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हत्या के छह दोषियों को उम्रकैद: बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष को मारी थी गोली, 13 साल बाद आया फैसला

Thu, 23 Apr 2026 06:51 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Thu, 23 Apr 2026 06:51 PM IST
सार

हत्या के मामले में कोर्ट ने छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। किरावली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष की हत्या की गई थी। हत्याकांड में कोर्ट ने 13 साल बाद फैसला सुनाया है। 

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six Convicts Sentenced to Life Imprisonment for Murder of Former Kirawali Bar President
छह दोषियों को उम्रकैद की सजा। - फोटो : ANI

विस्तार

आगरा में जमीन विवाद में किरावली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व लोकतंत्र रक्षक सेनानी केदार सिंह की हत्या के मामले में एडीजे-1 पुष्कर उपाध्याय ने घटना के 13 साल बाद छह आरोपियों दोषी माना। उन्हें उम्रकैद के साथ कुल 3.42 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसमें मृतक के बेटे गोपाल कृष्ण और चचेरे भाई धर्मेंद्र की गवाही अहम रही।
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घटना वर्ष 6 मार्च, 2013 की है। थाना फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के गांव गोठरा निवासी केदार सिंह शाम 5 बजे तहसील किरावली से काम खत्म कर गांव के निवासी कुंवरपाल सिंह के साथ बाइक से गांव लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें बेटा गोपाल कृष्ण मिल गया। वह भी उनके पीछे बाइक पर बैठ गया। पनचक्की मोड़ के पास पहुंचे तो पीछे से दो बाइकों पर गांव के ही आरोपी नवाब, चंद्रभान और उसका भाई जवाहर, देवी सिंह, प्रीतम सिंह, धनीराम आ गए।
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बाइक में धक्का देकर केदार सिंह को गिरा दिया। गिरते ही वह भागने लगे तो आरोपियों ने घेरकर गोली मार दी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटे गोपाल कृष्ण का पीछा किया। वह मौके से भागने में सफल रहा, इससे जान बच गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से मुकदमे में नौ गवाह अदालत में पेश किए गए। अहम गवाही मृतक के बेटे गोपाल कृष्ण की रही, वह चश्मदीद था।

इन्हें सुनाई गई सजा
थाना फतेहपुर सीकरी के गांव गोठरा निवासी नवाब सिंह, जवाहर सिंह और लाखन सिंह तीनों सगे भाई, उनका भतीजा चंद्रभान सिंह, थाना अछनेरा क्षेत्र के गांव पुरामना निवासी प्रीतम सिंह और जिला मथुरा के थाना हाईवे क्षेत्र के पंडीपुर निवासी देवी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। गोठरा निवासी आरोपी दरब सिंह की मुकदमे के विचारण के दौरान मौत हो गई थी।
 
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पैरवी पर भी मान रहे थे रंजिश
केदार सिंह की हत्या से चार साल पहले गांव छोड़कर चले गए आरोपी लाखन ने वापस आकर रेकी की। उनके आने-जाने के समय के बारे में पीछा कर पता किया। उसने अपने भाइयों को बताया। तब योजना के तहत घेराबंदी का घटना को अंजाम दिया गया था। 1992 में भी आरोपी लाखन और जवाहर ने चाकू से हमला किया था। आरोपी लाखन, नवाब, चंद्रभान और जवाहर के भाई चंदन की भी 2011 में हत्या हुई थी। विवाद के चलते आरोपियों के भाई चंदन सिंह की भी 2011 में हत्या कर दी गई थी। चंदन की हत्या के आरोपियों के मुकदमे की पैरवी अधिवक्ता केदार सिंह कर रहे थे। इस बात से आरोपी उनसे रंजिश मानने लगे थे।
 
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