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सत्संगियों का बवाल: कायराना हरकत... गलवान जैसे कील लगे डंडों से हमला, दुश्मन की जान लेने के लिए होते थे प्रयोग
Mon, 25 Sep 2023 10:07 AM IST
शाहरुख खान
सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला, आगरा
सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला, आगरा
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 25 Sep 2023 10:07 AM IST
सार
आगरा में अवैध कब्जा हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर राधास्वामी सत्संग सभा के सत्संगियों ने हमला बोल दिया। सत्संगियों ने चारों तरफ से पुलिस को घेरकर लाठी-डंडे और पत्थर बरसाए। इसमें सीओ और कई पुलिसकर्मी समेत 40 लोग घायल हो गए। बुलडोजर, ट्रक और ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त कर दिए। हमलावर कंटीले हथियार लेकर आए थे।
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आगरा में सत्संगियों का बवाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राधास्वामी सत्संग सभा ने रविवार की शाम पुलिस पर हमले में कीलें लगे डंडों का इस्तेमाल किया। ऐस ही डंडों का इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून, 2020 को चीन के सैनिकों ने भारतीय सेना के जवानों पर हमले के दौरान किया था।
दयालबाग के गांव खासपुर निवासी राकेश कुमार का कहना था कि धर्म की आड़ में अधर्म की आंधी लोगों ने अपनी आंखों से देखी। इस तरह के कीलें लगे डंडों का मकसद सिर्फ किसी की जान लेना हो सकता है। दोपहर बाद दयालबाग में जिस तरह का मंजर सत्संगियों ने बना दिया, उसे सभी लोगों ने देखा।
गांव निवासी नाथूराम वर्मा ने कहा कि इस तरह के डंडे किसी की जान ले सकते हैं। इसलिए सत्संग सभा से जुड़े हमलावर लोगों के इरादे खतरनाक थे। यह सभी ने देखा। चीन के सैनिकों के हाथों में टीवी पर ऐसे डंडे देखे थे। इसके बाद यहां देखे हैं। डंडे कहां और कौन तैयार कर रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए।
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दुश्मन की जान लेने के लिए होते थे प्रयोग
इतिहासविद् डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि प्राचीनकाल में इस तरह के कीलें लगे धारदार डंडों का उपयोग दुश्मनों के खात्मा के लिए किया जाता था। मुगलकाल से पहले तक इस तरह के खतरनाक डंडे हाथों में दिखते थे। तब इन डंडों का काफी खौफ रहता था।
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दयालबाग के गांव खासपुर निवासी राकेश कुमार का कहना था कि धर्म की आड़ में अधर्म की आंधी लोगों ने अपनी आंखों से देखी। इस तरह के कीलें लगे डंडों का मकसद सिर्फ किसी की जान लेना हो सकता है। दोपहर बाद दयालबाग में जिस तरह का मंजर सत्संगियों ने बना दिया, उसे सभी लोगों ने देखा।
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गांव निवासी नाथूराम वर्मा ने कहा कि इस तरह के डंडे किसी की जान ले सकते हैं। इसलिए सत्संग सभा से जुड़े हमलावर लोगों के इरादे खतरनाक थे। यह सभी ने देखा। चीन के सैनिकों के हाथों में टीवी पर ऐसे डंडे देखे थे। इसके बाद यहां देखे हैं। डंडे कहां और कौन तैयार कर रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए।
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दुश्मन की जान लेने के लिए होते थे प्रयोग
इतिहासविद् डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि प्राचीनकाल में इस तरह के कीलें लगे धारदार डंडों का उपयोग दुश्मनों के खात्मा के लिए किया जाता था। मुगलकाल से पहले तक इस तरह के खतरनाक डंडे हाथों में दिखते थे। तब इन डंडों का काफी खौफ रहता था।
सत्संगियों का हमला, 12 पुलिस कर्मियों समेत 40 घायल
आपको बता दें कि आगरा में राधास्वामी सत्संग सभा दयालबाग के अवैध कब्जा कर बनाए गेट को रविवार की शाम तीसरी बार हटाने पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम पर सत्संगियों ने हमला बोल दिया। पुलिस को चारों ओर से घेरकर पथराव किया, जिसमें 12 पुलिसकर्मियों समेत 40 लोग घायल हो गए।
आपको बता दें कि आगरा में राधास्वामी सत्संग सभा दयालबाग के अवैध कब्जा कर बनाए गेट को रविवार की शाम तीसरी बार हटाने पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम पर सत्संगियों ने हमला बोल दिया। पुलिस को चारों ओर से घेरकर पथराव किया, जिसमें 12 पुलिसकर्मियों समेत 40 लोग घायल हो गए।
शनिवार को प्रशासन ने टेनरी पर गेट नंबर 8 और श्मशान घाट रोड पर बनी दीवार और गेट को ढहाया था, लेकिन दो बार ढहाने के बाद रात में सत्संगियों ने गेट पर तार लगा दिए थे। पथराव में नगर निगम का बुलडोजर, ट्रक और ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त हो गए।
इस मामले में भी प्रशासन और पुलिस की ओर से सत्संगियों के खिलाफ एफआईआर कराई गई है। वहीं शाम को सत्संग सभा को अपने दस्तावेज दिखाने के लिए सोमवार तक का समय दिया गया है। जिला प्रशासन ने शनिवार को दयालबाग में राधास्वामी सत्संग सभा की ओर से सड़कों को घेरकर बनाए गए 6 गेट तोड़े थे। जिसमें 16 बीघा 9 बिस्वा जमीन खाली कराई गई थी।
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सत्संग सभा ने रात में फिर गेट लगा दिए, कंटीले तारों की बाड़ लगा दी। रविवार सुबह सत्संगियों को गेट नंबर 8 टेनरी पर पहुंचने के लिए मैसेज जारी किए गए। पुलिस प्रशासन शाम को 4 बजे जब फिर से गेट तोड़ने के लिए पहुंचा तो हजारों सत्संगी पहुंच गए। कई के हाथों में धारदार कंटीले हथियार थे। बुलडोजर आगे बढ़ते ही सत्संगियों ने पथराव शुरू कर दिया। आरोप है कि महिलाओं और बच्चों को आगे रखकर सत्संगियों ने पुलिस और प्रशासन पर पत्थर बरसाए।