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आगरा: तेजाबी हमले भी नहीं झुलसा सके 'अपराजिताओं' का हौसला, आत्मविश्वास से बनीं आत्मनिर्भर

Wed, 16 Feb 2022 06:18 PM IST
मुकेश कुमार सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला आगरा
सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 16 Feb 2022 06:18 PM IST
सार

तेजाबी हमला भी ताजनगरी की 'अपराजिताओं' के हौसले नहीं झुलसा सका। किसी सिरफिरे ने चेहरे पर तेजाब फेंक दिया, सोचा कि इनकी जिंदगी की डगर बदल देगा। शरीर झुलसा लेकिन हौसला नहीं। जिंदगी आगे बढ़ी, वह आत्मविश्वास से भरी हुईं और आत्मनिर्भर हैं। 

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शीरोज कैफे में काम करतीं एसिड अटैक सर्वाइवर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा का शीरोज कैफे एसिड अटैक सर्वाइवर की जीवटता का प्रतीक बन गया है। यहां अब एसिड अटैक सर्वाइवर के हाथों से बने बेकरी प्रोडक्ट भी मिलेंगे। कैफे के संचालन में योगदान दे रहीं एसिड अटैक सर्वाइवर रूपा बोलीं कि मेरे साथ जो हुआ, उसे भूल जाना चाहती हूं। अब मेरी जिंदगी में हर दिन खास है। मैं आत्मनिर्भर हूं। मैं और मेरी बहनें हाथ से तैयार बेकरी उत्पाद पर्यटकों को खिलाएंगे। हमने कई तरह के बेकरी उत्पाद तैयार किए हैं।

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रोजगार से मिल रही खुशी 
शीरोज कैफे के जनसंपर्क अधिकारी अजय तोमर ने बताया कि बेकरी की पूरी जिम्मेदारी एसिड अटैक सर्वाइवर को देने का मकसद उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। रोजगार मिलने से उन्हें एक अलग खुशी मिलती है। अभी तक एसिड अटैक सर्वाइवर सर्व करने का काम करती थीं। अब उनके हाथ की बनी बेकरी देश-विदेश के पर्यटक खा सकेंगे। 
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मैं आत्मनिर्भर हूं- रूकैया
एसिड अटैक सर्वाइवर रूकैया ने कहा कि हमारे हाथों से बने सामान का स्वाद पर्यटक चखेंगे। जीवन में कुछ दिन ऐसे आए, जब काफी टूटी। लेकिन कैफे में काम ने फिर मुझे नया हौसला दिया है। मैं आत्मनिर्भर हूं। 
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आत्मविश्वास जागा है- गीता
एसिड अटैक सर्वाइवर गीता ने कहा कि जीवन में ऐसे भी दिन आए, जब मैं यह सोचकर परेशान रहती थी कि मेरा क्या होगा। आज मेरे में आत्मविश्वास है। जो कुछ हुआ उसे भूल जाना चाहती हूं। मेरा मन सिर्फ काम में लगा है। 

हमें वक्त से लड़ना आता है- डौली
डौली बोलीं कि हमें वक्त से लड़ना आता है। इसलिए हमारा जोश आज भी पहले जैसा है। मधु ने कहा कि वह पुराने दिनों को या अपने साथ हुई घटना को याद नहीं करना चाहतीं। कुछ बुरे दिन आए लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा सके।
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