सॉल्वर गैंग का सरगना सहित छह गिरफ्तारः फिंगर प्रिंट बनाकर पास कराते थे परीक्षाएं, मशीनें, लैपटॉप बरामद
आगरा में पुलिस ने सॉल्वर गैंग का खुलासा किया है। सरगना सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी छात्र-छात्राओं के नकली फिंगर प्रिंट बनाते थे फिर उसकी जगह पर सॉल्वर बैठाते थे।
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आगरा की सैंया थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय सॉल्वर गिरोह का खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने सरगना समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो सॉल्वर भी शामिल हैं। यह गिरोह प्रतियोगी परीक्षा में बैठने वाले युवाओं से पैसे की डील करके उन्हें पास कराने का ठेका लेता था। कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे, बैंक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नकली फिंगर प्रिंट बनाना और अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर को बैठाकर परीक्षा पास कराता था।
डीसीपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि 11 जनवरी को एसएससी जीडी की परीक्षा हुई थी। ग्राम भड़ीरा, थाना गोंडा अलीगढ़ निवासी पुष्पेंद्र ने भी फॉर्म भरा था। उसकी जगह परीक्षा में सॉल्वर बैठा था। पुष्पेंद्र से परीक्षा पास कराने के लिए एक लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। 80 हजार रुपये पहले ले लिए गए थे। शेष बीस हजार रुपये उसे देने थे। उसका प्रवेश पत्र और प्रमाण पत्र गिरोह के पास जमा था। जानकारी के बाद सैंया थाना पुलिस ने पुष्पेंद्र सहित छह आरोपियों को पकड़ा। पुष्पेंद्र की जगह परीक्षा में इगलास अलीगढ़ निवासी भगत सिंह बैठा था।
बताया कि पुलिस ने अलीगढ़ निवासी दीपू उर्फ द्रिवेंद्र, पवन कुमार, भगत सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, धर्मेंद्र उर्फ डीके को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। दीपू पूर्व में कोचिंग सेंटर चलाता था। उसने पूछताछ में बताया कि वे उन अभ्यर्थियों की तलाश में रहता है जिन्हें सरकारी नौकरी चाहिए। खुद कोई परीक्षा पास नहीं कर सकते। ऐसे अभ्यर्थियों की जगह वह परीक्षा में सॉल्वर बैठाता है। सॉल्वर भी कोचिंग सेंटरों में जाकर चुनता है। होनहार विद्यार्थियों को रुपयों का लालच देकर जाल में फंसाता था। परीक्षा देने के बदले उन्हें रकम देता था। वर्तमान में भगत सिंह और कुलदीप सॉल्वर का काम कर रहे थे। पवन और धर्मेंद्र की मदद से वह असली अभ्यर्थी का अंगूठे की निशानी तैयार करता था।
ऐसे बनाते हैं फिंगर प्रिंट
दीपू ने थाने में फिंगर प्रिंट तैयार करने का डेमो दिया। पुलिस से ज्योमेक्ट्री बॉक्स, ग्लू स्टिक, पोटाश, फेविकोल, कलर आदि सामान मंगाया। ग्लू स्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े किए। उन्हें ज्योमेक्ट्री बॉक्स में डाला। लाइटर की मदद से नीचे से ज्योमेक्ट्री बॉक्स को गर्म किया। ग्लू पिघल गया। उसके बाद उसमें फेविकोल, पोटाश को मिलाया। रंग डाला, ताकि फिंगर प्रिंट का रंग असली त्वचा जैसा ही आए। कुछ बूंद इत्र डाला, ताकि फेविकोल की गंध नहीं आए। पिघले हुए मिश्रण में असली अभ्यर्थी के अंगूठे का निशान लगवाया। उसे सूखने दिया। सूखने के बाद ब्लेड की मदद से उसे निकाला। अंगूठे के निशान की एक परत तैयार हो गई। इसे सॉल्वर अपने अंगूठे पर चढ़ा लेता था। बायोमैट्रिक में पकड़ा नहीं जाता था।