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Agra College: गजब का हाल, सेमेस्टर परीक्षा पर मौखिक मंजूरी...लिखित आदेश हो गया गायब

Wed, 26 Nov 2025 09:51 AM IST
धीरेन्द्र सिंह यथार्थ मिश्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
यथार्थ मिश्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 26 Nov 2025 09:51 AM IST
सार

आगरा कॉलेज के विधि पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं सेमेस्टर प्रणाली से कराने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय स्तर पर अटका हुआ है। 
 

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Semester Exam Approved Verbally Written Order Missing Law Students in Confusion
आगरा कॉलेज Agra College - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आगरा कॉलेज के विधि पाठ्यक्रमों (बीए एलएलबी, एलएलबी और एलएलएम) की परीक्षाएं सेमेस्टर प्रणाली से कराने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय स्तर पर अटका हुआ है। स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय मौखिक निर्देश देकर सेमेस्टर पद्धति से परीक्षा कराने का संकेत तो दे चुका है, लेकिन लिखित आदेश जारी न होने से छात्र, शिक्षक और कॉलेज प्रशासन दुविधा में हैं। उनका कहना है कि जब तक लिखित आदेश नहीं जारी होगा तब तक किस प्रारूप में पाठ्यक्रम पढ़ाया जाए ये भी तय नहीं हो पा रहा है।
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बोर्ड ऑफ स्टडीज इन लॉ की बैठक 11 मार्च को आयोजित की गई। इसमें सेमेस्टर पाठ्यक्रम और सिलेबस बनाने का निर्णय दिया गया। इसके बाद फैकल्टी ऑफ लॉ की 31 मार्च की बैठक में इसे लागू करने निर्णय पारित किया गया। आगरा कॉलेज के प्रो. गौरव कौशिक ने बताया कि बैठक में फैसले के अनुसार सिलेबस भी सेमेस्टर पद्धति के अनुसार तैयार कर विश्वविद्यालय को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया था, लेकिन अब तक लिखित मंजूरी जारी नहीं की गई। लंबे समय से सेमेस्टर परीक्षाएं कराने की मांग थी जिसके बाद ही ये बैठक और मंजूरी दी गई थी। विश्वविद्यालय की सुस्त चाल से मामला लटका हुआ है और यही सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
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अंतिम चरण में प्रवेश, तैयारी का संकट
इस सत्र की प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। एलएलबी बीए एलएलबी और एलएलएम की काउंसलिंग प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। कई छात्रों ने प्रवेश भी ले लिया है और अब सिलेबस पूरा कराने की तैयारी का समय है। अब तक यह स्पष्ट ही नहीं है कि परीक्षा सेमेस्टर प्रणाली से होगी या वार्षिक प्रणाली से। प्राचार्य प्रो. सीके गौतम ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से मामला लटका हुआ है। विवि संपर्क नहीं साध पा रहा है। जब तक विश्वविद्यालय लिखित आदेश जारी नहीं करता, पढ़ाई का प्रारूप तय करना मुश्किल है। छात्रों के साल बर्बाद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई विश्वविद्यालय पहले से ही विधि पाठ्यक्रम सेमेस्टर पद्धति से चला रहे हैं, जिससे व्यवस्था पारदर्शी होती है और छात्रों को बेहतर अंक भी मिलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सेमेस्टर सिस्टम लागू हुआ तो लॉ एनईपी में भी शामिल किया जा सकेगा।
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