{"_id":"68870069f75bee02550b4a97","slug":"sawan-somvar-2025-lord-shiv-in-kailash-mandir-know-history-of-temple-2025-07-28","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: कैलाश मंदिर पर आस्था का सैलाब...स्वयं भगवान परशुराम ने की स्थापना, दुर्लभ हैं दो शिवलिंग के ऐसे दर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: कैलाश मंदिर पर आस्था का सैलाब...स्वयं भगवान परशुराम ने की स्थापना, दुर्लभ हैं दो शिवलिंग के ऐसे दर्शन
Mon, 28 Jul 2025 10:15 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 28 Jul 2025 10:15 AM IST
सार
श्रावण मास के तीसरे सोमवार को आगरा में कैलाश महादेव मंदिर में सुबह से ही नीलकंठ का गंगाजल से अभिषेक के लिए भीड़ उमड़ी हुई है। यहां बम भोले की गूंज सुनाई दे रही है। कांवड़ियों में गजब का उल्लास दिखाई दे रहा है।
विज्ञापन
कैलाश मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
बम-बम, हर-हर महादेव...जय शिव शंभू। कैलाश मंदिर में और आसपास यही जयकारे गूंजते रहे। भक्ति ऐसी कि कोसों दूर सोरों राजघाट से पैदल कांवड़ लाने पर भी दर्द और थकान का अहसास नहीं दिखा। रविवार-सोमवार की रात करीब 3 बजे मंगला आरती होते ही कांवड़ियों ने गंगाजल से नीलकंठ का अभिषेक किया।
सावन के तीसरे सोमवार के लिए रविवार शाम पूर्व विधायक रामप्रताप चौहान ने महाआरती कर कैलाश मेले का उद्घाटन किया। महंत ने मंत्रोच्चारण कर सभी के मंगल की कामना की। महंत सतीश गोस्वामी ने बताया कि मंदिर का पौराणिक महत्व है। भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि को महादेव से मिले शिवलिंग यहां स्थापित हैं। बाबा का विशेष शृंगार और फूलों की रंगोली सजाई गई। सोमवार को तड़के से ही कांवड़ियों ने कांवड़ चढ़ाई। अन्य भक्तों की भी भीड़ रही। कइयों ने दूध से महादेव का अभिषेक किया।
विज्ञापन
सावन के तीसरे सोमवार के लिए रविवार शाम पूर्व विधायक रामप्रताप चौहान ने महाआरती कर कैलाश मेले का उद्घाटन किया। महंत ने मंत्रोच्चारण कर सभी के मंगल की कामना की। महंत सतीश गोस्वामी ने बताया कि मंदिर का पौराणिक महत्व है। भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि को महादेव से मिले शिवलिंग यहां स्थापित हैं। बाबा का विशेष शृंगार और फूलों की रंगोली सजाई गई। सोमवार को तड़के से ही कांवड़ियों ने कांवड़ चढ़ाई। अन्य भक्तों की भी भीड़ रही। कइयों ने दूध से महादेव का अभिषेक किया।
विज्ञापन
सजे झूले और स्टॉल, उमड़ी भीड़
कैलाश मेला 5 किमी की दूरी तक सजा है। इसके लिए गुरुद्वारा से ही भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। कई तरह के झूले, खाने की स्टॉल, खिलौनों की दुकान समेत अन्य स्टॉल लगी हैं। भजन और गीतों के लिए साउंड सिस्टम भी लगाए हैं। कई जगह भक्तों के लिए भंडारे भी लगे हैं। मेले की पूर्व संध्या से ही दूरदराज से लोग मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
कैलाश मेला 5 किमी की दूरी तक सजा है। इसके लिए गुरुद्वारा से ही भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। कई तरह के झूले, खाने की स्टॉल, खिलौनों की दुकान समेत अन्य स्टॉल लगी हैं। भजन और गीतों के लिए साउंड सिस्टम भी लगाए हैं। कई जगह भक्तों के लिए भंडारे भी लगे हैं। मेले की पूर्व संध्या से ही दूरदराज से लोग मेले का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
मनोकामना के लिए लाए कांवड़
भक्ति और श्रद्धा के लिए कोई तर्क नहीं। हजारों की संख्या में सोरों से पैदल कांवड़ लेकर भक्त मंदिरों में पहुंचे। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। किसी ने बच्चे-परिवार की भलाई तो किसी ने गुप्त मनोकामना के लिए महादेव का जलाभिषेक किया। कई ऐसे भी भक्त रहे जो बीमारी से दूर रखने की भी कामना के लिए गंगाजल लाए।
भक्ति और श्रद्धा के लिए कोई तर्क नहीं। हजारों की संख्या में सोरों से पैदल कांवड़ लेकर भक्त मंदिरों में पहुंचे। इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। किसी ने बच्चे-परिवार की भलाई तो किसी ने गुप्त मनोकामना के लिए महादेव का जलाभिषेक किया। कई ऐसे भी भक्त रहे जो बीमारी से दूर रखने की भी कामना के लिए गंगाजल लाए।
105 लीटर की कांवड़ से जलाभिषेक
कांवड़ की टोली के सदस्य अंकित कुमार ने बताया कि सोराें से 105 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर आ रहे हैं। बीते कई वर्षों से ये क्रम चल रहा है। परिवार की भलाई और बिगड़े काम बनाने की मनोकामना है।
कांवड़ की टोली के सदस्य अंकित कुमार ने बताया कि सोराें से 105 लीटर गंगाजल की कांवड़ लेकर आ रहे हैं। बीते कई वर्षों से ये क्रम चल रहा है। परिवार की भलाई और बिगड़े काम बनाने की मनोकामना है।
भोले बाबा की कृपा से बढ़ रहे कदम
ताजगंज के सुमित कुमार ने बताया कि 71 लीटर वजनी कांवड़ सोरों से पैदल लेकर आ रहे हैं। इसमें 10-12 सदस्य हैं। भोले के जयकारे-भक्ति के आगे भार का अहसास नहीं हो रहा। उनकी कृपा से ही मंदिर की ओर कदम बढ़ते जा रहे हैं।
ताजगंज के सुमित कुमार ने बताया कि 71 लीटर वजनी कांवड़ सोरों से पैदल लेकर आ रहे हैं। इसमें 10-12 सदस्य हैं। भोले के जयकारे-भक्ति के आगे भार का अहसास नहीं हो रहा। उनकी कृपा से ही मंदिर की ओर कदम बढ़ते जा रहे हैं।