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रूहानियत से सराबोर रही शब-ए-बरात की रात

Sun, 20 Mar 2022 12:03 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2022 12:03 AM IST
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sab e barat, prayer in mosque
कासगंज भरगैन स्थित मदीना मस्जिद में शब-ए-बरात की फजीलत बयां करते इमाम मौलाना अजीमुद्दीन। - फोटो : KASGANJ
कासगंज। जिला में शनिवार को शब-ए-बरात पर्व मनाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने मस्जिदों में पहुंचकर इबादत की। वहीं, कब्रिस्तान में अपने पूर्वजों की कब्रों पर पहुंचकर गए मगफिरत के लिए दुआएं की। मस्जिदों में जलसे आयोजित किए गए। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
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जनपद भर में शब-ए-बारात को लेकर सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गई। घरों पर हलवा सहित तमाम तरह के पकवान बनाए गए। दिन भर फातिहा का दौर चलता रहा। शाम को लोगों का दरगाहों और कब्रिस्तान पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, जो रात भर जारी रहा। जहां लोगों ने हार फूल पेश किए और नजरो नियाज के साथ अल्लाह से दुआएं मांगीं। इस मुकद्दस रात में घरों और मस्जिदों में लोगों ने इबादत की। रात भर घरों में मीलाद व कुरान की तिलावत की गूंज रही। लोगों ने निर्धनों को दान दिया। मस्जिदों और घरों पर इबादत और तिलावत की। बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तान में पहुंचे। दरगाहों पर पहुंचकर भी लोगों ने हाजिरी लगाई। सुबह से ही घरों में तैयारियां शुरू हो गई थीं। लोगों ने रात भर जागकर इबादत की। रात भर घरों और मस्जिदों में जलसों व कुरान की तिलावत की गूंज रही।
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मस्जिदों में जलसे हुए आयोजित
भरगैन। कस्बा में शब ए बरात पर्व मनाया गया। बरकातिया मस्जिद, मदीना मस्जिद, नूरी मस्जिद सहित अन्य मस्जिदों में जलसे आयोजित हुए। आयोजित जलसों में उलमाओं ने शब-ए-बरात के महत्व और इस रात की जाने वाली इबादत, उसके फायदे, अल्लाह और रसूल के फरमान के विषय पर तकरीर के माध्यम से प्रकाश डाला। ऐतिहासिक दरगाह हजरत चिश्ती पीर बाबा के यहां भी लोगों ने हाजिरी लगाई। एएमयू के पूर्व छात्र व समाजसेवी रिहान खान ने बताया बीती साल किए गए गुनाहों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बारात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है।
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जगमग हुए कब्रिस्तान, मांगी दुआ
भरगैन। दरगाह चिश्ती पीर बाबा, मजार काले खा बाबा, मजार रोशन शाह बाबा, मजार पंच पीर आदि रोशनी से जगमगा उठे। दरगाह और मजारों पर दुआ के लिए लोग पहुंचे। इस मुबारक रात में लोग अपने पूर्वजों, रिश्तेदारों, शहीदों की कब्रों पर गए और उनके लिए ईसाले सवाब किया।
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