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मांगलिक कार्यों में चातुर्मास का लगा ग्रहण, 147 दिन के लिए सोए देव, ये हैं देव उठने का समय
Wed, 01 Jul 2020 06:05 PM IST
आगरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 06:05 PM IST
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कासगंज अनलॉक वन में भले ही सीमित लोगों को मौजूदगी में लोगों ने वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न कर लिए हो, लेकिन अब इस साल नवंबर से पहले शादी आदि आयोजनों का मौका नहीं मिलेगा। बुधवार से देवशयनी एकादशी के साथ ही चतुर्मास लग जाएगा। इसके चलते मांगलिक कार्यक्रमों पर अब 147 दिन के लिए रोक लग जाएगी।
सनातन धर्म में शुभ लगन की तिथियों में ही विवाह संस्कार कराने की मान्यता है, लेकिन इस बार सहालग का सीजन कोरोना वायरस की भेंट चढ़ गया। लॉकडाउन की वजह से अधिंकांश लोगों ने अपने विवाह आयोजन टाल दिए। 1 जून से अनलॉक वन शुरू तो हो गया, लेकिन शुक्र अस्त की वजह से वैवाहिक आयोजन शुरू नहीं हो पाए। शुक्र उदय होने पर 9 जून से वैवाहिक कार्यक्रमों के आयोजन का दौर शुरू हुआ।
9 दिन के शुभमुहूर्त में लोगों ने सीमित आयोजन के बीच वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न कराए। अब 1 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ ही वैवाहिक आयोजन थम जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के साथ ही विवाह आयोजन शुरू हो सकेंगे। 14 दिसंबर से खरमास शुरू होने पर वैवाहिक कार्यक्रमों का दौर फिर से थम जाएगा।
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यह है मान्यता
चतुमार्स में भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाते हैं। इसके बाद देवोत्थान एकदशी पर देवों को जगाया जाता है। देवशयन के बाद मांगलिक कार्यक्रम बंद हो जाते हैं जो देव जागने के बाद ही फिर से शुरू होते हैं।
नवंबर माह की तिथियां 25,27,28,30
दिसंबर माह की तिथियां 1,2,6,7,8,9,11,13
चतुर्मास में मंागलिक कार्यक्रम नहीं होते। इस बार चतुर्मास में क्वार माह दो पड़ रहे हैं, इससे हिंदी कलेंडर के अनुसार यह चतुर्मास पांच माह के होंगे। - मुकुंद बल्लभ भट्ट, ज्योतिषाचार्य
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सनातन धर्म में शुभ लगन की तिथियों में ही विवाह संस्कार कराने की मान्यता है, लेकिन इस बार सहालग का सीजन कोरोना वायरस की भेंट चढ़ गया। लॉकडाउन की वजह से अधिंकांश लोगों ने अपने विवाह आयोजन टाल दिए। 1 जून से अनलॉक वन शुरू तो हो गया, लेकिन शुक्र अस्त की वजह से वैवाहिक आयोजन शुरू नहीं हो पाए। शुक्र उदय होने पर 9 जून से वैवाहिक कार्यक्रमों के आयोजन का दौर शुरू हुआ।
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9 दिन के शुभमुहूर्त में लोगों ने सीमित आयोजन के बीच वैवाहिक कार्यक्रम संपन्न कराए। अब 1 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ ही वैवाहिक आयोजन थम जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के साथ ही विवाह आयोजन शुरू हो सकेंगे। 14 दिसंबर से खरमास शुरू होने पर वैवाहिक कार्यक्रमों का दौर फिर से थम जाएगा।
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यह है मान्यता
चतुमार्स में भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाते हैं। इसके बाद देवोत्थान एकदशी पर देवों को जगाया जाता है। देवशयन के बाद मांगलिक कार्यक्रम बंद हो जाते हैं जो देव जागने के बाद ही फिर से शुरू होते हैं।
नवंबर माह की तिथियां 25,27,28,30
दिसंबर माह की तिथियां 1,2,6,7,8,9,11,13
चतुर्मास में मंागलिक कार्यक्रम नहीं होते। इस बार चतुर्मास में क्वार माह दो पड़ रहे हैं, इससे हिंदी कलेंडर के अनुसार यह चतुर्मास पांच माह के होंगे। - मुकुंद बल्लभ भट्ट, ज्योतिषाचार्य