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गुजरात से 1200 श्रमिक स्पेशल ट्रेन से पहुंचे आगरा, घर की राह देख भर आईं आंखें
Sun, 10 May 2020 04:00 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 10 May 2020 04:00 PM IST
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स्टेशन पर की गई स्क्रीनिंग
- फोटो : अमर उजाला
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श्रमिक स्पेशल ट्रेन से 1200 से अधिक श्रमिक गुजरात के साबरमती से रविवार दोपहर को आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंचे। इनमें 900 से अधिक लोग आगरा और आसपास के रहने वाले हैं। स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद उन्हें रोडवेज की 80 बसों से भेजा गया।
साबरमती से श्रमिक स्पेशल ट्रेन दोपहर एक बजे आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंची। इस ट्रेन की 24 बोगियों में 1200 से ज्यादा श्रमिक आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंचे। श्रमिकों की व्यवस्था के लिए एडीएम प्रोटोकाल योगेंद्र कुमार, सीनियर डीसीएम आशुतोष सिंह, डीसीएम एसके श्रीवास्तव, स्टेशन डायरेक्टर एनपी सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
स्टेशन पर उतरने के बाद घर की राह देख इन लोगों की आंखें भर आईं। ट्रेन में श्रमिकों के अलावा गुजरात में फंसे अन्य लोग भी शामिल थे। रोडवेज ने यहां 60 बसें भेजी थीं, लेकिन ट्रेन में मैनपुरी, एटा, फिरोजाबाद के मजदूरों को भेजने के लिए 20 अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई।
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साबरमती से श्रमिक स्पेशल ट्रेन दोपहर एक बजे आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंची। इस ट्रेन की 24 बोगियों में 1200 से ज्यादा श्रमिक आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंचे। श्रमिकों की व्यवस्था के लिए एडीएम प्रोटोकाल योगेंद्र कुमार, सीनियर डीसीएम आशुतोष सिंह, डीसीएम एसके श्रीवास्तव, स्टेशन डायरेक्टर एनपी सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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स्टेशन पर उतरने के बाद घर की राह देख इन लोगों की आंखें भर आईं। ट्रेन में श्रमिकों के अलावा गुजरात में फंसे अन्य लोग भी शामिल थे। रोडवेज ने यहां 60 बसें भेजी थीं, लेकिन ट्रेन में मैनपुरी, एटा, फिरोजाबाद के मजदूरों को भेजने के लिए 20 अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई।
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अब घर लौटने पर राहत मिली
अहमदाबाद और आसपास के जिलों में रहने वाले कई लोग ऐसे भी थे, जोकि अपनी रिश्तेदारी में गए थे, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण फंस गए। काम धंधा बंद होने के कारण रिश्तेदार के लिए भी मेहमान बोझ बन गए थे। ट्रेन से आए ऐसे लोगों का कहना था कि घर में भूखे रह लेंगे मगर रिश्तेदार के यहां कब तक बोझ बने रहते।
अपने घर आ गए, इसका सुकून है
पिनाहट के अशोक कुमार ने बताया कि किसी तरह 45 दिन गुजारने के बाद अपने घर पहुंच गए। सरकार ने देर से ही हमारी सुनवाई कर ली। अब अपने गांव में रहेंगे। इस बीमारी के ठीक होने के बाद भी गांव से लौटने का इरादा नहीं है।
अब परदेस में नहीं लौटेंगे
किरावली के राजकुमार ने कहा कि अपने जिले में आने की खुशी ही बहुत है। परदेस में कोई लंबे समय तक गुजारा नहीं कर सकता है। अब किसी तरह यहां पहुंच गए हैं। गांव जाकर खेती करेंगे, मजदूरी करेंगे मगर परदेस में नहीं रहेंगे।
अपने घर आ गए, इसका सुकून है
पिनाहट के अशोक कुमार ने बताया कि किसी तरह 45 दिन गुजारने के बाद अपने घर पहुंच गए। सरकार ने देर से ही हमारी सुनवाई कर ली। अब अपने गांव में रहेंगे। इस बीमारी के ठीक होने के बाद भी गांव से लौटने का इरादा नहीं है।
अब परदेस में नहीं लौटेंगे
किरावली के राजकुमार ने कहा कि अपने जिले में आने की खुशी ही बहुत है। परदेस में कोई लंबे समय तक गुजारा नहीं कर सकता है। अब किसी तरह यहां पहुंच गए हैं। गांव जाकर खेती करेंगे, मजदूरी करेंगे मगर परदेस में नहीं रहेंगे।
रिश्तेदारी में बिताने पड़े 45 दिन
मैनपुरी की कुसुम देवी ने कहा कि अपनी रिश्तेदारी में अहमदाबाद गए थे, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण फंस गए। जब मालूम हुआ कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन आगरा जा रही है तो इसमें आ गए। किसी भी रिश्तेदार के यहां कितने दिन बोझ बनकर रहा जा सकता है।
मां का देहांत हो गया, चेहरा तक नहीं देखा
फर्रुखाबाद की रेवती देवी ने कहा कि 20 अप्रैल को मां का देहांत हो गया, लेकिन आखिरी बार मां का चेहरा नहीं देख पाए। यह दुख अब जिंदगी भर सताएगा। रिश्तेदार के यहां शादी में गए थे, लेकिन क्या मालूम था कि इतना लंबा समय रिश्तेदार के यहां गुजराना पड़ जाएगा।
मां का देहांत हो गया, चेहरा तक नहीं देखा
फर्रुखाबाद की रेवती देवी ने कहा कि 20 अप्रैल को मां का देहांत हो गया, लेकिन आखिरी बार मां का चेहरा नहीं देख पाए। यह दुख अब जिंदगी भर सताएगा। रिश्तेदार के यहां शादी में गए थे, लेकिन क्या मालूम था कि इतना लंबा समय रिश्तेदार के यहां गुजराना पड़ जाएगा।