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शिव का प्रिय मास सावन: चार सोमवार बरसाएंगे भगवान भोले की अनंत कृपा, इस बार बन रहे ज्योतिषीय संयोग
Tue, 13 Jul 2021 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 13 Jul 2021 12:08 AM IST
सार
आचार्य ने बताया कि इस वर्ष का सावन महामृत्युंजय साधना के लिए उत्तम व श्रेष्ठ है। आयुष्मान योग इस सावन को स्वास्थ्य साधना के लिए कुछ विशेष बना रहा है।
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कैलाश मंदिर में शिवलिंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भगवान शिव का प्रिय श्रावण मास 25 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। आचार्य पंडित रामचन्द्र शर्मा वैदिक, शोध निदेशक, भारद्वाज ज्योतिष व आध्यात्मिक शोध संस्थान, इंदौर ने बताया कि भोले की भक्ति का मास सावन इस वर्ष विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है। फल द्वितीया से प्रारंभ श्रावण माह का श्रीगणेश श्रवण नक्षत्र व आयुष्मान महा योग में हो रहा है।
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श्रावण कृष्ण प्रतिपदा व श्रावण शुक्ल नवमी तिथि के क्षय के साथ ही कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि की वृद्धि के चलते भोले की भक्ति का सावन 29 दिनों का है। आचार्य ने बताया कि इस वर्ष का सावन महामृत्युंजय साधना के लिए उत्तम व श्रेष्ठ है। आयुष्मान योग इस सावन को स्वास्थ्य साधना के लिए कुछ विशेष बना रहा है।
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चार सोमवार करें पूजा-अर्चना
सावन का आरम्भ 25 जुलाई रविवार को हो रहा है। वहीं समापन 22 अगस्त रविवार को रक्षाबंधन के साथ होगा। इस वर्ष बाबा के प्रिय चार सोमवार 26 जुलाई, दो, नौ अगस्त और 16 अगस्त को हैं। श्रावण माह में प्रमुख तीज-त्योहार हैं। 25 जुलाई को फल द्वितीया से अशून्य शयन व्रत का आरम्भ होगा। 27 जुलाई को संकष्ट चतुर्थी व्रत, 28 को मरुस्थली नाग पंचमी, चार अगस्त को कामदा एकादशी, पांच को प्रदोष व्रत, छह को मास शिवरात्रि, आठ को हरियाली अमावस्या, 11 को हरियाली तीज, 13 को नागपंचमी (देशा चारिय), 14 को दूर्वा चतुर्थी व्रत, 15 को तुलसी जयंती, 18 को पवित्रा एकादशी, 20 को प्रदोष व्रत और 22 अगस्त रविवार को रक्षाबंधन पर्व है।
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ऐसे करें शिव का अभिषेक
शिवजी को जलधारा विशेष प्रिय है, विविध कामनाओं की पूर्ती के लिए अलग-अलग पदार्थों से रुद्राभिषेक करने से अनंत लाभ हैं।
जलधारा से अभिषेक करने से वर्षा के साथ बाबा की असीम कृपा प्राप्त होती है।
कुशा के जल से व्याधियों का नाश होता है।
गन्ने के रस, शहद व गौ घृत से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
शिवजी को पंचामृत व गंगाजल अभिषेक करने से मनोकामना पूर्ती होती है।
गाय के दुग्ध से अभिषेक करने से वंश की वृद्धि होती है।
विविध ज्वर शांति के लिए जलधारा अभिषेक से ज्वर में लाभ होता है।
प्रमेह रोग में लाभ के लिए दुग्ध की धारा से अभिषेक करना चाहिए।
बुद्धि की जड़ता समाप्त करने के लिए शक्कर से अभिषेक करें।
सरसों के तेल से अभिषेक से शत्रु पराजित होते है।
शुद्ध शहद से तपेदिक में लाभ होता है।
इस प्रकार श्रावण मास में विविध द्रव्यों से रुद्राभिषेक के लाभ धर्मशास्त्रों में बताए गए है।
रुद्राभिषेक के साथ ही चंदन, अर्कपुष्प, बिल्वपत्र, विजया (भांग ), सुंगंधित पदार्थ, धतूरा, केसर, कपूर, सुखे मेवा का भोग और ॐ नमः शिवाय, के जप से भोले की असीम कृपा प्राप्त होती है। आप किसी भी सोमवार को विविध पूजा सामग्री चढ़ाकर भोले की भक्ति कर सकते हैं।
सोमवार शिवजी का प्रिय वार
विवाह योग्य युवक-युवतियां सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए शिव पार्वतीजी का पंचोपचार विधि से पूजा अर्चना कर पार्वतीजी को सौभाग्य वस्तु चढ़ाकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह श्रावण असाध्य रोगों, महामारी और सुख-शांति-समृद्धि की प्राप्ति के लिए कुछ विशेष है।
आयुष्मान महायोग से प्रारम्भ श्रवण मास में प्रतिदिन महामृत्युंजय जप करने से रोगों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के साथ असाध्य रोगों से मुक्ति भी प्राप्त होती है। आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि पूरे सावन मास में खरीदारी के दो दर्जन से ज्यादा मुहूर्त हैं। विशेष पर्व तिथियां, सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि, रविपुष्य, एकादशी, प्रदोष,मास शिवरात्रि आदि। उपर्युक्त मुहूर्तों में वाहन, मकान, जमीन, जायजाद आदि की खरीद में भगवान भोले की असीम कृपा प्राप्त होगी।
शिवजी को जलधारा विशेष प्रिय है, विविध कामनाओं की पूर्ती के लिए अलग-अलग पदार्थों से रुद्राभिषेक करने से अनंत लाभ हैं।
जलधारा से अभिषेक करने से वर्षा के साथ बाबा की असीम कृपा प्राप्त होती है।
कुशा के जल से व्याधियों का नाश होता है।
गन्ने के रस, शहद व गौ घृत से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
शिवजी को पंचामृत व गंगाजल अभिषेक करने से मनोकामना पूर्ती होती है।
गाय के दुग्ध से अभिषेक करने से वंश की वृद्धि होती है।
विविध ज्वर शांति के लिए जलधारा अभिषेक से ज्वर में लाभ होता है।
प्रमेह रोग में लाभ के लिए दुग्ध की धारा से अभिषेक करना चाहिए।
बुद्धि की जड़ता समाप्त करने के लिए शक्कर से अभिषेक करें।
सरसों के तेल से अभिषेक से शत्रु पराजित होते है।
शुद्ध शहद से तपेदिक में लाभ होता है।
इस प्रकार श्रावण मास में विविध द्रव्यों से रुद्राभिषेक के लाभ धर्मशास्त्रों में बताए गए है।
रुद्राभिषेक के साथ ही चंदन, अर्कपुष्प, बिल्वपत्र, विजया (भांग ), सुंगंधित पदार्थ, धतूरा, केसर, कपूर, सुखे मेवा का भोग और ॐ नमः शिवाय, के जप से भोले की असीम कृपा प्राप्त होती है। आप किसी भी सोमवार को विविध पूजा सामग्री चढ़ाकर भोले की भक्ति कर सकते हैं।
सोमवार शिवजी का प्रिय वार
विवाह योग्य युवक-युवतियां सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए शिव पार्वतीजी का पंचोपचार विधि से पूजा अर्चना कर पार्वतीजी को सौभाग्य वस्तु चढ़ाकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह श्रावण असाध्य रोगों, महामारी और सुख-शांति-समृद्धि की प्राप्ति के लिए कुछ विशेष है।
आयुष्मान महायोग से प्रारम्भ श्रवण मास में प्रतिदिन महामृत्युंजय जप करने से रोगों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के साथ असाध्य रोगों से मुक्ति भी प्राप्त होती है। आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि पूरे सावन मास में खरीदारी के दो दर्जन से ज्यादा मुहूर्त हैं। विशेष पर्व तिथियां, सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि, रविपुष्य, एकादशी, प्रदोष,मास शिवरात्रि आदि। उपर्युक्त मुहूर्तों में वाहन, मकान, जमीन, जायजाद आदि की खरीद में भगवान भोले की असीम कृपा प्राप्त होगी।