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माटी से सपने ने रुलाया और खंडाला नाइट ने हंसाया
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आगरा। ग्लोबल ताज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन 12 से अधिक देशी-विदेशी फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इसमें फिल्म माटी से सपने ने दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए, तो खंडाला नाइट ने खूब हंसाया। क्लाइमेक्स से लेकर थ्रिलर की फिल्में दर्शकों ने खूब सराहीं। सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करने वाली फिल्में भी खूब सराही गईं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि के खंदारी कैंपस स्थित जेपी सभागार में तीन दिवसीय इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में डॉक्यूमेंट्री फिल्म, शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्मों की धूम रही। हिंदुस्तानी फिल्मों के अलावा अफगानी, फ्रेंच, जर्मन, अफ्रीकन और ईरान की फिल्में भी सराही गईं।
फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ भाजपा विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने किया। उन्होंने कहा कि फिल्में साहित्य का दर्पण होती हैं। जो समाज में घट रहा है, वही फिल्मों में दिखाई देता है। विवि के आईटीएचएम संस्थान के निदेशक डॉ. लवकुश मिश्रा का कहना था कि फिल्म महोत्सव से आगरा की सांस्कृतिक विरासत को नई दिशा मिली है। फेस्टिवल के संरक्षक रंजीत सामा ने कहा कि ब्रज की फिल्में तेजी से फल फूल रही हैं। फेस्टिवल के निदेशक सूरज तिवारी ने अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस दौरान अरविंद गुप्ता, डॉ, आलोक, डॉ. शुभम लवानिया, डॉ. डीवी शर्मा, नितिन गोयल, प्रमोद वर्मा, कवि राजेंद्र मिलन, सोमेश गर्ग, विनोद यादव, आदर्श नंदन गुप्त, महेश धाकड़, मंगल सिंह धाकड़, हरीश चिमटी, कवि ईशान देव, विनीत बवानिया, निशिराज, अमित तिवारी आदि मौजूद रहे।
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ये फिल्में हुईं प्रदर्शित
डाक्यूमेंट्री मशीन, टारगेट प्वाइंट-स्वच्छता की ओर, नाजी, ए फादर्स डायरी, महादेई लाइफ इन मानसून, झरोखा आगरा के, सॉरी डैडी, सेवा एक प्रथा, माटी से सपने, लॉकडाउन, खंडाला नाइट।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि के खंदारी कैंपस स्थित जेपी सभागार में तीन दिवसीय इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में डॉक्यूमेंट्री फिल्म, शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्मों की धूम रही। हिंदुस्तानी फिल्मों के अलावा अफगानी, फ्रेंच, जर्मन, अफ्रीकन और ईरान की फिल्में भी सराही गईं।
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फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ भाजपा विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने किया। उन्होंने कहा कि फिल्में साहित्य का दर्पण होती हैं। जो समाज में घट रहा है, वही फिल्मों में दिखाई देता है। विवि के आईटीएचएम संस्थान के निदेशक डॉ. लवकुश मिश्रा का कहना था कि फिल्म महोत्सव से आगरा की सांस्कृतिक विरासत को नई दिशा मिली है। फेस्टिवल के संरक्षक रंजीत सामा ने कहा कि ब्रज की फिल्में तेजी से फल फूल रही हैं। फेस्टिवल के निदेशक सूरज तिवारी ने अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस दौरान अरविंद गुप्ता, डॉ, आलोक, डॉ. शुभम लवानिया, डॉ. डीवी शर्मा, नितिन गोयल, प्रमोद वर्मा, कवि राजेंद्र मिलन, सोमेश गर्ग, विनोद यादव, आदर्श नंदन गुप्त, महेश धाकड़, मंगल सिंह धाकड़, हरीश चिमटी, कवि ईशान देव, विनीत बवानिया, निशिराज, अमित तिवारी आदि मौजूद रहे।
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ये फिल्में हुईं प्रदर्शित
डाक्यूमेंट्री मशीन, टारगेट प्वाइंट-स्वच्छता की ओर, नाजी, ए फादर्स डायरी, महादेई लाइफ इन मानसून, झरोखा आगरा के, सॉरी डैडी, सेवा एक प्रथा, माटी से सपने, लॉकडाउन, खंडाला नाइट।