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Janmashtami 2024: श्रीकृष्ण जन्मभूमि में ठाकुरजी को अर्पित की सोम-चंद्रिका पोशाक, साक्षी बने हजारों भक्त
Mon, 26 Aug 2024 08:11 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 26 Aug 2024 08:11 AM IST
सार
जन्माष्टमी से पहले श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा ठाकुरजी को नवीन भव्य पोशाक एवं शृंगार अर्पित किया गया। इस परंपरा के हजारों भक्त साक्षी बने।
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पोशाक एवं शृंगार अर्पित किया गया
- फोटो : संवाद
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विस्तार
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में जन्माष्टमी से पहले रविवार को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा ठाकुरजी को नवीन भव्य पोशाक एवं शृंगार अर्पित किया गया। ढोल, नगाड़े, झांझ, मजीरों की सुमधुर ध्वनि के मध्य हजारों भक्त मंदिर की परंपरा के साक्षी बने।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि शोभायात्रा सर्वप्रथम श्रीकेशवदेव मंदिर में पहुंची। भगवान केशवदेव को पोशाक एवं शृंगार अर्पित करने के बाद मां योगमाया का पूजन कर पोशाक व शृंगार अर्पित किया गया। नाचते, झूमते, मस्ती में सराबोर भक्तजनों ने गर्भ गृह मंदिर में पोषाक अर्पित की। सोम-चंद्रिका पोशाक, रत्नजड़ित कंगन, स्वर्ण व रजत के आभूषण, पूजा पात्र आदि भागवत भवन में विराजमान राधाकृष्ण युगल सरकार को अर्पित किए।
मंत्रोच्चारण के बीच ठाकुरजी को पोशाक एवं शृंगार अर्पित करने की खुशी में भक्तजन हरिनाम संकीर्तन की धुन पर नृत्य करने लगे। इसके बाद 5251 वां जन्मोत्सव होने पर गाय की घी के दीपों को परिसर में स्थित गिरिराज महाराज के श्रीविग्रह के सन्मुख अर्पित किया।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि शोभायात्रा सर्वप्रथम श्रीकेशवदेव मंदिर में पहुंची। भगवान केशवदेव को पोशाक एवं शृंगार अर्पित करने के बाद मां योगमाया का पूजन कर पोशाक व शृंगार अर्पित किया गया। नाचते, झूमते, मस्ती में सराबोर भक्तजनों ने गर्भ गृह मंदिर में पोषाक अर्पित की। सोम-चंद्रिका पोशाक, रत्नजड़ित कंगन, स्वर्ण व रजत के आभूषण, पूजा पात्र आदि भागवत भवन में विराजमान राधाकृष्ण युगल सरकार को अर्पित किए।
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मंत्रोच्चारण के बीच ठाकुरजी को पोशाक एवं शृंगार अर्पित करने की खुशी में भक्तजन हरिनाम संकीर्तन की धुन पर नृत्य करने लगे। इसके बाद 5251 वां जन्मोत्सव होने पर गाय की घी के दीपों को परिसर में स्थित गिरिराज महाराज के श्रीविग्रह के सन्मुख अर्पित किया।
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