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है नमन उनको... शहादत को सम्मान की दरकार, परिवार को मदद का इंतजार
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कासगंज के किसरौली में लगी शहीद कुंवरपाल की प्रतिमा
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। कारगिल युद्ध में देश के लिए शहादत देने के बाद भी गांव किसरौली निवासी शहीद कुंवरपाल को पूरी तरह सम्मान नहीं मिल पाया है। परिवार को भी अपेक्षित सरकारी मदद भी नहीं मिल पाई है। आवेदन के बाद भी परिवार का राशनकार्ड तक नहीं बनाया गया है।
कारगिल युद्ध में जिले के गांव किसरौली के कुंवरपाल पुत्र करन सिंह शहीद हुए थे। जब उनके सम्मान की बात आई तो अपेक्षित सरकारी सहयोग नहीं मिला। गांव के बाहर शहीद की प्रतिमा वर्ष 2013 में स्थापित हुई। प्रतिमा स्थल की अनदेखी हो रही है। सरकारी व्यवस्था के तहत न तो कभी इस प्रतिमा और चाहरदीवारी की रंगाई पुताई हुई और न ही शहीद के परिवार को अपेक्षित सम्मान मिला।
शहीद की पत्नी सरोज सरकारी योजनाओं के लाभ से आज भी वंचित है। यहां तक कि इस परिवार का राशनकार्ड भी नहीं बना है। सरोज का कहना है कि कई बार आवेदन किया, लेकिन किसी अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया। उनके मुताबिक कभी भी किसी आयोजन में सम्मान के लिए उन्हें सरकारी ओर से बुलावा नहीं आया और न ही शहीद दिवस पर कोई भी अधिकारी, कर्मचारी शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण पहुंचता है।
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कारगिल युद्ध में शहीद हुए लांस नायक कुंवरपाल के बेटे सुनील ने संकल्प लिया कि वह बड़ा होकर अपने पिता का सपना पूरा करेगा और देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होगा। पिछले पांच सालों से वह सेना में भर्ती के लिए प्रयासरत है, लेकिन अभी तक उसे मुकाम नहीं मिल पा रहा।
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कारगिल युद्ध में जिले के गांव किसरौली के कुंवरपाल पुत्र करन सिंह शहीद हुए थे। जब उनके सम्मान की बात आई तो अपेक्षित सरकारी सहयोग नहीं मिला। गांव के बाहर शहीद की प्रतिमा वर्ष 2013 में स्थापित हुई। प्रतिमा स्थल की अनदेखी हो रही है। सरकारी व्यवस्था के तहत न तो कभी इस प्रतिमा और चाहरदीवारी की रंगाई पुताई हुई और न ही शहीद के परिवार को अपेक्षित सम्मान मिला।
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शहीद की पत्नी सरोज सरकारी योजनाओं के लाभ से आज भी वंचित है। यहां तक कि इस परिवार का राशनकार्ड भी नहीं बना है। सरोज का कहना है कि कई बार आवेदन किया, लेकिन किसी अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया। उनके मुताबिक कभी भी किसी आयोजन में सम्मान के लिए उन्हें सरकारी ओर से बुलावा नहीं आया और न ही शहीद दिवस पर कोई भी अधिकारी, कर्मचारी शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण पहुंचता है।
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कारगिल युद्ध में शहीद हुए लांस नायक कुंवरपाल के बेटे सुनील ने संकल्प लिया कि वह बड़ा होकर अपने पिता का सपना पूरा करेगा और देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होगा। पिछले पांच सालों से वह सेना में भर्ती के लिए प्रयासरत है, लेकिन अभी तक उसे मुकाम नहीं मिल पा रहा।