UP: आगरा में 120 साल के बाद बनी दूसरी रेलवे टनल, अंग्रेजों के जमाने में बनी थी पहली
आगरा सिटी स्टेशन से राजा की मंडी के बीच में ब्रिटिशकाल में सुरंग बनी थी। बेलनगंज और सेंट जोंस के पास 323 मीटर लंबी रेलवे सुरंग बनाई गई थी, जो अब रेलवे की हेरिटेज श्रेणी में है।
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यूपी मेट्रो कॉरपोरेशन ने पुराने शहर में रेलवे लाइन के लिए 350 मीटर लंबी टनल की खोदाई का एक चरण पूरा कर लिया है। आगरा में यह दूसरी रेलवे टनल होगी। इससे पहले 120 साल पहले 1903 में ब्रिटिश सरकार के दौरान आगरा सिटी रेलवे स्टेशन और राजा की मंडी रेलवे स्टेशन के बीच में बेलनगंज और सेंट जोंस के पास 323 मीटर लंबी रेलवे सुरंग बनाई गई थी, जो अब रेलवे की हेरिटेज श्रेणी में है और 120 साल के बाद अब भी इस्तेमाल हो रही है।
यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने रिकाॅर्ड 77 और फिर 48 दिनों में ही टनल बोरिंग मशीन गंगा और यमुना के जरिए आगरा फोर्ट से सुरंग खोदकर तैयार कर दी है, पर 120 साल पहले अंग्रेजी हुकूमत में सार्वजनिक परिवहन नहीं, बल्कि औद्योगिकीकरण के लिए आगरा की पहली सुरंग को खोदा गया था। 1903 में आगरा की पहली बेलनगंज टनल तैयार हुई, जिसे गुजराती मजदूरों और कर्मचारियों ने तैयार किया था। यह सुरंग रेलवे की हेरिटेज लिस्ट में मौजूद है। इन 120 सालों में इस सुरंग के ऊपर बने निर्माणों में से किसी में भी कोई समस्या सामने नहीं आई है।
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ईस्ट-वेस्ट रेलवे नेटवर्क को जोड़ती है बेलनगंज टनल
एक अप्रैल 1862 को यमुना ब्रिज स्टेशन से टूंडला तक ईस्ट इंडियन रेलवे ने नेटवर्क शुरू किया, वहीं 11 अगस्त 1873 को आगरा फोर्ट से भरतपुर तक रेलवे लाइन चालू हो गई। आगरा फोर्ट से ईस्ट बैंक तक एक जनवरी 1876 को जोड़ दिया गया। इससे ईस्ट और वेस्ट रेल नेटवर्क से आगरा पूरी तरह जुड़ गया। बेलनगंज रेलवे टनल इस नेटवर्क को जोड़ने वाला मुख्य काम था, जिसे तब फ्रेंच और ब्रिटिश इंजीनियरों के नेतृत्व में गुजरात से आए कर्मचारियों ने बनाया था।
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अंग्रेजों ने इसलिए बनवाई थी बेलनगंज टनल
वर्ष 1911 में यूनाइटेड प्राविंस आफ आगरा एंड अवध के गजेटियर में दर्ज है कि आगरा में वर्ष 1900 की शुरुआत से ही औद्योगिकीकरण शुरू हो गया था। वायसराय लार्ड कर्जन ने आगरा में उद्योग, व्यापार के प्रोत्साहन के लिए गधापाड़ा में मालगोदाम, सिटी स्टेशन, बेलनगंज में सुरंग, यमुना नदी पर स्ट्रेची ब्रिज के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। नार्थ वेस्ट प्राविंस के लेफ्टिनेंस गवर्नर रहे स्ट्रेची ने आगरा की औद्योगिक इकाइयों के उत्पादों को देश भर में पहुंचाने के लिए रेलवे नेटवर्क का इस्तेमाल किया। तब यहां जोंस मिल समेत दरी उद्योग, चमड़ा, आटा, दाल मिले, प्रिंटिंग और जूट का बड़ा काम था।
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जोंस मिल के उत्पाद पहुंचाने के लिए जरूरी थी टनल
वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना बताते हैं कि दस्तावेजों में दर्ज है कि आगरा के यमुना किनारे जीवनी मंडी से वाटरवर्क्स के बीच ए जोंस की मिलें थीं, जिनमें जोंस जिनिंग मिल, जोंस मिल, हाइड्रोलिक कॉटन प्रेस, डबल जिनिंग कंपनी प्रमुख थी। यहां 600 कर्मचारी तब काम करते थे। जोंस के अलावा 7 अन्य दूसरी जिनिंग कंपनियां थीं, जिनमें हीरालाल चुन्नीलाल जिनिंग फैक्टरी समेत 1750 कर्मचारी काम करते थे। बेलनगंज टनल बन जाने से उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत और पूर्व से पश्चिमी भारत तक जोंस की मिलों का माल रेलवे से जाने लगा। इसका फायदा यहां 3 स्टीम स्पिनिंग मिलों, कारपेट फैक्टरी, लेदर, बोन क्रशिंग मशीन, मिस्टर वेंस की जूट, ऑयल प्रेस कंपनी के साथ आटा और दाल मिलों को भी मिला।