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Sawan 2024: भगवान भोले का 800 साल पुराना मंदिर, पृथ्वीराज चौहान ने कराया था निर्माण; अब हाल बेहाल

Fri, 12 Jul 2024 10:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 12 Jul 2024 10:07 AM IST
सार

आगरा में 800 साल पुराने पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में अव्यवस्थाओं की भरमार है। टिनशेड टूटा पड़ा है, तो वहीं गंदगी से दुर्गंध फैल रही है।
 

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Sawan 2024 Lots of chaos in Prithvinath Mahadev Temple
पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में करीब 800 साल पुराने पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। मुख्य परिसर में फर्श की टिनशेड टूटी है। जलनिकासी के लिए बनी नाली चोक है। मंदिर के पिछले हिस्से में गंदगी की वजह से दुर्गंध फैल रही है। सावन के चौथे सोमवार पर लगने वाले मेले की व्यवस्था के लिए मंदिर कमेटी लगी है। मगर, बजट नहीं होने की वजह से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई को है। जनपद के चारों कोनों में एक पर राजेश्वर महादेव, दूसरे पर बल्केश्वर, तीसरे पर कैलाश और चौथे पर पृथ्वीनाथ मंदिर है। इन मंदिरों में सावन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मंदिरों में विशेष फूलबंगला सजता है। महाआरती होती है। पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर शाहगंज क्षेत्र में है। सावन के सोमवार को भगवान भोले शंकर के विशेष दर्शन होते हैं। बड़ी संख्या में लोग भस्म आरती के दर्शन करते हैं। चौथे सोमवार पर मंदिर परिसर व आसपास मेला लगाया जाता है।
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प्रशासन से नहीं मिली मदद
महंत पंडित अजय राजौरिया ने बताया कि 800 साल पुराने मंदिर के लिए प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिलती है। मंदिर में सभी काम कमेटी से ही कराए जाते हैं। पूर्व में जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया था। एक टीम ने आकर सर्वे भी किया। मगर, टीम वापस नहीं आई। इससे मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं हो पाया।

 

पृथ्वीराज चौहान को मिला था शिवलिंग
महंत बताते हैं कि पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर 800 साल पुराना है। एक बार पृथ्वीराज चौहान मंदिर के पास से गुजर रहे थे। उन्होंने मंदिर के पास जंगल में अपना घोड़ा बांध दिया। मगर, वह कुछ ही देर में खुल गया। इस पर फिर से बांध दिया। मगर, वह फिर से खुल गया। कई बार कोशिश करने पर भी ऐसा ही हुआ। तलाश करते समय पृथ्वीराज चौहान को शिवलिंग मिला। उन्होंने शिवलिंग को उखाड़ने की कोशिश की। मगर, काफी खुदाई के बाद भी छोर नहीं मिला। इस पर उन्होंने भगवान की पूजा की। मंदिर का निर्माण कराया। तब से ही मंदिर का नाम भी पृथ्वीनाथ मंदिर पड़ गया।

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नाली चोक, पिछले हिस्से में गंदगी
मंदिर में चढ़ाए गए जल और दूध को बाहर निकालने के लिए एक नाली बनी है। मगर, यह चोक है। मंदिर के महंत ने पंप लगाया लेकिन पूरी तरह जलनिकासी नहीं हो पाती है। साफ-सफाई के लिए कोई कर्मचारी नहीं है। इस कारण हर समय गंदगी का आलम रहता है।

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