू का देहांत हो गया था। इससे बड़ा 14 साल का बेटा है, जो अपनी बुआ के साथ रहता है। यहां गुंजन अपने पिता और दादी के साथ रहती है। अक्सर वह घर के बाहर खेलती है, ईश्वर की कृपा है कि वक्त रहते लोगों ने उसे बचा लिया। 

कुत्ते-बंदर के हमले से हर महीने 11892 मरीज 

एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) सेल के डॉ. मोहित कुमार ने बताया कि बीते महीने में 11892 मरीज कुत्ता-बंदर काटे के आए। औसतन रोजाना 400 मरीज रहते हैं। इसमें से 70 फीसदी मरीज कुत्ते के हमले से घायल होते हैं। इनको परीक्षण करने के बाद एआरवी की डोज तय करते हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण एआरवी की भी किल्लत रहती है।

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