श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस: सुन्नी बोर्ड के अधिवक्ता को नोटिस देने की मांग, 28 अक्तूबर को होगी सुनवाई
श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह विवाद में सोमवार को चार अलग-अलग मामलों में अदालतों में सुनवाई हुई। चारों ही मामलों में अदालतों में केस की अगली सुनवाई के लिए अलग-अलग तारीखें दी गईं हैं। सोमवार को कचहरी में मामलों को लेकर सुबह से ही गहमागहमी का माहौल रहा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस के पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह और राजेंद्र माहेश्वरी द्वारा दाखिल किए गए वाद में केस के स्थायित्व संबंधी निर्णय के खिलाफ जिला जज की अदालत में सुनवाई हुई। अधिवक्ता राजेंद्र माहेश्वरी ने प्रार्थना पत्र दिया, उन्होंने जिला जज राजीव भारती से मांग की है कि सुन्नी सेंटल वक्फ बोर्ड के स्थानीय अधिवक्ता जीपी निगम को केस से संबंधित नोटिस प्राप्त करा दिए जाएं।
उन्होंने अदालत को बताया कि इसके चलते केस की सुनवाई नहीं हो पा रही है। अधिवक्ता ने बताया कि जिला जज द्वारा प्रार्थना पत्र के आदेश को रिजर्व कर लिया गया है। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया अगली सुनवाई के लिए 28 अक्तूबर की तारीख तय की गई है । वहीं, विपक्षी शाही ईदगाह के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि पक्षकार केस को टालने की गरज से हर दफा नया प्रार्थना पत्र अदालत में दे रहे हैं।
अखिल भारत हिंदू महासभा ने भी किया दावा
अखिल भारत हिंदू महासभा के पदाधिकारियों द्वारा श्री कृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण में एक के बाद एक दावे किए जा रहे हैं। सर्वप्रथम राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने फिर महासचिव अवधेश त्रिपाठी और अब प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी द्वारा श्री कृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण में वाद दाखिल किया है। यह वाद उन्होंने दो सितंबर 2021 में दायर किया था। पैरवी में जिला जज राजीव भारती की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। उन्होंने केस को सिविल जज सीनियर डिवीजन द्वितीय की अदालत से सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम की अदालत में मंगाए जाने की मांग की है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने वाद में श्री कृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन पर दावा किया है और शाही ईदगाह को अवैध बताते हुए उसे हटाने की मांग की है। अधिवक्ता गोपाल खंडेलवाल ने बताया कि सभी केस की सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम की अदालत में चल रही है, इसलिए इस वाद को भी सिविल जज सीनियर डिवीजन द्वितीय अनुपमा सिंह की अदालत से सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम ज्योति सिंह की अदालत ने स्थानांतरित कर दिया जाए। प्रार्थना पत्र पर क्या निर्णय हुआ, इसकी जानकारी मंगलवार को हो सकेगी। संवाद
औरंगजेब ने 16 वीं शताब्दी में अपनी जमीन पर कराया था निर्माण
श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण में मनीष यादव द्वारा किए गए दावे में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में शाही ईदगाह के सचिव तनवीर अहमद की और से केस के स्थायित्व 7 रूल 11 के मुद्दे पर बहस की। उन्होंने अदालत को बताया कि शाही ईदगाह का निर्माण औरंगजेब ने 16 वीं शताब्दी में कराया था। उस समय इस स्थान पर कोई मंदिर नहीं था। अपनी जमीन पर ईदगाह का निर्माण कराया गया था।
अधिवक्ता नीरज शर्मा ने बताया कि पक्षकार द्वारा जिस 13.37 एकड़ जमीन पर दावा किया जा रहा है, उस जमीन की लोकेशन तक ठीक ढंग से नहीं दी गई है। दावे के हिसाब से जो चारों सीमाएं खोली गई हैं वह भी ईदगाह से मिलान नहीं होती हैं। करीब डेढ़ घंटे तक चली बहस में अदालत में मुस्लिम पक्ष वर्ष 1991 में तैयार किए गए पूजा स्थल अधिनियम पर भी अपना पक्ष रखा। बताया कि इस अधिनियम के तहत दावा अदालत में चलने योग्य नहीं है। सचिव तनवीर अहमद ने बताया कि बहस जारी है। अदालत ने 12 अक्तूबर की तारीख लगाई है।
अधिवक्ता शैलेंद्र को अदालत ने दिया अंतिम अवसर
लखनऊ हाईकोर्ट बेंच के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह के वाद में उनकी ओर से अदालत में कोई भी हाजिर नहीं हुआ। इसके चलते अदालत ने उन्हें अंतिम अवसर प्रदान किया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन प्रथम की अदालत में श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन पर दावा किया गया है। इसी प्रकार का वाद उनके द्वारा जिला जज की अदालत में भी किया गया था। इसकी सुनवाई एडीजे सप्तम की अदालत में चल रही है।
पक्षकार के केस की पैरवी के लिए अदालत में हाजिर न होने के कारण अदालत ने इसे खारिज कर दिया। सोमवार को अदालत ने अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह को अंतिम अवसर दिया गया है। विपक्षी शाही ईदगाह के सचिव तनवीर अहमद ने बताया कि अदालत ने अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह को अंतिम अवसर प्रदान किया गया है। अदालत ने अगली सुनवाई की 21 अक्तूबर की तारीख तय की है।