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एसआईटी ने पकड़ी 36 कालेजों की जालसाजी
अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 10 May 2016 01:21 AM IST
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काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
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डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच आगे बढ़ते ही एक और बड़ी जालसाजी सामने आ गई है। इस बार खुलासा हुआ है कि 36 निजी कालेजों में हजारों बीएड अभ्यर्थियों को डिबार करने के बाद उनकी फीस हड़प ली गई। इन्हें बाद में फर्जी मार्कशीट थमा दी गई। दूसरी ओर इन कालेजों में मैनेजमेंट कोटा 15 से बढ़ाकर 50 तक कर लिया गया। इसमें करोड़ों का खेल हुआ। अब इन सभी कालेज संचालकों को आरोपी बनाया जाएगा।
2004 से 2009 के बीच हुई इस जालसाजी की एफआईआर एसआईटी पहले ही दर्ज कर चुकी है। इसमें विवि के अफसर और लिपिक आरोपी हैं। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। मामला बीएड की 25 हजार फर्जी मार्कशीट बेचने का है। इसमें 83 कालेजों के संचालक फंसे हैं। इनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। लखनऊ स्थित एसआईटी थाना में 73 के बयान हो चुके हैं।
केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सभी संचालकों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए एक ही तरकीब अपनाई। जहां भी फंस रहे थे, कह दिया, इसका आदेश तत्कालीन वीसी एएस कुकला ने दिया था। उनका देहांत हो चुका है। लेकिन जब एसआईटी ने इनके सामने फर्जीवाड़े का रिकार्ड रखकर सवाल किए तो इनके चेहरों से हवाइयां उड़ गईं। 36 कालेजों की जालसाजी सामने आ गई। जांच अभी जारी है।
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ऐसे हुआ खेल
- कालेजों को 85 फीसदी दाखिले यूनिवर्सिटी की काउंसलिंग के आधार पर देने थे, लेकिन इनमें से 35 फीसदी अभ्यर्थी मनमानी से डिबार कर दिए गए।
- मैनेजमेंट कोटा 15 फीसदी था, इसे मनमाने ढंग से बढ़ाकर 50 फीसदी तक कर लिया, मतलब कुल दाखिलों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
- काउंसलिंग के दौरान विवि में 40 हजार रुपये फीस जमा कराने वाले अभ्यर्थियों को डिबार करने के बाद उनकी फीस हड़प ली गई। बाद में उन्हें बगैर किसी आदेश के परीक्षा दिलाई गई लेकिन विवि. ने मार्कशीट जारी नहीं की तो फर्जी थमा दी गई। इसे विवि के रिकार्ड में भी दर्ज करा दिया।
एक और क्लर्क की कुर्की के आदेश
इसी प्रकरण में सीबीआई कोर्ट ने लिपिक सुनील वार्ष्णेय के घर की कुर्की के आदेश (धारा 83) कोर्ट ने जारी कर दिए हैं। इससे पहले लिपिक शैलेंद्र गुप्ता की कुर्की के आदेश हो चुके हैं। दो-तीन दिन के भीतर ही एसआईटी आदेश तामील कराने के लिए शहर में आ सकती है।
पांच लिपिक चल रहे फरार
इस प्रकरण में लिपिक रणवीर सिकरवार की गिरफ्तारी हो चुकी है। उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो गई है। शैलेंद्र और सुनील समेत पांच लिपिक फरार चल रहे हैं। इनकी तलाश में एसआईटी एक बार फिर अभियान शुरू करने जा रही है।
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2004 से 2009 के बीच हुई इस जालसाजी की एफआईआर एसआईटी पहले ही दर्ज कर चुकी है। इसमें विवि के अफसर और लिपिक आरोपी हैं। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। मामला बीएड की 25 हजार फर्जी मार्कशीट बेचने का है। इसमें 83 कालेजों के संचालक फंसे हैं। इनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। लखनऊ स्थित एसआईटी थाना में 73 के बयान हो चुके हैं।
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केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सभी संचालकों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए एक ही तरकीब अपनाई। जहां भी फंस रहे थे, कह दिया, इसका आदेश तत्कालीन वीसी एएस कुकला ने दिया था। उनका देहांत हो चुका है। लेकिन जब एसआईटी ने इनके सामने फर्जीवाड़े का रिकार्ड रखकर सवाल किए तो इनके चेहरों से हवाइयां उड़ गईं। 36 कालेजों की जालसाजी सामने आ गई। जांच अभी जारी है।
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ऐसे हुआ खेल
- कालेजों को 85 फीसदी दाखिले यूनिवर्सिटी की काउंसलिंग के आधार पर देने थे, लेकिन इनमें से 35 फीसदी अभ्यर्थी मनमानी से डिबार कर दिए गए।
- मैनेजमेंट कोटा 15 फीसदी था, इसे मनमाने ढंग से बढ़ाकर 50 फीसदी तक कर लिया, मतलब कुल दाखिलों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
- काउंसलिंग के दौरान विवि में 40 हजार रुपये फीस जमा कराने वाले अभ्यर्थियों को डिबार करने के बाद उनकी फीस हड़प ली गई। बाद में उन्हें बगैर किसी आदेश के परीक्षा दिलाई गई लेकिन विवि. ने मार्कशीट जारी नहीं की तो फर्जी थमा दी गई। इसे विवि के रिकार्ड में भी दर्ज करा दिया।
एक और क्लर्क की कुर्की के आदेश
इसी प्रकरण में सीबीआई कोर्ट ने लिपिक सुनील वार्ष्णेय के घर की कुर्की के आदेश (धारा 83) कोर्ट ने जारी कर दिए हैं। इससे पहले लिपिक शैलेंद्र गुप्ता की कुर्की के आदेश हो चुके हैं। दो-तीन दिन के भीतर ही एसआईटी आदेश तामील कराने के लिए शहर में आ सकती है।
पांच लिपिक चल रहे फरार
इस प्रकरण में लिपिक रणवीर सिकरवार की गिरफ्तारी हो चुकी है। उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो गई है। शैलेंद्र और सुनील समेत पांच लिपिक फरार चल रहे हैं। इनकी तलाश में एसआईटी एक बार फिर अभियान शुरू करने जा रही है।