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राम मंदिर ट्रस्ट पर 'तनातनी' के बीच वृंदावन के संतों ने उठाई मांग, हमें भी मिले स्थान
Mon, 18 Nov 2019 10:17 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 18 Nov 2019 10:17 PM IST
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धर्मसभा को संबोधित करतीं केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति।
- फोटो : अमर उजाला
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उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन अब ट्रस्ट गठन को लेकर संत समाज में तनातनी शुरू हो गई है। इस बीच वृंदावन के संतों ने भी राम मंदिर ट्रस्ट में स्थान देने की मांग उठाई है। इसे लेकर रविवार को तीर्थनगरी के कालीदह स्थित अखंड दया धाम में संत-महंतों ने धर्मसभा की।
धर्मसभा में पहुंची केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि राम मंदिर निर्माण पर जो देशहित में होगा, सरकार वही करेगी। इस धर्मसभा में आठ प्रस्ताव पास किए गए। जिसमें राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में वृंदावन के दो संतों को स्थान देने की मांग की गई।
केंद्रीय मंत्री ने राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सपना सच होने जैसा बताया। उन्होंने संतों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी आस्था का सम्मान रखेगी। कार्यक्रम अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आस्था को न्याय देने वाला है और जल्द ही मंदिर निर्माण होगा।
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धर्मसभा में पहुंची केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि राम मंदिर निर्माण पर जो देशहित में होगा, सरकार वही करेगी। इस धर्मसभा में आठ प्रस्ताव पास किए गए। जिसमें राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में वृंदावन के दो संतों को स्थान देने की मांग की गई।
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केंद्रीय मंत्री ने राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सपना सच होने जैसा बताया। उन्होंने संतों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी आस्था का सम्मान रखेगी। कार्यक्रम अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आस्था को न्याय देने वाला है और जल्द ही मंदिर निर्माण होगा।
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ये संत हुए शामिल
बलराम देवाचार्य महाराज ने राम मंदिर आंदोलन में स्वामी वामदेव महाराज व वृंदावन के अन्य संतों के योगदान का स्मरण किया। स्वामी गोविंदानंद तीर्थ, स्वामी चित्प्रकाशानंद महाराज ने मंदिर निर्माण में वृंदावन के संत समाज को भी प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की।
महंत मोहिनी बिहारी शरण ने प्रस्तावित मंदिर में स्वामी वामदेव की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। मृदुलकांत शास्त्री, आचार्य बद्रीश, सौरभ गौड़, स्वामी सुरेशानंद, श्रीदास प्रजापति, रामकमल दास वेदांती, स्वामी आदित्यानंद महाराज, रामविलास चतुर्वेदी आदि संत व विद्वतजनों ने धर्म सभा में विचार व्यक्त किए।
महंत मोहिनी बिहारी शरण ने प्रस्तावित मंदिर में स्वामी वामदेव की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। मृदुलकांत शास्त्री, आचार्य बद्रीश, सौरभ गौड़, स्वामी सुरेशानंद, श्रीदास प्रजापति, रामकमल दास वेदांती, स्वामी आदित्यानंद महाराज, रामविलास चतुर्वेदी आदि संत व विद्वतजनों ने धर्म सभा में विचार व्यक्त किए।
ये आठ प्रस्ताव हुए पास
1-राम मंदिर में वामदेव महाराज की प्रतिमा लगाई जाए।
2-मंदिर के ट्रस्ट में वृंदावन के दो संतों को स्थान दिया जाए।
3-रामलला को मंदिर निर्माण होने तक टेंट से हटाकर किसी उचित स्थान पर विराजित किया जाए।
4-अयोध्या की 14 कोस की सांस्कृतिक सीमा के अंतर्गत मस्जिद न बनाई जाए।
5-प्रस्तावित मंदिर का स्वरूप आंदोलन में प्रदर्शित किए मॉडल के अनुसार हो।
6-गांव-गांव में पूजित राम शिलाओं का उपयोग मंदिर निर्माण में किया जाए।
7-बाबर के नाम पर देश में कहीं भी मस्जिद नहीं बनाई जाए।
8-राम मंदिर में एक ऐसा स्तंभ हो जिसमें मंदिर में आंदोलन में भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख लोगों के नाम हों।
2-मंदिर के ट्रस्ट में वृंदावन के दो संतों को स्थान दिया जाए।
3-रामलला को मंदिर निर्माण होने तक टेंट से हटाकर किसी उचित स्थान पर विराजित किया जाए।
4-अयोध्या की 14 कोस की सांस्कृतिक सीमा के अंतर्गत मस्जिद न बनाई जाए।
5-प्रस्तावित मंदिर का स्वरूप आंदोलन में प्रदर्शित किए मॉडल के अनुसार हो।
6-गांव-गांव में पूजित राम शिलाओं का उपयोग मंदिर निर्माण में किया जाए।
7-बाबर के नाम पर देश में कहीं भी मस्जिद नहीं बनाई जाए।
8-राम मंदिर में एक ऐसा स्तंभ हो जिसमें मंदिर में आंदोलन में भूमिका निभाने वाले सभी प्रमुख लोगों के नाम हों।