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सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को लगाई फटकार, कहा- 4 सप्ताह में पेश करें ताज संरक्षण का विजन डॉक्यूमेंट
Thu, 14 Feb 2019 05:33 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 14 Feb 2019 05:33 PM IST
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Taj mahal
- फोटो : PTI
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ताजमहल को सदियों तक सहेजने के लिए तैयार कराए जा रहे विजन डॉक्यूमेंट को पेश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार सप्ताह का समय और दे दिया है। विजय डॉक्यूमेंट में हो रही देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार भी लगाई है।
शीर्ष अदालत ने ताजमहल के आसपास के हिस्से को हेरिटेज सिटी घोषित करने के मामले में भी आठ सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगी है, हालांकि यूपी सरकार ने यह रिपोर्ट अहमदाबाद के सेंटर ऑफ एन्वायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी में तैयार होने की बात कहते हुए 24 सप्ताह का समय मांगा था।
जस्टिस एसए बोबडे़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान विजन डॉक्यूमेंट पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई तो राज्य सरकार की एडिशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इस पर विचार चलने का तर्क दिया। इस पर पीठ ने प्रदेश सरकार को देरी के लिए कड़ी फटकार लगाई।
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शीर्ष अदालत ने ताजमहल के आसपास के हिस्से को हेरिटेज सिटी घोषित करने के मामले में भी आठ सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगी है, हालांकि यूपी सरकार ने यह रिपोर्ट अहमदाबाद के सेंटर ऑफ एन्वायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी में तैयार होने की बात कहते हुए 24 सप्ताह का समय मांगा था।
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जस्टिस एसए बोबडे़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान विजन डॉक्यूमेंट पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई तो राज्य सरकार की एडिशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इस पर विचार चलने का तर्क दिया। इस पर पीठ ने प्रदेश सरकार को देरी के लिए कड़ी फटकार लगाई।
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दिसंबर से अब तक बना न सके विजन डॉक्यूमेंट
सर्वोच्च अदालत की पीठ ने कहा कि सरकार दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) से तैयार कराए विजन डॉक्यूमेंट को न तो छिपा सकती है और न ही बदलाव कर सकती है। वह केवल सुझाव दे सकती है। पीठ ने आगरा शहर के कचरे से ताजमहल पर पड़ने वाले असर की भी जानकारी मांगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिसंबर 2017 को ताजमहल के लिए विजन डॉक्यमेंट बनाने के लिए कहा था, लेकिन 14 महीने बाद भी प्रदेश सरकार इसे तैयार नहीं करा सकी। नौकरशाही विजन डॉक्यूमेंट पेश करने के प्रति लापरवाही बरतती रही। अगस्त में इसका पहला ड्राफ्ट तैयार किया गया, जबकि अक्तूबर में दूसरा ड्राफ्ट बना।
एसपीए ने सरकारी विभागों से ताजमहल के पास कराए जाने वाले कामों के लिए जो सुझाव लिए, उन्हें दूसरे ड्राफ्ट में शामिल ही नहीं किया। पहली ड्राफ्ट रिपोर्ट और दूसरी ड्राफ्ट रिपोर्ट में एसपीए के विशेषज्ञों ने एकाएक यू टर्न ले लिया और कई ऐसे मुद्दों, जिन पर एसपीए ने आपत्ति दर्ज कराई थी, उन्हें सहज रूप में मान लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिसंबर 2017 को ताजमहल के लिए विजन डॉक्यमेंट बनाने के लिए कहा था, लेकिन 14 महीने बाद भी प्रदेश सरकार इसे तैयार नहीं करा सकी। नौकरशाही विजन डॉक्यूमेंट पेश करने के प्रति लापरवाही बरतती रही। अगस्त में इसका पहला ड्राफ्ट तैयार किया गया, जबकि अक्तूबर में दूसरा ड्राफ्ट बना।
एसपीए ने सरकारी विभागों से ताजमहल के पास कराए जाने वाले कामों के लिए जो सुझाव लिए, उन्हें दूसरे ड्राफ्ट में शामिल ही नहीं किया। पहली ड्राफ्ट रिपोर्ट और दूसरी ड्राफ्ट रिपोर्ट में एसपीए के विशेषज्ञों ने एकाएक यू टर्न ले लिया और कई ऐसे मुद्दों, जिन पर एसपीए ने आपत्ति दर्ज कराई थी, उन्हें सहज रूप में मान लिया गया।