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यहां पद्मासन मुद्रा में हैं भगवान शिव, भीमसेन महाराज मंदिर में पांडवों ने की थी पूजा
Mon, 22 Jul 2019 08:57 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 22 Jul 2019 08:57 AM IST
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भीमसेन महाराज मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
नगर का प्राचीन भीमसेन महाराज मंदिर अपने आप में कई किवदंतियों को संजोए है। शिव भक्तों के लिए यह मंदिर पहली पसंद है। सावन में इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। मंदिर पर भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाओं के साथ विशेष साज-सज्जा भी की जाती है।
नगर के मोहल्ला गाड़ीवान स्थित भीमसेन महाराज का आधुनिक मंदिर 12वीं शताब्दी में अपने स्वरूप में आया, लेकिन भगवान भीमसेन का विग्रह पौराणिक काल का बताया जाता है। शहर के ईशान कोण में जहां मां शीतला देवी का मंदिर है वहीं आग्नेय कोण में भगवान भीमसेन विराजमान हैं।
मान्यता है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच इस पावन नगरी की रक्षा के लिए शिवा और शिव को विराजमान किया गया है। बटेश्वर धाम की तरह यहां भी भगवान शिव की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में है। विग्रह में बड़े-बड़े जटा जूट से अलंकृत चंद्रकला को मस्तक पर धारण करने वाले एवं बड़ी-बड़ी मूंछों से सुशोभित भगवान भोलेनाथ का शृंगार किया गया है।
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नगर के मोहल्ला गाड़ीवान स्थित भीमसेन महाराज का आधुनिक मंदिर 12वीं शताब्दी में अपने स्वरूप में आया, लेकिन भगवान भीमसेन का विग्रह पौराणिक काल का बताया जाता है। शहर के ईशान कोण में जहां मां शीतला देवी का मंदिर है वहीं आग्नेय कोण में भगवान भीमसेन विराजमान हैं।
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मान्यता है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच इस पावन नगरी की रक्षा के लिए शिवा और शिव को विराजमान किया गया है। बटेश्वर धाम की तरह यहां भी भगवान शिव की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में है। विग्रह में बड़े-बड़े जटा जूट से अलंकृत चंद्रकला को मस्तक पर धारण करने वाले एवं बड़ी-बड़ी मूंछों से सुशोभित भगवान भोलेनाथ का शृंगार किया गया है।
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भीमसेन महाराज मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
भीमसेन महाराज मंदिर के बारे में कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान इच्छु नदी (वर्तमान में ईशन) के किनारे-किनारे बिठूर जाते समय पांडव यहां रुके थे। पांडवों ने भगवान भीमसेन के मंदिर में रुककर यहां भीमसेन महाराज की पूजा अर्चना की थी।