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UP: प्रस्ताव खारिज न होता तो 68 साल पहले ही आगरा बन जाता राज्य और राजधानी, जाट संसद में फिर उठी इसकी सुगबुगाहट
Tue, 03 Oct 2023 08:36 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Tue, 03 Oct 2023 08:36 AM IST
सार
उस समय यदि प्रस्ताव खारिज न होता तो 68 साल पहले ही आगरा राज्य और राजधानी बन जाता। अब एक बार फिर जाट संसद में इस मुद्दे की सुगबुगाहट उठी है।
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आगरा किला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ताजनगरी आगरा में कभी मुगलिया हुकूमत की राजधानी और ब्रिटिश राज में नार्थ वेस्ट प्राविंस की राजधानी रहे आगरा को आजादी के महज 8 साल बाद ही 1955 में अलग राज्य और प्रदेश की राजधानी बनाने की सिफारिश की गई थी। 1953 में न्यायमूर्ति फजल अली की अध्यक्षता वाले राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य केएम पणिक्कर ने आगरा राज्य और आगरा को इसकी राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा था।
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उस समय 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश बनाने की सिफारिश की गई थी। इसे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने खारिज कर दिया था। जाट संसद में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मामला उठाया तो आगरा में इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई।
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वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना के मुताबिक वर्ष 1955 में पणिक्कर की सिफारिश के तहत प्रस्तावित आगरा राज्य को मेरठ, आगरा, रूहेलखंड, झांसी कमिश्नरी के जिलों, मध्य भारत के दतिया, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, राजस्थान के धौलपुर, भरतपुर जिलों समेत मौजूदा हरियाणा के रोहतक, गुरुग्राम, करनाल, हिसार जिलों को मिलाकर बनाया जाना था। पुनर्गठन आयोग के दो सदस्य ह्रदयनाथ कुंजरू और सैयद फजल अली उत्तर प्रदेश का विभाजन करने की जगह इसे अखंड रखने पर सहमत थे।
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6 नवंबर 1955 को आगरा राज्य सम्मेलन
आगरा राज्य आंदोलन से जुड़े रहे ललितेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों पर आगरा में 6 नवंबर 1955 को उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग रखी गई। इसमेंं पं. श्रीराम शर्मा के साथ कांग्रेस के मुजफ्फरनगर, बुलंद शहर, सहारनपुर और दिल्ली के तत्कालीन विधायकों ने आगरा राज्य का समर्थन किया। इस सम्मेलन में जन समर्थन के जरिये दबाव बनाने की रणनीति बनी, जिस पर दिसंबर तक ग्वालियर, आगरा, झांसी, अलीगढ़ आदि शहरों में बैठकें और सभाएं होती रहीं।यह भी पढ़ेंः- Agra: शाही जामा मस्जिद में विवाद, नई कमेटी गठन के साथ दो पक्ष आमने-सामने, कर दिया गया नए शहर मुफ्ती का एलान
संजय गांधी भी राजधानी बनाने के हक में थे
वर्ष 1972 में उत्तर प्रदेश के 14 विधायकों ने ब्रज प्रदेश, अवध प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश बनाने का प्रस्ताव रखा लेकिन खारिज हो गया। 1975-77 के बीच इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाकर आगरा को राजधानी बनाने के हक में थे।हरियाणा, राजस्थान के कुछ जिले मिलाकर वह नक्शा भी बना चुके थे, पर उससे पहले ही इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हो गईं। इसके बाद 23 नवंबर 2011 को पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश बनाने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया गया लेकिन केंद्र ने कोई कार्रवाई नहींं की।
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