आगरा: एसएन मेडिकल कॉलेज में अब तक ब्लैक फंगस के 64 मरीज, तीन की निकालनी पड़ीं आंखें
एसएन मेडिकल कॉलेज में अब तक ब्लैक फंगस के 34 मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है। इनमें किसी गाल की हड्डी और जबड़े तक निकालने पड़े।
विस्तार
आगरा में कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में ब्लैक फंगस की शिकायत बढ़ गई है। बीते दस दिनों में 22 नए मरीज एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए हैं। कुल 64 मरीज भर्ती हैं, इनमें से 34 के ऑपरेशन करने पड़े हैं। तीन मरीजों की आंखें तक निकालनी पड़ीं।
ब्लैक फंगस वार्ड के प्रभारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि 20 मई को ब्लैक फंगस का पहला मामला आया था। अब तक 64 मरीज एसएन में भर्ती हो चुके हैं। बीते दस दिन से ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या में तेजी आई है। इनमें 22 मरीज भर्ती हुए। इससे पहले 15 दिन में 20 ही मरीज एसएन में भर्ती हुए थे।
अभी तक कुल 34 मरीजों की हालत गंभीर होने पर ऑपरेशन करने पड़े, इनमें से तीन की आंख निकाली गई। चार के गाल, गाल की हड्डी और जबड़ा निकाला गया। एक मरीज में संक्रमण दिमाग तक पहुंचने पर ऑपरेशन किया गया। बाकी के सायइन का ऑपरेशन किया गया। छह मरीजों की मौत हुई है।
ब्लैक फंगस के मुख्य कारण
स्टेरॉयड की ओवरडोज : सामान्य लक्षण होने या गंभीर हालत न होने पर भी स्टेरॉयड की ओवरडोज से संक्रमित मरीजों में ब्लैक फंगस की वजह रही।
जिंक-आयरन की टैबलेट : संक्रमित होने पर मरीजों ने खासतौर पर होम आइसोलेशन में रहे मरीजों ने जिंक, आयरन की दवाएं लंबे समय तक खाईं।
इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन : इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन शतप्रतिशत शुद्ध नहीं होती है। इसका फ्लो भी अधिक रहता है। आईसीयू में रहे मरीजों को इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन देने से भी फंगस हुआ।
- जैसा कि एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. विकास गुप्ता ने बताया
दो मरीजों के सायनस का किया ऑपरेशन
ब्लैक फंगस के दो मरीजों का शुक्रवार को ऑपरेेशन किया गया। इनका दूरबीन विधि से नाक के रास्ते से सायनस का ऑपरेशन हुआ है। ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों मरीजों की स्थिति में सुधार हो रहा है।