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मर्यादा खतरे में है अब रहा नहीं जाता...
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27एमएनपी-41-नगर पालिका में गणतंत्र दिवस की संध्या पर आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करती कवयित्री
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर रविवार शाम नगर पालिका परिषद और किशनी में कवि सम्मेलन हुआ।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ डीएम महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी अजय कुमार पांडेय ने किया। यहां शिकोहाबाद से आई कवयित्री अपराजिता सिंह ने मां का दामन दुखों से भरुंगी नहीं, मैं हूं अपराजिता मैं डरूंगी नहीं कविता सुनाई। आगरा से आई डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने मर्यादा खतरे में है अब रहा नहीं जाता, हे राम ये दर्द हरो अब सहा नहीं जाता...कविता पढ़ी। जयपुर से आए अब्दुल गफ्फार ने गाय हमारी माता है हम उसे नहीं भटकने देंगे, सीस भले कट जाए, लेकिन गाय नहीं कटने देंगे...पढ़ी। संचालन कर रहे कवि सतीश मधुप ने कर सोलह शृंगार रहूंगी ईश्वर यही दुआ करके, अमर हुए सैनिक की पत्नी विधवा नहीं हुआ करती..। यहां कवि सम्मेलन में व्यंग कवि हरीश चतुर्वेदी व मुन्ना बेहतरी ने लोगों को खूब हंसाया। यहां चेयरमैन मनोरमा देवी, लक्ष्मण गुप्ता, ईओ लालचंद भारती, बीएसए विजय प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
किशनी तहसील परिसर में कवि सम्मेलन का शुभारंभ फतेहगढ़ से आईं 15 वर्षीय कवयित्री स्मृति अग्निहोत्री ने सरस्वती वंदना के साथ किया। अलीगढ़ से आए मणि मधुकर मूसल ने हास्य रस की कविताओं से लोगों को खूब हंसाया। लखीमपुर खीरी से आई रंजना सिंह हया ने कहा कि बहते दरिया के रुख को मोड़ने की मत सोचो, कोरी चादर है इसको ओढ़ने की मत सोचो...। काका हाथरसी की धरती हाथरस से आए हास्य रस के हस्ताक्षर पदम अलबेला ने कहा कि सजधज के गोरी चली लेकर हरि का नाम, आशा की थी राम की मिल गए आशाराम..। बदन सिंह मस्ताना ने आदमी तू आदमी से प्यार करना सीख ले, धूल भी चंदन समझ स्वीकार करना सीख ले...। यहां ओमप्रकाश शुक्ल, बलराम श्रीवास्तव, मुन्नालाल, सौरभ आदि लोग मौजूद रहे। संचालन डॉ. कुमार मनोज ने किया। सम्मेलन में एसडीएम रामसकल मौर्य, तहसीलदार मनोजकुमार राय, चेयरमैन अनिल मिश्रा, नायब अनुभव चंद्रा आदि मौजूद रहे।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ डीएम महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी अजय कुमार पांडेय ने किया। यहां शिकोहाबाद से आई कवयित्री अपराजिता सिंह ने मां का दामन दुखों से भरुंगी नहीं, मैं हूं अपराजिता मैं डरूंगी नहीं कविता सुनाई। आगरा से आई डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने मर्यादा खतरे में है अब रहा नहीं जाता, हे राम ये दर्द हरो अब सहा नहीं जाता...कविता पढ़ी। जयपुर से आए अब्दुल गफ्फार ने गाय हमारी माता है हम उसे नहीं भटकने देंगे, सीस भले कट जाए, लेकिन गाय नहीं कटने देंगे...पढ़ी। संचालन कर रहे कवि सतीश मधुप ने कर सोलह शृंगार रहूंगी ईश्वर यही दुआ करके, अमर हुए सैनिक की पत्नी विधवा नहीं हुआ करती..। यहां कवि सम्मेलन में व्यंग कवि हरीश चतुर्वेदी व मुन्ना बेहतरी ने लोगों को खूब हंसाया। यहां चेयरमैन मनोरमा देवी, लक्ष्मण गुप्ता, ईओ लालचंद भारती, बीएसए विजय प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
किशनी तहसील परिसर में कवि सम्मेलन का शुभारंभ फतेहगढ़ से आईं 15 वर्षीय कवयित्री स्मृति अग्निहोत्री ने सरस्वती वंदना के साथ किया। अलीगढ़ से आए मणि मधुकर मूसल ने हास्य रस की कविताओं से लोगों को खूब हंसाया। लखीमपुर खीरी से आई रंजना सिंह हया ने कहा कि बहते दरिया के रुख को मोड़ने की मत सोचो, कोरी चादर है इसको ओढ़ने की मत सोचो...। काका हाथरसी की धरती हाथरस से आए हास्य रस के हस्ताक्षर पदम अलबेला ने कहा कि सजधज के गोरी चली लेकर हरि का नाम, आशा की थी राम की मिल गए आशाराम..। बदन सिंह मस्ताना ने आदमी तू आदमी से प्यार करना सीख ले, धूल भी चंदन समझ स्वीकार करना सीख ले...। यहां ओमप्रकाश शुक्ल, बलराम श्रीवास्तव, मुन्नालाल, सौरभ आदि लोग मौजूद रहे। संचालन डॉ. कुमार मनोज ने किया। सम्मेलन में एसडीएम रामसकल मौर्य, तहसीलदार मनोजकुमार राय, चेयरमैन अनिल मिश्रा, नायब अनुभव चंद्रा आदि मौजूद रहे।
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