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Agra News: कासगंज-एटा सीट पर सपा को दो बार ही मिली कामयाबी
Mon, 01 Apr 2024 04:39 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 01 Apr 2024 04:39 AM IST
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कासगंज।
समाजवादी पार्टी अपने गठन के बाद से एटा लोकसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशी को छह बार चुनाव मैदान में उतार चुकी है, लेकिन मतदाताओं ने दो बार ही सपा के प्रत्याशी के सिर पर जीत का सेहरा बांधा। 2009 के चुनाव में सपा ने कल्याण सिंह को समर्थन देकर खुद का प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा। जबकि चार बार सपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से 1967 में अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की। इसके बाद 1996 में हुए लोकसभा चुनावों में सपा ने रमेश यादव को इस सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन एक बार कासगंज से और तीन बार एटा सीट से सांसद रह चुके भाजपा प्रत्याशी महादीपक सिंह को परास्त करने में सफल नहीं हो सके। परिणाम आने पर वे दूसरे स्थान पर रहे।
वर्ष 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने पटियाली से दो बार विधायक रह चुके देवेंद्र सिंह यादव को अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी महादीपक को वे भी हरा नहीं सके। इस चुनाव में भी सपा को दूसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा था। 1999 में हुए लोक सभा चुनाव में सपा ने फिर से देवेंद्र सिंह यादव पर भरोसा जताया। इस चुनाव में देश में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी, लेकिन जिले की सियासत का परिदृश्य बदल गया। इस बार सपा प्रत्याशी ने महादीपक सिंह को शिकस्त देने में कामयाब रहे। महादीपक सिंह इस क्षेत्र से लगातार छह बार सांसद रहे।
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2004 के चुनाव में सपा ने फिर से सांसद देवेंद्र सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया। भाजपा ने अशोक रतन शाक्य को प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे सपा से सीट वापस लेने में सफल नहीं हो सके। इस बार भी यह सीट सपा प्रत्याशी की झोली में गई। इसके बाद वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में सपा ने कल्याण सिंह को समर्थन दिया। इसके चलते इस सीट से अपना प्रत्याशी ही नहीं उतारा। इस चुनाव में कल्याण सिंह की जीत हुई। कल्याण सिंह के भाजपा में शामिल होने पर भाजपा ने 2014 के चुनाव में उनके पुत्र राजवीर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। जबकि सपा ने फिर से पूर्व सांसद देवेंद्र सिंह पर दांव लगाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी ने सपा के देवेंद्र सिंह को पटखनी देने में कामयाब रहे। इसीक्रम में वर्ष 2019 के चुनाव भी सपा के देवेंद्र सिंह यादव और भाजपा प्रत्याशी सांसद राजवीर के बीच कांटे की टक्कर हुई। लेकिन इस बार भी राजवीर के सिर पर जीत का ताज सजा।
2024 के चुनाव में एटा लोकसभा का परिदृश्य बदल गया है। पूर्व सांसद देवेंद्र यादव भाजपा में शामिल हो चुके हैं। सियासत की पिच पर सपा से देवेश शाक्य मैदान में है। जबकि भाजपा से सांसद राजवीर सिंह मोर्चे पर हैं। देखना यह है कि इस चुनाव में सपा अपना सूखा खत्म कर पाती है या नहीं।
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समाजवादी पार्टी अपने गठन के बाद से एटा लोकसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशी को छह बार चुनाव मैदान में उतार चुकी है, लेकिन मतदाताओं ने दो बार ही सपा के प्रत्याशी के सिर पर जीत का सेहरा बांधा। 2009 के चुनाव में सपा ने कल्याण सिंह को समर्थन देकर खुद का प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा। जबकि चार बार सपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से 1967 में अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की। इसके बाद 1996 में हुए लोकसभा चुनावों में सपा ने रमेश यादव को इस सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन एक बार कासगंज से और तीन बार एटा सीट से सांसद रह चुके भाजपा प्रत्याशी महादीपक सिंह को परास्त करने में सफल नहीं हो सके। परिणाम आने पर वे दूसरे स्थान पर रहे।
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वर्ष 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने पटियाली से दो बार विधायक रह चुके देवेंद्र सिंह यादव को अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी महादीपक को वे भी हरा नहीं सके। इस चुनाव में भी सपा को दूसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा था। 1999 में हुए लोक सभा चुनाव में सपा ने फिर से देवेंद्र सिंह यादव पर भरोसा जताया। इस चुनाव में देश में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी, लेकिन जिले की सियासत का परिदृश्य बदल गया। इस बार सपा प्रत्याशी ने महादीपक सिंह को शिकस्त देने में कामयाब रहे। महादीपक सिंह इस क्षेत्र से लगातार छह बार सांसद रहे।
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2004 के चुनाव में सपा ने फिर से सांसद देवेंद्र सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया। भाजपा ने अशोक रतन शाक्य को प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे सपा से सीट वापस लेने में सफल नहीं हो सके। इस बार भी यह सीट सपा प्रत्याशी की झोली में गई। इसके बाद वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में सपा ने कल्याण सिंह को समर्थन दिया। इसके चलते इस सीट से अपना प्रत्याशी ही नहीं उतारा। इस चुनाव में कल्याण सिंह की जीत हुई। कल्याण सिंह के भाजपा में शामिल होने पर भाजपा ने 2014 के चुनाव में उनके पुत्र राजवीर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। जबकि सपा ने फिर से पूर्व सांसद देवेंद्र सिंह पर दांव लगाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी ने सपा के देवेंद्र सिंह को पटखनी देने में कामयाब रहे। इसीक्रम में वर्ष 2019 के चुनाव भी सपा के देवेंद्र सिंह यादव और भाजपा प्रत्याशी सांसद राजवीर के बीच कांटे की टक्कर हुई। लेकिन इस बार भी राजवीर के सिर पर जीत का ताज सजा।
2024 के चुनाव में एटा लोकसभा का परिदृश्य बदल गया है। पूर्व सांसद देवेंद्र यादव भाजपा में शामिल हो चुके हैं। सियासत की पिच पर सपा से देवेश शाक्य मैदान में है। जबकि भाजपा से सांसद राजवीर सिंह मोर्चे पर हैं। देखना यह है कि इस चुनाव में सपा अपना सूखा खत्म कर पाती है या नहीं।