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आज देश में धर्म और अध्यात्म विहीन शासनतंत्र: स्वामी निश्चलानंद

Tue, 03 Oct 2017 08:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
ब्यूरो/अमर उजाला वृंदावन (मथुरा) Updated Tue, 03 Oct 2017 08:18 AM IST
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rule in india is religion and spirituality less
स्वामी निश्चलानंद - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य भूमि है। यहां के आकर्षण का केंद्र शुरू से ही यमुना महारानी रही है लेकिन वर्तमान में दशाहीन शासनतंत्र और जनता के जागरूक न होने के कारण नदियां दूषित हो रही हैं। 
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सोमवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए जगद्गुरु स्वामी निश्चलानंद महाराज ने कहा कि हिंदुओं द्वारा गाय, गंगा और यमुना को लेकर जो अभियान चलाया जाता है, उसमें जो व्यक्ति या संस्थान के लोग शामिल रहते हैं। वह श्रेय लेने के लिए इतने भूखे रहते हैं कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ही छूट जाता है। यह भावना किसी भी हिंदू अभियान या आंदोलन को पूरा नहीं होने देती।
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उन्होंने कहा कि आज देश में धर्म और अध्यात्म विहीन शासनतंत्र है। हालात इतने खराब हैं कि विकृति को ही शासनतंत्र इस समय संस्कृति मानता है और शासनतंत्र हमारी सनातन संस्कृति के विमुख होकर कार्य कर रहा है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली में रामलीला के दौरान जूता पहनकर भगवान श्रीराम की आरती उतारे जाने पर उन्होंने कहा कि अगर यह घटना सत्य है, तो बहुत ही गलत है। 
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देश का प्रतिनिधित्व करने वाले मोदी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। श्रीरामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी व नरसिंह राव का दृष्टिकोण मुझे पता था। लेकिन मोदीजी का क्या दृष्टिकोण है मुझे नहीं पता। उन्होंने कहा कि मेरे पास 25 साल पहले से राम मंदिर निर्माण को लेकर योजना थी। लेकिन कभी भी शासन तंत्र ने मुझसे संपर्क नहीं साधा और ना ही आज साध रहे। 

रामराज्य परिषद की राष्ट्रीय चिंतन संगोष्ठी आज से

रामराज्य परिषद की दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन संगोष्ठी का आयोजन बुर्जा मार्ग स्थित हरिहर आश्रम पर तीन से चार अक्तूबर तक किया जाएगा। सोमवार को संगोष्ठी के बारे में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने जानकारी दी।

डॉ. लक्ष्मी गौतम ने बताया कि संगोष्ठी में पहले दिन वर्तमान देशकाल परिस्थिति को देखते हुए रामराज्य परिषद की कार्य प्रणाली का सर्व सम्मति से निर्धारण किया जाएगा। चार अक्तूबर को आगामी दिनों में रामराज्य परिषद के कार्यक्रमों की रूपरेखा के साथ परिषद की व्यवसाय का लोकार्पण भी होगा। 
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