बाह। पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर बाह में बृहस्पतिवार को लघु सिद्धचक्र विधान में कर्मों के नाश, सुख-शांति एवं मोक्ष प्राप्ति की प्रार्थना की गई। अभिषेक, पूजन और शांतिधारा के बाद विधानाचार्य घिरोर (मैनपुरी) के ऋषभ जैन शास्त्री ने बताया कि धन-संपत्ति तो आती-जाती रहती है, संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जो मनुष्य भक्ति और पूजन के माध्यम से अपने अहंकार और विकारों का त्याग करता है, तो वह ‘सिद्ध’ बनने की ओर कदम बढ़ाता है। विधान के दौरान केवल थाली में अर्घ्य चढ़ाना काफी नहीं है, हमें अपने भीतर दया, प्रेम, निस्वार्थ सेवा और अहिंसा के संस्कारों को भी संजोना होगा।
उन्होंने भजन के जरिए विधान में शामिल श्रद्धालुओं को बताया कि जीवन के सुख-दुख हमारे अपने कर्मों का फल हैं। विधान और स्वाध्याय के जरिए पापकर्मों की निर्जरा होती है और मन में पवित्रता आती है। वेदमंत्रों के बीच विश्व शांति की प्रार्थना की गई। विधान में नवीन जैन, रजनी जैन को सौधर्म इंद्र, राजेश जैन, रीता जैन को धन कुबेर, अनुभव जैन, निहारिका जैन, अमित जैन, रचना जैन को यज्ञ नायक, मनोज जैन, सारिका जैन आदि को इंद्र और इंद्रायनी की भूमिका निभाने का सौभाग्य मिला।