रोडवेज टिकट फर्जीवाड़ाः डीवीडी में कैद है अधिकारियों और माफिया की 120 करोड़ की काली कमाई की कहानी
रोडवेज टिकट घोटाला में 10 वर्ष में तकरीबन 120 करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया। इस फर्जीवाड़े में 50 बसें शामिल थीं, जो अलीगढ़, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस और अलीगढ़- आगरा के बीच संचालित हो रही थीं। रोजाना तकरीबन तीन से चार लाख रुपये के औसत से इन बसों से नंबर दो की कमाई हो रही थी।
इस तरह से महीने में लगभग एक करोड़ रुपये का बंदरबांट होता था। साल में यह रकम 12 करोड़ और 10 साल में तकरीबन 120 करोड़ रुपये हो चुकी है। मुख्य शिकायतकर्ता पंकज लवानिया ने 100 पेज की लिखित शिकायत में इसी आंकड़े का जिक्र किया है। जिसका सिलसिलेवार पूरा ब्यौरा, बसों की संख्या, उनके फेरे, मुसाफिरों की औसत संख्या, उनके टिकटों की धनराशि का आकलन मौजूद है।
यही नहीं चार डीवीडी में अधिकारियों और माफिया के सिंडीकेट के लोगों की बातचीत, रुपयों का हिसाब किताब, लेनदेन, खर्च, ड्यूटी लगाने, टिकट मशीन बांटने, फर्जी टिकट काटने के वीडियो और कई ऑडियो क्लिप मौजूद हैं। उधर, निलंबित किए गए आगरा के आरएम समेत सभी अधिकारी लखनऊ संबद्ध कर दिए गए हैं।
माफिया हाथरस में ड्राइवर- कंडक्टर की क्लास लगाता था
बीती 17 जून 2017 को हाथरस के शिवा गेस्ट हाउस में इस माफिया के ड्राइवर कंडक्टरों की कार्यशाला का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें माफिया के लोग ड्राइवर- कंडक्टर को प्रशिक्षण देते हुए साफ दिख रहे हैं। प्रशिक्षक बता रहे हैं कि पकड़े जाने पर अधिकारियों से बात कैसे करनी है..?
मुसाफिरों से किस तरह से निपटना है..? उनके साथ पीछे की टीम उनकी मदद कै से करेगी..? इस खुलासे से माफिया तिलमिला गया और पंकज के पीछे पड़ गया। इससे ठीक सात दिन पहले हिम्मती पंकज ने 10 जून 2017 को खंदौली में फाउंड्री डिपो के नाम से दौड़ रही फर्जी बस पकड़वा दी थी।