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तापमान अधिक होने से पिछड़ी धान की नर्सरी की बुवाई
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मैनपुरी। तापमान अधिक होने के चलते जिले में इस बार धान की नर्सरी की बुवाई पिछड़ गई है। एक पखवाड़े से भी अधिक का समय बीतने के बाद भी किसान नर्सरी की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे धान की पौध की रोपाई भी देर से होगी। इसे लेकर किसान चिंतित हैं। विशेषज्ञ भी फिलहाल तापमान कम होने तक इंतजार करने की बात कह रहे हैं।
जिले में धान की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान धान की बुवाई करते हैं। मानक के अनुसार जिले में एक जून से धान की नर्सरी की बुवाई शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी धान की नर्सरी की बुवाई शुरू नहीं हो सकी है। दरअसल वर्तमान में औसत तापमान 38 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है।
धान की नर्सरी की बुवाई के लिए ये तापमान अधिक है। वहीं बारिश न होने और तेज धूप के कारण भी नर्सरी की बुवाई में समस्या है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मिश्रा ने बताया कि अगर तेज धूप के दौरान नर्सरी की बुवाई की जाए तो दाना खराब हो जाता है और अंकुरण प्रभावित होता है। इसके चलते किसान परेशान हैं। वैज्ञानिक डॉ. मिश्रा के अनुसार देरी से धान की रोपाई पर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहेगी। अब बस बारिश का ही इंतजार है।
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ये तापमान है धान के लिए उपयुक्त
मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र वर्मा के अनुसार धान की फसल के लिए न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। इसी तापमान के बीच धान की नर्सरी का अंकुरण बेहतर होने के साथ ही प्रगति भी बेहतर होती है।
सूखी नहर भी बनी परेशानी
जिले में निचली गंगा नहर बेवर ब्रांच नहर से कुरावली, सुल्तानगंज, बेवर और किशनी क्षेत्र में फसलों की सिंचाई की जाती है। वर्तमान में इस नहर में पानी नहीं है। बीच में कुछ दिन के लिए नहर में पानी छोड़ा गया था, जो बाद में बंद कर दिया गया। इसके चलते भी किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान कई बार नहर में पानी छोड़े जाने की मांग कर चुके हैं।
धान की नर्सरी की बुवाई के लिए तापमान अधिक है। ऐसे में किसान केवल इंतजार ही कर सकते हैं। देरी से बुवाई होने पर किसानों को नुकसान होगा। -महेश कुमार, किसान टिंडौली
हर फसल में किसानों को नुकसान ही होता है। इस बार धान की नर्सरी की बुवाई नहीं हो पा रही है। वहीं अन्य फसलों की सिंचाई में भी समस्या आ रही है। -राजेश कुमार, किसान सीतापुर
धान की नर्सरी की बुवाई के लिए इस बार तापमान अधिक है। किसानों को तापमान में गिरावट का इंतजार करना होगा। अगर अधिक तापमान पर बुवाई की जाएगी तो अंकुरण प्रभावित होगा। -डॉ. गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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जिले में धान की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान धान की बुवाई करते हैं। मानक के अनुसार जिले में एक जून से धान की नर्सरी की बुवाई शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी धान की नर्सरी की बुवाई शुरू नहीं हो सकी है। दरअसल वर्तमान में औसत तापमान 38 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है।
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धान की नर्सरी की बुवाई के लिए ये तापमान अधिक है। वहीं बारिश न होने और तेज धूप के कारण भी नर्सरी की बुवाई में समस्या है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मिश्रा ने बताया कि अगर तेज धूप के दौरान नर्सरी की बुवाई की जाए तो दाना खराब हो जाता है और अंकुरण प्रभावित होता है। इसके चलते किसान परेशान हैं। वैज्ञानिक डॉ. मिश्रा के अनुसार देरी से धान की रोपाई पर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहेगी। अब बस बारिश का ही इंतजार है।
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ये तापमान है धान के लिए उपयुक्त
मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र वर्मा के अनुसार धान की फसल के लिए न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। इसी तापमान के बीच धान की नर्सरी का अंकुरण बेहतर होने के साथ ही प्रगति भी बेहतर होती है।
सूखी नहर भी बनी परेशानी
जिले में निचली गंगा नहर बेवर ब्रांच नहर से कुरावली, सुल्तानगंज, बेवर और किशनी क्षेत्र में फसलों की सिंचाई की जाती है। वर्तमान में इस नहर में पानी नहीं है। बीच में कुछ दिन के लिए नहर में पानी छोड़ा गया था, जो बाद में बंद कर दिया गया। इसके चलते भी किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान कई बार नहर में पानी छोड़े जाने की मांग कर चुके हैं।
धान की नर्सरी की बुवाई के लिए तापमान अधिक है। ऐसे में किसान केवल इंतजार ही कर सकते हैं। देरी से बुवाई होने पर किसानों को नुकसान होगा। -महेश कुमार, किसान टिंडौली
हर फसल में किसानों को नुकसान ही होता है। इस बार धान की नर्सरी की बुवाई नहीं हो पा रही है। वहीं अन्य फसलों की सिंचाई में भी समस्या आ रही है। -राजेश कुमार, किसान सीतापुर
धान की नर्सरी की बुवाई के लिए इस बार तापमान अधिक है। किसानों को तापमान में गिरावट का इंतजार करना होगा। अगर अधिक तापमान पर बुवाई की जाएगी तो अंकुरण प्रभावित होगा। -डॉ. गगन दीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।