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जो बोले सो निहाल... के जयकारे के साथ शुरू हुई सरहिंद पंजाब यात्रा
Sat, 26 Dec 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 26 Dec 2020 12:08 AM IST
सार
आगरा किला से शुरू होकर 28 को फतेहगढ़ साहिब पर पहुंचेगी, पुष्प वर्षा से स्वागत
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सरहिंद पंजाब यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सिर पर केसरिया पगड़ी और जुबां पर जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल...के जयकारे। जोश, गर्व और उल्लास के साथ शुक्रवार को आगरा किला के सामने से अभियान फाउंडेशन की सरहिंद पंजाब यात्रा रवाना की गई। जगह-जगह स्वागत में फूलों की बारिश की गई। सरहिंद पंजाब श्रद्धांजलि यात्रा विभिन्न शहरों से होते हुए 28 दिसंबर को पंजाब के फतेहगढ़ साहिब पहुंचेगी।
गुरु गोविंद सिंह और उनके अमर शहीद साहिबजादे बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को नमन करते हुए यात्रा शुरू हुई। गुरुद्वारा गुरु के ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह और मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इससे पहले गो पूजन करते हुए गुरु गोविंद सिंह और उनकी शहादत के बारे में बताया गया। अध्यक्ष रवि दुबे और संयोजक संक्रेश जैन ने कहा कि मांगपत्र केंद्र-राज्य सरकार को भेज दिया है। आयोजन में समन्वयक बंटी ग्रोवर, महेंद्र पाल सिंह, भूपेश ठाकुर, रिंकी शर्मा, आशीष शर्मा, बाबा अमरीक सिंह, दलजीत सिंह, कंवलदीप सिंह, कुलविंदर सिंह, अजिंदर पाल सिंह, उपेंद्र लवली, तरुण पाठक, सुग्रीव चौहान, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. डीवी शर्मा, सुरेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
इन्होंने किया स्वागत
आगरा विकास मंच के राजकुमार जैन, शिवाजी मार्केट के श्याम भोजवानी, मुकुल गुलजार, नितेश शिवहर, इंदर राजकुमार, हरीश भोजवानी, भारत विकास परिषद के तरुण शर्मा, रिंकू गुलाटी, शौकी कपूर, रोमित कपूर, पाली सेठी, केशव अग्रवाल समेत 20 से अधिक संस्थाओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया।
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गुरु गोविंद सिंह और उनके अमर शहीद साहिबजादे बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को नमन करते हुए यात्रा शुरू हुई। गुरुद्वारा गुरु के ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह और मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इससे पहले गो पूजन करते हुए गुरु गोविंद सिंह और उनकी शहादत के बारे में बताया गया। अध्यक्ष रवि दुबे और संयोजक संक्रेश जैन ने कहा कि मांगपत्र केंद्र-राज्य सरकार को भेज दिया है। आयोजन में समन्वयक बंटी ग्रोवर, महेंद्र पाल सिंह, भूपेश ठाकुर, रिंकी शर्मा, आशीष शर्मा, बाबा अमरीक सिंह, दलजीत सिंह, कंवलदीप सिंह, कुलविंदर सिंह, अजिंदर पाल सिंह, उपेंद्र लवली, तरुण पाठक, सुग्रीव चौहान, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. डीवी शर्मा, सुरेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
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इन्होंने किया स्वागत
आगरा विकास मंच के राजकुमार जैन, शिवाजी मार्केट के श्याम भोजवानी, मुकुल गुलजार, नितेश शिवहर, इंदर राजकुमार, हरीश भोजवानी, भारत विकास परिषद के तरुण शर्मा, रिंकू गुलाटी, शौकी कपूर, रोमित कपूर, पाली सेठी, केशव अग्रवाल समेत 20 से अधिक संस्थाओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया।
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ये हैं मांगें
- चमकौर युद्ध को कक्षा 6-8 के पाठ्यक्रम में शामिल करें।
- पटना साहिब तक एनएच-दो का नाम माता गुजरकौर राजमार्ग रखें।
- गुरु गोविंद सिंह और चार साहिबजादों की शहादत कक्षा 10-12 के कोर्स में रखें।
- चमकौर-फतेहगढ़ साहिब में गुरु गोविंद सिंह व चारों साहिबजादों का स्मारक बने।
- लड़ाकू विमान, मिसाइल या किसी नई खोज का नाम चारों साहिबजादों के नाम पर हो।
- दिल्ली मेट्रो के राजीव चैक का नाम गुरु तेगबहादुर चौक किया जाए।
इस्लाम धर्म नहीं किया था स्वीकार
-गुरुद्वारा गुरु के ताल के मास्टर गुरनाम सिंह ने बताया कि 26 दिसंबर, 1704 में गुरु गोविंद सिंह के दो साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम धर्म कबूल न करने पर सरहिंद के नवाब ने जिंदा दीवार में चुनवा दिया था। माता गुजरकौर जी को किले की दीवार से गिराकर शहीद कर दिया था। बड़े साहिबजादे बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह चमकौर युद्ध में अपने 40 वीर सिखों के साथ मुगलों की 10 लाख फौज का मुकाबला करते हुए शहीद हुए थे।
गुुरुद्वारा की तोप से निकली फूलों के गोले
- यात्रा की रवानगी से पहले गुुरुद्वारा गुुरु के ताल की तोप आकर्षण का केंद्र रही। यात्रा की रवानगी पर तोप से फूलों के गोले छोड़े गए।
- चमकौर युद्ध को कक्षा 6-8 के पाठ्यक्रम में शामिल करें।
- पटना साहिब तक एनएच-दो का नाम माता गुजरकौर राजमार्ग रखें।
- गुरु गोविंद सिंह और चार साहिबजादों की शहादत कक्षा 10-12 के कोर्स में रखें।
- चमकौर-फतेहगढ़ साहिब में गुरु गोविंद सिंह व चारों साहिबजादों का स्मारक बने।
- लड़ाकू विमान, मिसाइल या किसी नई खोज का नाम चारों साहिबजादों के नाम पर हो।
- दिल्ली मेट्रो के राजीव चैक का नाम गुरु तेगबहादुर चौक किया जाए।
इस्लाम धर्म नहीं किया था स्वीकार
-गुरुद्वारा गुरु के ताल के मास्टर गुरनाम सिंह ने बताया कि 26 दिसंबर, 1704 में गुरु गोविंद सिंह के दो साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम धर्म कबूल न करने पर सरहिंद के नवाब ने जिंदा दीवार में चुनवा दिया था। माता गुजरकौर जी को किले की दीवार से गिराकर शहीद कर दिया था। बड़े साहिबजादे बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह चमकौर युद्ध में अपने 40 वीर सिखों के साथ मुगलों की 10 लाख फौज का मुकाबला करते हुए शहीद हुए थे।
गुुरुद्वारा की तोप से निकली फूलों के गोले
- यात्रा की रवानगी से पहले गुुरुद्वारा गुुरु के ताल की तोप आकर्षण का केंद्र रही। यात्रा की रवानगी पर तोप से फूलों के गोले छोड़े गए।
यात्रा में 130 वाहन और 250 लोगों का जत्था
आगरा से शुरू हुई यात्रा में 50 बुलेट, 80 अन्य वाहन और 250 लोगों का जत्था शामिल है। मथुरा तक करीब 500 से अधिक लोग गए हैं। यहां से यात्रा पलवल, फरीदाबाद, दिल्ली पहुंचेगी। दिल्ली में रात्रि पड़ाव के बाद यात्रा पानीपत, अंबाला होकर पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में रविवार की सुबह पहुंचेगी।
नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी
सिख गुरुओं ने देश और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनकी शहादत को आगे की पीढ़ियां भी याद रखें, इसके लिए हिंदू धर्म के लोगों ने यह यात्रा निकाली है। इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। -संत बाबा प्रीतम सिंह, गुरुद्वारा गुरु का ताल
शहादत को लाखों नमन
गुरु गोविंद सिंह महाराज के चारों साहिबजादे धर्म की रक्षा और देश की आन-बान-शान के लिए शहीद हो गए। उनकी इस शहादत को लाखों बार नमन। उनकी शहादत को नई पीढ़ी समझे और गर्व करे। -महंत योगेश पुरी, मनकामेश्वर मंदिर
गुरुओं, योद्धाओं की गाथा पाठ्यक्रम में शामिल हो
विदेशी आक्रांताओं को महान बताकर पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। जिन्होंने देश, संस्कृति के लिए सर्वस्व बलिदान किया, उन्हें भुला दिया। अभियान फाउंडेशन ने ऐसे गुुरु और योद्धाओं के नाम से मार्गों का नाम, पाठ्यक्रम में शामिल करने के मकसद से यह यात्रा शुरू की है। -रवि दुबे, अध्यक्ष, अभियान फाउंडेशन
आगरा से शुरू हुई यात्रा में 50 बुलेट, 80 अन्य वाहन और 250 लोगों का जत्था शामिल है। मथुरा तक करीब 500 से अधिक लोग गए हैं। यहां से यात्रा पलवल, फरीदाबाद, दिल्ली पहुंचेगी। दिल्ली में रात्रि पड़ाव के बाद यात्रा पानीपत, अंबाला होकर पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में रविवार की सुबह पहुंचेगी।
नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी
सिख गुरुओं ने देश और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनकी शहादत को आगे की पीढ़ियां भी याद रखें, इसके लिए हिंदू धर्म के लोगों ने यह यात्रा निकाली है। इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। -संत बाबा प्रीतम सिंह, गुरुद्वारा गुरु का ताल
शहादत को लाखों नमन
गुरु गोविंद सिंह महाराज के चारों साहिबजादे धर्म की रक्षा और देश की आन-बान-शान के लिए शहीद हो गए। उनकी इस शहादत को लाखों बार नमन। उनकी शहादत को नई पीढ़ी समझे और गर्व करे। -महंत योगेश पुरी, मनकामेश्वर मंदिर
गुरुओं, योद्धाओं की गाथा पाठ्यक्रम में शामिल हो
विदेशी आक्रांताओं को महान बताकर पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। जिन्होंने देश, संस्कृति के लिए सर्वस्व बलिदान किया, उन्हें भुला दिया। अभियान फाउंडेशन ने ऐसे गुुरु और योद्धाओं के नाम से मार्गों का नाम, पाठ्यक्रम में शामिल करने के मकसद से यह यात्रा शुरू की है। -रवि दुबे, अध्यक्ष, अभियान फाउंडेशन