बेबर। शहीद मेला इस वर्ष वर्चुअल स्वरूप में अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। कार्यक्रमों की श्रंखला में मंगलवार को सुरजीत शाक्य द्वारा देश भक्ति व अन्य गीतों के साथ लाइव कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि शहीद मेला शहीदों की स्मृतियों को संजोने का एक संकल्प है।
कार्यक्रम की शुभारंभ शहीदों की याद में हर वर्ष लगेंगे मेले गीत से किया गया। बच्चों को कैसे देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत किया जाए, उन तक शहीदों के विचार कैसे पहुंचाए जा सके और देश की आने वाली पीढ़ी देशभक्त बने इससे संबंधित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संचालन मनोज शाक्य ने किया। गोष्ठी में पूर्व प्रधानाचार्य ब्रिजविलास दीक्षित ने कहा कि मैनपुरी अट्ठारह सौ सत्तावन से ही क्रांतिकारियों का प्रमुख गढ़ रही है। जहां 1857 में महाराजा तेज सिंह ने मैनपुरी जनपद से अंग्रेजों को खदेड़ दिया था और वह कई महीने मैनपुरी की सीमाओं में प्रवेश न कर सके। सेनानी वंशज अरविंद आर्या ने कहा कि बेवर में अगस्त 1942 में छात्रों के साथ शुरू हुआ आंदोलन सारे नगर का आंदोलन बन गया। जिसमें 14 अगस्त को तीन लोग शहीद हुए। विद्यार्थी कृष्ण कुमार जिनकी आयु मात्र 14 वर्ष थी, जमुना प्रसाद त्रिपाठी और सीताराम गुप्त ने शहादत पाई पाई। गोष्ठी में इंद्रपाल सिंह यादव, सुरजीत गौड़, राजीव गुप्ता , आशुतोष त्रिपाठी, प्रमोद पाल, सुरजीत शाक्य, सत्यार्थी आदि ने विचार व्यक्त किये। संचालन प्रमोद पाल ने किया।