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सुपरसोनिक मिसाइल 'स्मार्ट' में आगरा के वैज्ञानिकों का कमाल, 650 किमी तक कर सकती है मार
Tue, 06 Oct 2020 08:59 AM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Mohit Mudgal
Updated Tue, 06 Oct 2020 08:59 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Twitter
नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देने वाली जिस एंटी सबमरीन मिसाइल ‘स्मार्ट’ का सोमवार को ओडिशा में परीक्षण किया गया, उसकी गति और दिशा को आगरा के हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास संस्थापन (एडीआरडीई) के रक्षा वैज्ञानिकों ने तय किया है। वैज्ञानिकों ने स्मार्ट मिसाइल के लिए ‘वेलोसिटी रिडक्शन मेकैनिज्म’ को तैयार किया है।
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हवा से पानी में मार करने वाली सुपरसोनिक एंटी सबमरीन मिसाइल में पैराशूट के जरिए गति को नियंत्रित करने की तकनीक एडीआरडीई ने बनाई है। इस मिसाइल की रेंज 650 किमी की है। सोमवार दोपहर को सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (स्मार्ट) का सफल फ्लाइट टेस्ट हुआ। यह ऐसा सिस्टम है जिसमें टॉरपीडो के साथ मिसाइल भी होती है।
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'स्मार्ट' मिसाइल के लिए जरूरी तकनीक को विकसित करने में डीआरडीओ की डीआरडीएल, आरसीआई हैदराबाद, एडीआरडीई आगरा के वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही। आगरा एडीआरडीई के निदेशक डॉ. एके सक्सेना के नेतृत्व में वैज्ञानिकों केडी दिवाकर, विवेक अग्रवाल, विपिन वर्मा आदि ने वेलोसिटी रिडक्शन मेकैनिज्म (वीआरएम) को बनाया।
मिसाइल की स्पीड को कम करती है वीआरएम तकनीक
पानी में पनडुब्बी को नष्ट करने के लिए सुपरसोनिक एंटी सबमरीन मिसाइल हवा से जब छोड़ी जाती है तो इसकी गति ध्वनि के करीब होती है। 330 मीटर/सेकंड की गति को नियंत्रित करने और पानी के अंदर प्रवेश के दौरान अचूक निशाने को सही दिशा देने के लिए वीआरएम तकनीक उपयोग की गई है। एडीआरडीई के वैज्ञानिकों ने सुपरसोनिक मिसाइल की गति और कोण के लिए पैराशूट का उपयोग किया है। पैराशूट तकनीक के जरिए जरूरत के मुताबिक सुपरसोनिक मिसाइल को नियंत्रित किया जा सकता है।
'मेरी टीम ने अच्छा काम किया'
एडीआरडीई के निदेशक एके सक्सेना ने कहा कि सुपरसोनिक मिसाइल सिस्टम में मेरी टीम ने अच्छा काम किया है। हमें इस योगदान के लिए साथियों पर गर्व है।
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पानी में पनडुब्बी को नष्ट करने के लिए सुपरसोनिक एंटी सबमरीन मिसाइल हवा से जब छोड़ी जाती है तो इसकी गति ध्वनि के करीब होती है। 330 मीटर/सेकंड की गति को नियंत्रित करने और पानी के अंदर प्रवेश के दौरान अचूक निशाने को सही दिशा देने के लिए वीआरएम तकनीक उपयोग की गई है। एडीआरडीई के वैज्ञानिकों ने सुपरसोनिक मिसाइल की गति और कोण के लिए पैराशूट का उपयोग किया है। पैराशूट तकनीक के जरिए जरूरत के मुताबिक सुपरसोनिक मिसाइल को नियंत्रित किया जा सकता है।
'मेरी टीम ने अच्छा काम किया'
एडीआरडीई के निदेशक एके सक्सेना ने कहा कि सुपरसोनिक मिसाइल सिस्टम में मेरी टीम ने अच्छा काम किया है। हमें इस योगदान के लिए साथियों पर गर्व है।
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