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Agra News: स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी हटाए गए, भाजपा विधायक ने लगाए थे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

Thu, 25 May 2023 01:10 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 25 May 2023 01:10 PM IST
सार

आगरा में स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी को पद से हटा दिया गया है। इन पर भाजपा विधायक ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। 

 

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smart city nodal officer in agra removed from post
आगरा स्मार्ट सिटी का कार्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी को पद से हटा दिया गया है। इन पर छावनी विधायक डॉ जीएस धर्मेश ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लोकायुक्त जांच की मांग की थी। अब इन्हें पद से हटा दिया गया है। 

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अधिशासी अभियंता आर.के सिंह स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। छावनी से भाजपा विधायक डॉ जीएस धर्मेश ने इन पर काम के दौरान भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच कराने की मांग की थी। उस समय आरके सिंह से जवाब-तलब किया गया था। 

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बी.एल गुप्ता को बनाया गया नोडल अधिकारी

हालांकि हाल ही में जांच के बाद अपर नगर आयुक्त ने आर.के सिंह पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्लीन चिट दी थी। इसे विधायक ने पूरी तरह नकार दिया था। कहा था कि वह जल्द ही इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से दोबारा मुलाकात करेंगे। अब इन्हें पद से हटा दिया गया है। इनकी जगह चीफ इंजीनियर बी.एल गुप्ता को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का नोडल अधिकारी बनाया गया है। 

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विधायक ने की विजिलेंस जांच की मांग

भाजपा विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने निर्माण कार्य व विभिन्न टेंडर प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार होने की बात कही थी। उन्होंने स्मार्ट सिटी के कार्यों में कमीशनखोरी, रिश्वत और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विजिलेंस जांच की मांग की थी।

कार्यों के सीबीआई जांच की मांग 

स्मार्ट सिटी एक प्राइवेट कंपनी है। जिसे शहर में जन सुविधाएं विकसित करने के लिए बीते सात साल में 850 करोड़ रुपये मिले। जन प्रहरी संयोजक नरोत्तम शर्मा का आरोप है कि प्रोजेक्ट के नाम पर ठेकेदार और अधिकारियों ने सरकारी धन का बंदरबांट किया है। कार्यों की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
 

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10.62 करोड़ रुपये का जुर्माना, 15 दिन का मौका

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में 50 से अधिक चौराहों व प्रमुख मार्गों पर करीब 1500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। 282 करोड़ रुपये से नगर निगम में कमांड कंट्रोल सेंटर बना। सीसीटीवी से शहर में यातायात से लेकर अपराध की निगरानी होनी थी, लेकिन, 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खराब मिले थे।

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