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Rajouri Encounter: कैप्टन शुभम गुप्ता का पार्थिव शरीर देख भड़का आक्रोश, पाकिस्तान मुर्दाबाद के लगे नारे
Fri, 24 Nov 2023 10:13 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 24 Nov 2023 10:13 PM IST
सार
आगरा के लाल का शव देख गुस्से से लोगों की आंखें लाल हो गई। आक्रोशित लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद और भारत माता की जय के नारे लगाना शुरू कर दिए।
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कैप्टन शुभम गुप्ता का पार्थिव शरीर देख भड़का आक्रोश
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के राजोरी में आतंकियों से लोहा लेते हुए देश के लिए बलिदान देने वाले आगरा के लाल शुभम गुप्ता का पार्थिव शरीर करीब पचास घंटे बाद घर पहुंचते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। आगरा के लाल के अंतिम दर्शन करते ही लोग आक्रोश में भर उठे। बलिदानी को नमन कर लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद और वंदे मातरम के नारे लगाने लगे। इससे पूरा माहौल ही देशभक्तिमय हो गया।
बुधवार की दोपहर में आगरा के कैप्टन शुभम गुप्ता राजौरी में आतंकियों से लोहा लेते बलिदान हो गए। बुधवार की रात सूचना आते ही लोग शहीद के आवास प्रतीक एंक्लेव पर जुटने लगे। जैसे ही शाम 4:10 बजे शहीद का शव द्वार पर पहुंचा अपने लाल के अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों में होड़ मच गई।
घंटेभर से अधिक समय तक पार्थिव शरीर दर्शन के लिए रखा गया। हर कोई शुभम की बहादुरी का जिक्र कर रहा था। लोगों में पाकिस्तान परस्त आतंकियों से मुठभेड़ में जवानों की शहादत पर गुस्सा भी था। लोगों को यही मानना था कि कब तक अपने जवानों का बलिदान सहेंगे, अब पाकिस्तान से आरपार की जंग हो जानी चाहिए।
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पाकिस्तान को सबक सिखाना जरूरी
कमला नगर निवासी प्रमोद सिंघल का कहना है कि शहर का 27 साल का कमांडो शहीद हो गया। ऐसे ही पांच जांबाज बलिदान हो गए। अब देश की जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मांग है कि आतंक के खिलाफ अंतिम लड़ाई लड़ी जाए।
चले एकमुश्त अभियान
शहीद के भाई नरेश चंद्र का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में अभी भी कुछ लोग आतंकियों को शरण दे रहे हैं। इनका पूर्ण खात्मा नहीं होने तक देश के जवान बलिदान होते रहेंगे। वहां से आतंकवाद के पूर्ण सफाए के लिए एकमुश्त व्यापक अभियान चलाना जरूरी हो गया है।
जब तक सूरज-चांद रहेगा शुभम तेरा नाम रहेगा
देश की रक्षा के लिए शहीद हुए शुभम से पूरे शहर का नाता जुड़ गया। उसके दर्शन करने के लिए गांव-देहात से भी लोग जुटे थे। करीब साढ़े तीन बजे एयरपोर्ट से सेना के वाहन में पार्थिव शव घर लाया गया। एयरपोर्ट से घर तक सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ लगी थी। सभी एक सुर में कैप्टन शुभम गुप्ता अमर रहे, जब तक सूरज-चांद रहेगा शुभम तेरा नाम रहेगा के नारे गूंजते रहे। आगरा से करीब 4 किमी दूर उनके पैतृक गांव कुआखेड़ा तक शवयात्रा में यही लोग नारे लगाते रहे।
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बुधवार की दोपहर में आगरा के कैप्टन शुभम गुप्ता राजौरी में आतंकियों से लोहा लेते बलिदान हो गए। बुधवार की रात सूचना आते ही लोग शहीद के आवास प्रतीक एंक्लेव पर जुटने लगे। जैसे ही शाम 4:10 बजे शहीद का शव द्वार पर पहुंचा अपने लाल के अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों में होड़ मच गई।
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घंटेभर से अधिक समय तक पार्थिव शरीर दर्शन के लिए रखा गया। हर कोई शुभम की बहादुरी का जिक्र कर रहा था। लोगों में पाकिस्तान परस्त आतंकियों से मुठभेड़ में जवानों की शहादत पर गुस्सा भी था। लोगों को यही मानना था कि कब तक अपने जवानों का बलिदान सहेंगे, अब पाकिस्तान से आरपार की जंग हो जानी चाहिए।
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पाकिस्तान को सबक सिखाना जरूरी
कमला नगर निवासी प्रमोद सिंघल का कहना है कि शहर का 27 साल का कमांडो शहीद हो गया। ऐसे ही पांच जांबाज बलिदान हो गए। अब देश की जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मांग है कि आतंक के खिलाफ अंतिम लड़ाई लड़ी जाए।
चले एकमुश्त अभियान
शहीद के भाई नरेश चंद्र का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में अभी भी कुछ लोग आतंकियों को शरण दे रहे हैं। इनका पूर्ण खात्मा नहीं होने तक देश के जवान बलिदान होते रहेंगे। वहां से आतंकवाद के पूर्ण सफाए के लिए एकमुश्त व्यापक अभियान चलाना जरूरी हो गया है।
जब तक सूरज-चांद रहेगा शुभम तेरा नाम रहेगा
देश की रक्षा के लिए शहीद हुए शुभम से पूरे शहर का नाता जुड़ गया। उसके दर्शन करने के लिए गांव-देहात से भी लोग जुटे थे। करीब साढ़े तीन बजे एयरपोर्ट से सेना के वाहन में पार्थिव शव घर लाया गया। एयरपोर्ट से घर तक सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ लगी थी। सभी एक सुर में कैप्टन शुभम गुप्ता अमर रहे, जब तक सूरज-चांद रहेगा शुभम तेरा नाम रहेगा के नारे गूंजते रहे। आगरा से करीब 4 किमी दूर उनके पैतृक गांव कुआखेड़ा तक शवयात्रा में यही लोग नारे लगाते रहे।