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छात्रा ने की खुदकुशी: आरोपी की धमकियों से खौफजदां थीं बहनें, एक ने दे दी जान; जानें पूरा मामला

Fri, 07 Jul 2023 01:22 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 07 Jul 2023 01:22 PM IST
सार

दबंग पड़ोसियों से परेशान युवती ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए। छात्रा के परिजनों का कहना था कि यदि पुलिस समय से कार्रवाई करती तो बेटी की जान नहीं जाती। 
 

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sisters afraid of threats accused imprisoned themselves
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media

विस्तार

आगरा में पड़ोसी की दबंगई से परेशान युवती ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। चचेरी बहन ने बताया कि पड़ोसी और शोहदों के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा मेरी बहन को बुलाकर घंटों थाने में बैठाया जाता था। जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हो गए थे। बहन हर समय खौफजदां रहती थी। हम दोनों ने खुद को घर में कैद कर लिया था।

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क्या है मामला 

थाना जगदीशपुरा की अवधपुरी कालोनी निवासी 12 वीं की छात्रा ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि छेड़छाड़ के मुकदमें में साढ़े चार महीने बाद भी कोई कार्रवाई न होने से युवती आहत थी। उल्टा पुलिस युवती को बुलाकर बयान दर्ज कराने के नाम पर घंटों थाने में बैठाए रखती थी। युवती की तयेरी बहन ने बताया कि एक जनवरी को वो बाजार जा रही थीं। रास्ते में उन्हें और चचेरी बहन को दो युवकों ने रोक लिया था। एक हेलमेट और मास्क पहने था। दूसरे ने चेहरे पर साफी बांध रखी थी। एक युवक मेरा हाथ पकड़कर खींच रहा था। बहन ने विरोध किया। शोर मचाने पर राहगीर आ गए। उन्होंने बचाया। पुलिस से शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

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तीन साल पुराना है विवाद  

मृतका के ताऊ का आरोप है कि तीन साल से विवाद है। पड़ोसी ने पहले उनके गेट की तरफ अपना गेट खोला। फिर टिनशेड डालकर कार खड़ी करने लगा। विरोध पर दबंगों को बैठाने लगा। पार्क में भी पौधे लगाकर दीवार कर ली। दो साल पहले नगर निगम ने अतिक्रमण हटाया तो पड़ोसी रंजिश मानने लगा। विवेचक ने कोई कार्रवाई नहीं की। वह हर बार एक ही बात करता था कि कहीं भी शिकायत करोगे विवेचना उनके पास ही आएगी। कुछ नहीं होगा। इससे पड़ोसी के हौसले बुलंद थे।

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राज्य महिला आयोग में शिकायत के बाद दर्ज हुआ था मुकदमा

बताया गया कि छेड़छाड़ के बाद जब परिजन थाने रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने उनकी शिकायत पर ध्यान ही नहीं दिया। राज्य महिला आयोग में प्रार्थनापत्र देने पर मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने 7-8 बार चौकी पर बुलाया। तीन बार थाने भी गए। हर बार पुलिस घंटों बैठाने के बाद घर भेज देती थी। एक बार एसीपी से भी मिले। वो घर आए। जांच करके चले गए। मगर, कार्रवाई नहीं हुई। इससे दोनों काफी डर गई थीं। पड़ोसी परिवार घर के बाहर दबंगों को बैठाता था। डर से वो घर में कैद हो गई थीं। बाद में इसी डर में बहन ने डर से आत्महत्या कर ली। मौत के बाद पुलिस कार्रवाई कर रही है। आरोपियों को कड़ी सजा मिले। नामजद आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाए। उधर, मृतक युवती की बड़ी बहन की तबीयत खराब होने से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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पहले होती कार्रवाई तो नहीं देती बहन जान

परिजन का आरोप है कि चौकी प्रभारी ने साढ़े चार महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़िता के बयान तक दर्ज नहीं किए। एसीपी और थाना प्रभारी ने भी ध्यान नहीं दिया। वरिष्ठ अधिकारियों को भी रिपोर्ट नहीं दी गई। आरोपियों की पहचान तक नहीं की गई। इससे पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि अगर, पुलिस पहले दिन ही सुन लेती तो बहन को जान नहीं गंवानी पड़ती।

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