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शर्मनाक: देश सेवा करते हुए सैन्यकर्मी का हुआ निधन, उनके अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं मिली जमीन
Thu, 05 Dec 2024 09:14 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 05 Dec 2024 09:14 AM IST
सार
सेना के हवलदार सुरजीत सिंह गुर्जर का बीमारी से लखनऊ में निधन हो गया। वो घर परिवार से दूर देश की सेवा में लगे रहे, लेकिन उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिए जमीन तक न मिली।
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सेना के हवलदार का निधन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के सैंया क्षेत्र के रजपुरा गांव के रहने वाले सेना में हवलदार सुरजीत सिंह गुर्जर का बीमारी से लखनऊ में निधन हो गया। बुधवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। अंतिम संस्कार के लिए तहसील प्रशासन ने स्थान नहीं उपलब्ध कराया। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने दो घंटे तक सैंया-इरादत नगर मार्ग पर जाम रखा। एसडीएम खेरागढ़ ने हवलदार के नाम पर गोशाला बनाए जाने पर पशुचर की जमीन अंत्येष्टि के लिए दी। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ हवलदार का अंतिम संस्कार किया गया।
सैंया के गांव रजपुरा निवासी सुरजीत सिंह गुर्जर 14 वर्ष पूर्व सेना में भर्ती हुए थे। वे हवलदार पद पर एएमसी कोर में लखनऊ सैनिक अस्पताल में तैनात थे। वहीं तबियत बिगड़ने से उनका निधन हो गया। बुधवार की सुबह हवलदार सुरजीत सिंह का पार्थिव शरीर गांव रजपुरा पहुंचा तो परिजन बिलख पड़े। अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। इसके बाद साथ आए सैन्यकर्मी नवीन कुमार, नायब सूबेदार धर्मपाल सिंह, विवेक कुमार और परिजन अंतिम संस्कार के लिए गए।
अन्त्येष्टि स्थल को पशुचर की जमीन बताते हुए तहसील प्रशासन ने यहां अंतिम संस्कार के लिए मना किया तो ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। गुस्साए लोगों ने सैंया-इरादतगंर मार्ग पर अवरोधक डाल कर जाम लगा दिया। दो घंटे तक जाम के बाद एसडीएम खेरागढ़ संदीप कुमार यादव ने हवलदार के नाम पर गोशाला बनाए जाने पर ही यहां अंतिम संस्कार की अनुमति दी। हवलदार सुरजीत सिंह गुर्जर चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी पत्नी नैना देवी हैं। उनके कोई बच्चा नहीं है।
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पिता एवं तीन भाई खेती करते हैं। एसडीएम खेरागढ संदीप कुमार यादव ने बताया कि जहां परिजन अंतिम संस्कार के लिए जमीन का आवंटन मांग रहे हैं, वह जमीन गोचर के लिए आरक्षित है। इसलिए इस जमीन का हस्तांतरण नहीं हो सकता है। हवलदार सुरजीत सिंह को यदि शहीद का दर्जा मिलता है तो शहीद स्मारक के लिए ग्राम पंचायत की भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी।
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सैंया के गांव रजपुरा निवासी सुरजीत सिंह गुर्जर 14 वर्ष पूर्व सेना में भर्ती हुए थे। वे हवलदार पद पर एएमसी कोर में लखनऊ सैनिक अस्पताल में तैनात थे। वहीं तबियत बिगड़ने से उनका निधन हो गया। बुधवार की सुबह हवलदार सुरजीत सिंह का पार्थिव शरीर गांव रजपुरा पहुंचा तो परिजन बिलख पड़े। अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। इसके बाद साथ आए सैन्यकर्मी नवीन कुमार, नायब सूबेदार धर्मपाल सिंह, विवेक कुमार और परिजन अंतिम संस्कार के लिए गए।
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अन्त्येष्टि स्थल को पशुचर की जमीन बताते हुए तहसील प्रशासन ने यहां अंतिम संस्कार के लिए मना किया तो ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। गुस्साए लोगों ने सैंया-इरादतगंर मार्ग पर अवरोधक डाल कर जाम लगा दिया। दो घंटे तक जाम के बाद एसडीएम खेरागढ़ संदीप कुमार यादव ने हवलदार के नाम पर गोशाला बनाए जाने पर ही यहां अंतिम संस्कार की अनुमति दी। हवलदार सुरजीत सिंह गुर्जर चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी पत्नी नैना देवी हैं। उनके कोई बच्चा नहीं है।
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पिता एवं तीन भाई खेती करते हैं। एसडीएम खेरागढ संदीप कुमार यादव ने बताया कि जहां परिजन अंतिम संस्कार के लिए जमीन का आवंटन मांग रहे हैं, वह जमीन गोचर के लिए आरक्षित है। इसलिए इस जमीन का हस्तांतरण नहीं हो सकता है। हवलदार सुरजीत सिंह को यदि शहीद का दर्जा मिलता है तो शहीद स्मारक के लिए ग्राम पंचायत की भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी।